शहर के उसी तरफ़ पढ़ाइए जिस तरफ़ आप रहते हैं
शाम सात बजे आलमबाग से गोमती नगर पहुँचने में एक तरफ़ का ही एक घंटा चला जाता है। क्लास अपने एक-दो इलाक़ों में रखने से हफ़्ते की दो क्लास पाँच हो जाती हैं।
अगर आपका विषय आपकी पकड़ में है और आप उसे धीरज से समझा सकते हैं, तो इस शहर में होम ट्यूशन का काम जो माँगता है वह आपके पास पहले से है। Edutara को बता दीजिए कि आप क्या पढ़ाते हैं, किन कक्षाओं में सहज हैं और लखनऊ में कहाँ तक पहुँच सकते हैं। आगे की तलाश यहीं से शुरू होती है।
परिवारों की नज़र में Edutara5 में से 4.82,066 समीक्षाएँ
लखनऊ में ट्यूटर जॉब का मतलब है एक समय में एक ही विद्यार्थी को पढ़ाना, उसके घर पर या ऑनलाइन, उसी विषय में जो आपका अपना है। इस शहर में तीन स्कूल व्यवस्थाएँ आस-पास ही चलती हैं, इसलिए यहाँ काम सबसे पहले बोर्ड से पहचाना जाता है। अमीनाबाद के पास हिंदी माध्यम में यूपी बोर्ड की कक्षा 9 पढ़ रहा विद्यार्थी, गोमती नगर में प्रवेश परीक्षा की ओर बढ़ता CBSE का कक्षा 12 का विद्यार्थी और ICSE का वह विद्यार्थी जिसके स्कूल में लंबे वर्णनात्मक उत्तर पर नंबर मिलते हैं, तीनों का काम अलग है। आप वही लीजिए जो आप सचमुच पढ़ा सकते हैं, फ़ीस परिवार के साथ तय कीजिए और हफ़्ते का एक घंटा पक्का रखिए।
इस शहर में एक ही सड़क पर यूपी बोर्ड का इंटर कॉलेज, CBSE का स्कूल और ISC का स्कूल मिल जाते हैं। नीचे वही विषय हैं जो बार-बार सामने आते हैं। उतना ही चुनिए जितना आप अकेले संभाल सकें।
UPMSP की कक्षा 9 से 12, अक्सर हिंदी माध्यम में, जहाँ फ़रवरी की परीक्षा पूरे साल की चाल तय करती है।
गोमती नगर, इंदिरा नगर और अलीगंज के स्कूलों के लिए गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी।
पहले बोर्ड का पाठ्यक्रम, और विद्यार्थी चाहे तो वही अध्याय प्रवेश परीक्षा के अभ्यास तक ले जाइए।
ISC, CBSE और यूपी बोर्ड के लिए वनस्पति और प्राणी विज्ञान, जिनमें कई विद्यार्थी NEET-UG की सोच भी रखते हैं।
वे विद्यार्थी जो कोचिंग के बैच में तो बैठते हैं, पर जिन्हें अध्याय दोबारा धीरे से खड़ा करने वाला एक व्यक्ति चाहिए।
जनरल टेस्ट, भाषा का खंड और डोमेन के पेपर, जिनसे इसी शहर के विश्वविद्यालयों में दाख़िला तय होता है।
कक्षा 11 और 12 का कॉमर्स, उन हिंदी माध्यम के पेपरों सहित जो यूपी बोर्ड के विद्यार्थी लिखते हैं।
यूपी बोर्ड की समय-सारिणी जिस अनिवार्य हिंदी के पेपर से खुलती है, और कक्षा 10 तक की संस्कृत।
वे विद्यार्थी जो बोलने को कहने पर अटक जाते हैं, और लखनऊ में इंटरव्यू की तैयारी करते वयस्क।
स्कूल के कंप्यूटर पेपर, और कक्षा 9 से 12 के लिए प्रोग्रामिंग की शुरुआती सीढ़ियाँ।
कक्षा 1 से 5, जहाँ काम है पढ़कर सुनाना, पहाड़े, लिखावट और छोटे बच्चे को मेज़ पर बिठाए रखना।
विदेश के विश्वविद्यालयों में आवेदन कर रहे वयस्कों के लिए सुनने, पढ़ने, लिखने और बोलने का अभ्यास।
होम ट्यूशन उसी रास्ते पर चलता है जो अपने कॉलेज या दफ़्तर के बाद सचमुच तय हो सके। शहर का वही हिस्सा चुनिए जिसमें आप रहते हैं, और बाक़ी के लिए ऑनलाइन क्लास रख लीजिए।
विभूति खंड, विपुल खंड, विनय खंड, विशाल खंड, विजय खंड, विश्वास खंड
अशोक मार्ग, विधान सभा मार्ग, कैसरबाग, लालबाग, सप्रू मार्ग
चौक, नक्खास, नाका हिंडोला, यहियागंज, ठाकुरगंज
महानगर, निराला नगर, अलीगंज, कपूरथला, डालीगंज
मुंशीपुलिया, भूतनाथ मार्केट, लेखराज मार्केट, तकरोही, खुर्रम नगर
कमता, मटियारी, देवा रोड, मलहौर
चारबाग, मवैया, सिंगार नगर, कृष्णा नगर, कानपुर रोड
एलडीए कॉलोनी, तेलीबाग, रुचि खंड, पराग, बंगला बाज़ार
जानकीपुरम विस्तार, कुर्सी रोड, सीतापुर रोड, विकास नगर
यहाँ के विद्यार्थी जिन स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ते हैं, और शहर की शिक्षा से जुड़े तथ्य, हर एक के साथ उसका स्रोत।
ICSE और ISC स्कूल, शहर भर में कैंपस
ICSE और ISC बालक विद्यालय
यूपी बोर्ड का बालिका इंटर कॉलेज
राज्य विश्वविद्यालय
राज्य प्राविधिक विश्वविद्यालय
केंद्रीय विश्वविद्यालय
राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय
राष्ट्रीय महत्व का संस्थान
भाषाओं का राज्य विश्वविद्यालय
महिलाओं का डिग्री कॉलेज
लखनऊ के यूपी बोर्ड वाले स्कूलों की 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएँ 18 फ़रवरी से 12 मार्च के बीच हुईं, और पहले ही दिन हिंदी का पेपर था।
लखनऊ विश्वविद्यालय बादशाह बाग के पुराने कैंपस और शहर के उत्तर में बने दूसरे कैंपस से पढ़ाता है, और जनपद भर के डिग्री कॉलेज इससे संबद्ध हैं।
रायबरेली रोड पर बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जहाँ स्नातक पाठ्यक्रमों के साथ परास्नातक और शोध की पढ़ाई भी होती है।
स्रोत: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आधिकारिक साइट, 2026
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पुराने शहर में चौक पर है, और उसकी MBBS सीटें NEET-UG से भरती हैं, वही पेपर जिसकी तैयारी लखनऊ के कई विद्यार्थी कर रहे होते हैं।
स्रोत: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, आधिकारिक साइट, 2026
आवेदन करने का कोई पैसा नहीं लगता और फ़ॉर्म छोटा है। काम जो माँगता है वह है एक विषय जिस पर आपकी पकड़ हो, और हफ़्ते का एक घंटा जिसे आप निभा सकें।
शहर फैला हुआ है, स्कूल व्यवस्थाएँ मिली-जुली हैं और शामें लंबी होती हैं। तीनों बातें उस व्यक्ति के हक़ में जाती हैं जो एक समय में एक विद्यार्थी को पढ़ाता है।
शाम सात बजे आलमबाग से गोमती नगर पहुँचने में एक तरफ़ का ही एक घंटा चला जाता है। क्लास अपने एक-दो इलाक़ों में रखने से हफ़्ते की दो क्लास पाँच हो जाती हैं।
लखनऊ में होम ट्यूशन ज़्यादातर स्कूल छूटने और रात के खाने के बीच होता है, इसलिए आपकी अपनी कक्षाएँ, प्रयोगशाला और लाइब्रेरी का समय बचा रहता है।
जिसने यूपी बोर्ड का हिंदी का पेपर या ISC का भौतिकी का पेपर ख़ुद लिखा है, वह जानता है कि परीक्षक किस बात पर नंबर देता है। यही बात किसी गाइड से नहीं मिलती।
इस शहर का बड़ा हिस्सा हिंदी माध्यम में पढ़ता है, इसलिए विज्ञान का अध्याय हिंदी में समझा पाने से वे परिवार आपके सामने खुलते हैं जहाँ अंग्रेज़ी वाला ट्यूटर नहीं टिकता।
रक़म क्लास शुरू होने से पहले तय होती है, और वह कक्षा, विषय और आपकी दूरी के हिसाब से घटती-बढ़ती है। Edutara उसमें कुछ तय नहीं करता।
कोई निगमन या राजव्यवस्था का अध्याय हर हफ़्ते बोलकर दोहराना सबसे साफ़ रिवीज़न है, और यह आपकी अपनी परीक्षा में दिखता है।
देवा रोड पर मटियारी के आगे या तेलीबाग से बाहर बसा परिवार शहर के ज़्यादातर हिस्सों से दूर पड़ता है। ऑनलाइन क्लास दोनों का सफ़र बचा देती है।
चार कदम, और उनमें पहला ही आपसे कुछ माँगता है। आवेदन किसी भी कदम पर मुफ़्त रहता है।
आपके विषय, जो कक्षाएँ आप ले सकते हैं, लखनऊ के जो इलाक़े आप तय कर सकते हैं, और यह कि पढ़ाना विद्यार्थी के घर पर है, ऑनलाइन है या दोनों।
आपके पास ईमेल पहुँचता है जिसमें आगे की बात लिखी होती है, ताकि किसी के पीछे भागे बिना आपको अपने आवेदन की स्थिति पता रहे।
कोई व्यक्ति देखता है कि आप क्या पढ़ाते हैं, किन कक्षाओं में सहज हैं और लखनऊ के किस हिस्से तक जा सकते हैं।
जिस विद्यार्थी को आपका विषय चाहिए, उससे आपका परिचय कराया जाता है और आप दोनों दिन तय कर लेते हैं। पहली क्लास ट्रायल क्लास होती है, और उसके बाद फ़ीस विद्यार्थी सीधे आपको देता है।
कौन पढ़ा सकता है, क्लास कैसे तय होती है और यहाँ साल कैसा चलता है।
अभी आवेदन करेंहाँ। लखनऊ विश्वविद्यालय, जानकीपुरम के प्राविधिक विश्वविद्यालय, इजाबेला थॉबर्न कॉलेज और शहर के डिग्री कॉलेजों के विद्यार्थी अपनी कक्षाओं के बाद शाम को ट्यूशन लेते हैं। परिवार दो ही बातें देखता है: विषय पर आपकी पकड़, और यह कि जिस दिन का वादा किया उस दिन आप पहुँचे। अपनी परीक्षाएँ पास हों तो शुरू में ही बता दीजिए और उन हफ़्तों में कम क्लास रखिए।
नहीं, और यह रोक क़ानून की है। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 किसी भी विद्यालय में कार्यरत शिक्षक को निजी ट्यूशन या निजी शिक्षण का काम करने से रोकती है, चाहे विद्यालय सरकारी हो, सहायता प्राप्त हो या पूरी तरह निजी। सेवानिवृत्त शिक्षक आवेदन कर सकते हैं, और वे लोग भी जो स्कूल व्यवस्था के बाहर पढ़ाते हैं, जैसे किसी डिग्री कॉलेज, कोचिंग संस्थान या प्रशिक्षण केंद्र में।
तीन, और तीनों यहाँ आस-पास ही हैं। यूपी बोर्ड, जिसकी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएँ फ़रवरी और मार्च में चलती हैं और जिसका हिंदी माध्यम शहर का बड़ा हिस्सा है। CBSE, जिसे गोमती पार की नई कॉलोनियों के बहुत से स्कूल मानते हैं। ICSE और ISC, जो ला मार्टिनियर जैसे स्कूलों के रास्ते सौ साल से भी ज़्यादा समय से लखनऊ में हैं। बता दीजिए कि इनमें से कौन सा आप पढ़ा सकते हैं, और अगर आपने ख़ुद एक ही बोर्ड पढ़ा है तो वह भी साफ़ कह दीजिए।
नहीं। आप वही इलाक़े चुनते हैं जहाँ आप पहुँच सकते हैं, और उनसे बाहर की बात आपके पास नहीं आती। ज़्यादातर ट्यूटर एक ही पट्टी में रहते हैं: अलीगंज के साथ महानगर और निराला नगर, या इंदिरा नगर के साथ मुंशीपुलिया और खुर्रम नगर, या आलमबाग के साथ कृष्णा नगर और कानपुर रोड। मेट्रो की एक ही लाइन मुंशीपुलिया से बादशाह नगर और हज़रतगंज होते हुए चारबाग, आलमबाग और एयरपोर्ट तक जाती है, तो उसके किनारे वाली पट्टी में आना-जाना आसान रहता है।
पहली क्लास से पहले आप और परिवार मिलकर तय करते हैं। रक़म कक्षा, विषय, घर पर पढ़ाना है या ऑनलाइन, और आपकी दूरी के हिसाब से बदलती है। Edutara न वह रक़म तय करता है, न उसमें से हिस्सा लेता है, न उसे इकट्ठा करता है, इसलिए जो आपने परिवार से तय किया वही आप तक पहुँचता है। आवेदन के लिए भी किसी कदम पर कुछ देना नहीं होता।
हाँ। फ़ॉर्म में यह बताने की जगह है कि आप केवल ऑनलाइन पढ़ाते हैं, और आपका आवेदन उसी तरह पढ़ा जाता है। ऑनलाइन उन लोगों के काम आता है जो जिस पट्टी में पढ़ाना चाहते हैं उससे दूर रहते हैं, और इससे शहर के बाहरी छोर भी काम लायक़ हो जाते हैं, चिनहट से आगे देवा रोड पर या आशियाना से बाहर, जहाँ शाम की एक क्लास में सड़क पर ही दो घंटे निकल जाते।
अड़चन नहीं है। एक समय में एक विद्यार्थी को पढ़ाना कक्षा के आगे खड़े होने से कम और अपने छोटे भाई-बहन को समझाने से ज़्यादा मिलता-जुलता है। चाहिए बस विषय, यह धीरज कि विद्यार्थी से वही सीढ़ी दोबारा करवा सकें, और हफ़्ते की एक योजना। पहली क्लास से पहले उस बोर्ड के दो-तीन पुराने पेपर देख लीजिए, ताकि पता रहे कि परीक्षक क्या माँगता है, और शुरुआत उसी अध्याय से कीजिए जिसमें विद्यार्थी सबसे कमज़ोर है।
दो दौर। नवंबर के आसपास से कक्षा 10 और कक्षा 12 के विद्यार्थी फ़रवरी से शुरू होने वाले बोर्ड के पेपरों की पक्की तैयारी में लग जाते हैं, और तभी परिवार ट्यूटर की तलाश सबसे ज़ोर से करता है। दूसरा दौर नए सत्र के साथ खुलता है, जब परिणाम देखने के बाद परिवार अगली परीक्षा का इंतज़ार छोड़कर कमज़ोर विषय को शुरू में ही पकड़ लेना चाहता है।
यह पेज उनके लिए है जो पढ़ाना चाहते हैं। अगर आप लखनऊ में अपने लिए या अपने बच्चे के लिए ट्यूटर खोज रहे हैं, तो Edutara ऐसा ट्यूटर खोज सकता है जो ठीक वही पढ़ाए जिसकी आपको ज़रूरत है।
Edutara को अपने विषय, जो कक्षाएँ आप ले सकते हैं और शहर का वह हिस्सा बता दीजिए जहाँ आप पहुँच सकते हैं। फ़ॉर्म में कुछ ही मिनट लगते हैं, और आवेदन मुफ़्त है।