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कक्षा 1 से 5

प्राइमरी ट्यूशन, कक्षा 1 से 5 तक के साल

प्राइमरी ट्यूशन उन सालों के लिए है जब बच्चा पंक्ति पढ़ना और संख्या दिमाग़ में रखना सीखता है, और हज़ारों नन्हे विद्यार्थी ये साल घर पर या ऑनलाइन Edutara के साथ बिताते हैं। एक ट्यूटर एक बच्चे के साथ बैठकर वह जगह ढूँढ़ता है जहाँ बात छूटी थी।

कक्षा की मेज़ पर साथ बैठकर किताब पढ़ते दो छोटे बच्चे

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विषय की गाइड

क्या है

प्राइमरी ट्यूशन

प्राइमरी ट्यूशन का मतलब है कक्षा 1 से 5 तक के एक बच्चे के लिए वन-टू-वन पढ़ाई। National Education Policy 2020 इन सालों को दो हिस्सों में रखती है: Foundational Stage, जो कक्षा 2 पर ख़त्म होता है, और Preparatory Stage, जिसमें कक्षा 3 से 5 और 8 से 11 साल की उम्र आती है। यहाँ कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होती, इसलिए कमज़ोरी अपने आप सामने नहीं आती। इन सालों में वह बुनियाद बनती है जिस पर अगले आठ साल टिके रहेंगे: एक वाक्य पढ़कर उसका अर्थ समझ लेना, ऐसी लिखावट जो दूसरा आदमी पढ़ सके, और सैकड़ों-हज़ारों तक की संख्याएँ उँगलियों पर गिने बिना संभाल लेना। ट्यूटर का काम है उस एक जगह को पहचानना जहाँ यह बुनियाद खिसकी थी, और उसे दोबारा जमाना।

मुख्य बातें

  • कक्षा 1 और 2 Foundational Stage हैं, और कक्षा 3 से 5 यानी 8 से 11 साल की उम्र Preparatory Stage है।

  • शिक्षा मंत्रालय के NIPUN Bharat का लक्ष्य है कि कक्षा 3 के अंत तक बच्चा अनदेखे पाठ के 60 शब्द प्रति मिनट समझ के साथ पढ़ ले।

  • स्कूलों में NCERT की नई किताबें आ चुकी हैं: कक्षा 1 में Mridang और सारंगी, कक्षा 3 से Santoor, वीणा, Maths Mela और Our Wondrous World।

  • केंद्र सरकार के स्कूलों में कक्षा 5 के बच्चे की अब साल के अंत में परीक्षा होती है, RTE संशोधन नियम 2024 के तहत।

  • क्लास बच्चे के घर पर होती है या ऑनलाइन, एक ट्यूटर के साथ एक ही बच्चा, और जब भी कहें, नया ट्यूटर मुफ़्त मिलता है।

पढ़ाई के तरीके

प्राइमरी की क्लास दो तरह से चल सकती है

छोटा बच्चा उस कमरे में बेहतर सीखता है जहाँ ट्यूटर, कॉपी और पेंसिल तीनों हाथ की दूरी पर हों। जहाँ यह मुश्किल हो, वही पढ़ाई स्क्रीन पर भी चलती है, बशर्ते घर का कोई बड़ा पास बैठा हो।

  1. अवधि: आम तौर पर 45 से 60 मिनट, ट्यूटर से तय

    आपके घर पर ट्यूशन

    ट्यूटर घर आता है और उसी मेज़ पर पढ़ाता है जिस पर बच्चा रोज़ बैठता है, स्कूल की कॉपी और किताब खुली रखकर। लिखावट, पेंसिल की पकड़ और आधे सवाल पर हार मान लेने की आदत, तीनों उसी कुर्सी से दिख जाती हैं।

    • पढ़ाई बच्चे की अपनी स्कूल कॉपी से चलती है
    • लिखावट और नक़ल का काम उसी समय सुधरता है
    • माता-पिता क्लास में शामिल हुए बिना देख सकते हैं
    • कक्षा 1 से 3 के लिए सबसे उपयुक्त, जब ध्यान कम देर टिकता है
  2. अवधि: आम तौर पर 40 से 50 मिनट, ट्यूटर से तय

    ऑनलाइन क्लास

    वीडियो पर क्लास, स्क्रीन साझा करके, और साथ में एक वर्कशीट जिसे बच्चा कॉपी में उतार सके। यह उस बच्चे के काम आती है जिसके शहर में सही ट्यूटर नहीं मिलता, और कक्षा 3 से ऊपर ठीक चलती है।

    • वर्कशीट जिन्हें बच्चा अगले दिन दोबारा कर सके
    • दोनों तरफ़ का आने-जाने का समय बचता है
    • तबादले या घर बदलने पर पढ़ाई टूटती नहीं
पढ़ाई का रोडमैप

हर प्राइमरी कक्षा असल में क्या माँगती है

पाँच कक्षाएँ, और हर एक में वह एक चीज़ जो बच्चे को पक्की करनी है। जिस ट्यूटर को यह सूची पता है, वह दो क्लास में बता देता है कि गड़बड़ किस साल से शुरू हुई थी।

  1. कक्षा 1 और 2

    Foundational Stage

    बच्चा यह समझ रहा होता है कि अक्षरों की अपनी आवाज़ होती है और आवाज़ों से शब्द बनते हैं। NCERT की Mridang, सारंगी और Joyful Mathematics इन दो सालों को संभालती हैं। इस उम्र का ट्यूशन बोलकर पढ़ना, अक्षर बनाना और चीज़ें उठाकर गिनना है।

    विषय

    Englishहिंदी या घर की भाषागणित

    किन बातों पर ज़ोर

    • अक्षरों की आवाज़, मात्राएँ और जोड़कर पढ़ना
    • 99 तक की संख्याएँ और आँखों से दिखता जोड़
    • पेंसिल की पकड़ और चार लाइन की कॉपी में अक्षर
  2. कक्षा 3

    जिस साल को नापा जाता है

    शिक्षा मंत्रालय के NIPUN Bharat का लक्ष्य यहीं आकर बैठता है: कक्षा 3 के अंत तक अनदेखे पाठ के कम से कम 60 शब्द प्रति मिनट, समझ और साफ़ उच्चारण के साथ। Maths Mela बच्चे को Toy Joy और Double Century से निकालकर House of Hundreds तक ले जाती है, जहाँ से स्थानीय मान असली वज़न उठाने लगता है।

    विषय

    EnglishहिंदीगणितThe World Around Us

    किन बातों पर ज़ोर

    • अनदेखा पन्ना पढ़कर अपने शब्दों में सुनाना
    • 999 तक स्थानीय मान, हासिल और उधार दोनों
    • बिना नमूने के चार-पाँच वाक्य लिख लेना
  3. कक्षा 4

    Preparatory Stage

    पाठ लंबे हो जाते हैं और उम्मीद की जाती है कि बच्चा उन्हें अकेले पढ़ ले। पहाड़े गीत होना छोड़कर भाग और दो चरणों वाले सवालों का औज़ार बन जाते हैं। Santoor, वीणा, Maths Mela और Our Wondrous World कक्षा 3 से आगे चलती हैं, और लिखने की रफ़्तार सुंदरता जितनी ही मायने रखने लगती है।

    विषय

    EnglishहिंदीगणितThe World Around Us

    किन बातों पर ज़ोर

    • पहाड़े बेतरतीब क्रम में और भाग के भीतर
    • बिना किसी बड़े के एक पूरा पाठ पढ़ लेना
    • पूरे वाक्य में उत्तर लिखना
  4. कक्षा 5

    प्राइमरी का आख़िरी साल

    कक्षा 5 की Maths Mela भिन्न और कोणों से शुरू होकर नक़्शों और चित्र-आँकड़ों पर ख़त्म होती है। केंद्र सरकार के स्कूलों में यही वह साल है जहाँ साल के अंत की परीक्षा है, और नियम न पूरे होने पर नतीजे के दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा का मौक़ा भी।

    विषय

    EnglishहिंदीगणितThe World Around Us

    किन बातों पर ज़ोर

    • भिन्न, दशमलव और मापन
    • लिखने से पहले उत्तर की रूपरेखा बनाना
    • दिए गए समय में पूरा प्रश्नपत्र पूरा करना
विषयवस्तु का नक्शा

प्राइमरी का ट्यूटर असल में क्या-क्या कराता है

सात हिस्से, और कोई ट्यूटर एक साथ सब पर काम नहीं करता। पहले पंद्रह दिन आम तौर पर यही पता लगाने में जाते हैं कि इनमें से कौन से दो बाक़ी सबको रोके हुए हैं।

आधार 2026-27 सत्र में स्कूलों में चल रही NCERT की किताबें हैं, और इसे आपके स्कूल की तय की हुई किताबों के हिसाब से बदला जाता है।

मॉड्यूल 01

English पढ़ना

अक्षर जोड़कर पढ़ लेना और पढ़ी हुई बात समझ लेना, ये दो अलग कौशल हैं और एक के बिना दूसरा हो सकता है। कक्षा 3 की Santoor हर इकाई की शुरुआत चित्र पढ़ने के पन्ने से करती है, और ट्यूटर उसी पन्ने से शुरू करता है।

  • अक्षरों की आवाज़ और उन्हें जोड़ना
  • उँगली रखे बिना बोलकर पढ़ना
  • पाठ से पहले चित्र पढ़ना
  • पढ़ी हुई बात अपने शब्दों में सुनाना
  • वे शब्द जिन पर बच्चा हर बार अटकता है
  • रफ़्तार और समझ, दोनों साथ बढ़ाना

मॉड्यूल 02

हिंदी या घर की भाषा

National Education Policy 2020 कहती है कि जहाँ तक हो सके कक्षा 5 तक पढ़ाई का माध्यम घर की भाषा रहे। असल में कई बच्चे English अपनी घर की भाषा से बेहतर पढ़ लेते हैं, और यह बात सबसे पहले हिंदी के पर्चे में दिखती है।

  • मात्राएँ और उनसे बदलती आवाज़
  • सारंगी या वीणा का एक पन्ना बोलकर पढ़ना
  • श्रुतलेख से लिखना
  • लिंग, वचन और शुरुआती व्याकरण
  • पूरे वाक्य में उत्तर देना

मॉड्यूल 03

संख्या-बोध और स्थानीय मान

प्राइमरी में गणित की लगभग हर गड़बड़ी घूमकर इसी पर आती है कि स्थानीय मान कभी हाथ से छुआ ही नहीं गया। कक्षा 3 की Maths Mela के House of Hundreds वाले पाठ इसी के लिए हैं, और ट्यूटर कक्षा 5 के बच्चे को भी अक्सर वहीं वापस ले जाता है।

  • 99 तक, फिर 999 और उससे आगे
  • इकाई, दहाई और सैकड़ा बंडल की तरह
  • हासिल और उधार के साथ जोड़-घटाव
  • हल करने से पहले अंदाज़ा लगाना
  • संख्याओं को शब्दों में पढ़ना और लिखना

मॉड्यूल 04

पहाड़े, गुणा और भाग

हर बार शुरू से दोहराया जाने वाला पहाड़ा एक गीत है, और भाग के सवाल के भीतर गीत किसी काम नहीं आता। गिनती की छलाँग से पहाड़ा बनाना और फिर उसे बेतरतीब क्रम में पूछना पहले हफ़्ते धीमा लगता है और चौथे हफ़्ते तेज़ पड़ जाता है।

  • 2 से 12 तक के पहाड़े छलाँग गिनती से
  • गुणा यानी बार-बार जोड़ना
  • भाग यानी बराबर बाँटना, और गुणा का उल्टा
  • दो चरणों वाले शब्द सवाल
  • उत्तर को उल्टा चलकर जाँचना

मॉड्यूल 05

मापन, आकृतियाँ और आँकड़े

पाठ्यक्रम का यह हिस्सा आसान दिखता है और चुपचाप आगे जाकर अंक खाता है, क्योंकि इसे जल्दी पढ़ाया जाता है और एक ही बार कराया जाता है। कक्षा 3 का Filling and Lifting और कक्षा 5 का Weight and Capacity एक ही बात हैं, चार साल के फ़ासले पर।

  • असली बर्तनों से लंबाई, वज़न और धारिता
  • सुई वाली घड़ी और स्क्रीन, दोनों पर समय
  • पैसे, बाक़ी रक़म और साधारण बिल
  • कक्षा 5 से भिन्न और सममित रचनाएँ
  • चित्र-आँकड़े पढ़ना और बनाना

मॉड्यूल 06

The World Around Us

पर्यावरण अध्ययन अब The World Around Us के नाम से पढ़ाया जाता है, और कक्षा 5 की Our Wondrous World इकाइयों में बँटी है, जैसे Life Around Us, Incredible India और Our Amazing Planet। इसके सवाल बच्चे से देखना और समझाना माँगते हैं, जो उतना ही लिखने का कौशल है जितना विज्ञान का।

  • पानी, भोजन और शरीर
  • Journey of a River और Rhythms of Nature
  • Our Vibrant Country और Some Unique Places
  • साल भर निरीक्षण की डायरी रखना
  • 'let us reflect' वाले सवालों के उत्तर लिखना

मॉड्यूल 07

लिखावट और नक़ल का काम

धीरे लिखने वाला बच्चा एक साथ हर विषय में पीछे छूटता है, क्योंकि कक्षा आगे बढ़ जाती है और कॉपी दूसरी लाइन पर अटकी रहती है। यही वह चीज़ है जो माता-पिता को दिखती है और जिसके लिए स्कूल के पास समय कम होता है।

  • पेंसिल की पकड़, कॉपी का कोण और बैठने का ढंग
  • चार लाइन की कॉपी में अक्षरों की बनावट
  • बोर्ड से उतारते समय शब्द न छूटना
  • बनावट बिगाड़े बिना रफ़्तार बढ़ाना
  • ऐसी कॉपी जिससे बाद में दोहराया जा सके
यह किसके लिए है

प्राइमरी का ट्यूटर कौन खोजता है

पाँच में से चार अनुरोध एक ही वाक्य के साथ आते हैं: कुछ ठीक नहीं चल रहा, और स्कूल कहता है सब ठीक है। आम तौर पर वह कुछ इनमें से निकलता है।

कक्षा 1 या 2 का बच्चा, जो अभी जम रहा है

स्कूल शुरू हुए महीने बीत गए और अक्षर अब भी उल्टे बन रहे हैं, या होमवर्क पर रोज़ रोना होता है। इस उम्र में ट्यूटर का ज़्यादा समय आवाज़ों, गिनती और पेंसिल की पकड़ पर जाता है।

सुझाव:

बोलकर पढ़ना99 तक संख्याएँलिखावट

कक्षा 3 का बच्चा जो धीरे पढ़ता है

बच्चा पढ़ता है, ठीक पढ़ता है, और कुछ याद नहीं रहता। प्राइमरी ट्यूटर बुलाने की यह सबसे आम वजह है, और इसी की राष्ट्रीय कसौटी सबसे साफ़ है।

सुझाव:

पढ़ने की रफ़्तारसमझस्थानीय मान

कक्षा 5 की परीक्षा के सामने खड़ा बच्चा

केंद्र सरकार के स्कूलों में कक्षा 5 के अंत की परीक्षा फिर से असली हो गई है, और बच्चे के लिए अच्छा है कि पहली बार पर्चा देने से पहले वह जान ले कि पर्चा होता कैसा है। उत्तर लिखना और समय संभालना पाठ्यक्रम जितने ही ज़रूरी हैं।

सुझाव:

भिन्नपूरा प्रश्नपत्रउत्तर लिखना

जिनका स्कूल, बोर्ड या माध्यम बदला है

बीच सत्र में तबादला, राज्य बोर्ड के स्कूल से CBSE में आना, या घर की भाषा से English माध्यम में जाना। कमी बच्चे की क़ाबिलियत में कम होती है, और उन पाठों में ज़्यादा जो किसी ने दोबारा नहीं पढ़ाए।

सुझाव:

पीछे का हिसाबमाध्यम बदलनाछूटे हुए पाठ
तैयारी का मूल्यांकन

आपका बच्चा इस वक़्त कहाँ खड़ा है?

छह सवाल, जिनके जवाब एक मिनट में दिए जा सकते हैं, उन्हीं चीज़ों के बारे में जो प्राइमरी में सबसे पहले फिसलती हैं।

यह बच्चे की परीक्षा नहीं है और इसका हिसाब किसी स्कूल में नहीं जाता। यह एक धुँधली चिंता को इतना साफ़ कर देने का तरीक़ा है कि उसे ट्यूटर के हाथ में रखा जा सके: पढ़ना, पहाड़े, लिखना, या यही कि अटकने पर बच्चा कुछ कहता है या नहीं।

प्रगति0/6 सवाल
कुल 6 में से सवाल 1understanding
बच्चा स्कूल की किताब का एक पन्ना बोलकर पढ़ता है। उसके बाद क्या होता है?

सही लगने वाला जवाब चुनें

पढ़ाई की सामग्री की एक झलक

कक्षा 3 की एक क्लास का पन्ना

यह इसी पन्ने के लिए लिखा गया है, किसी किताब से उठाया नहीं गया। एक घंटे की क्लास में पंद्रह मिनट बीतने पर ट्यूटर अक्सर ऐसी ही चीज़ बच्चे के सामने रखता है।

कक्षा 3: एक ही बैठक में पढ़ना और गिनती

मेज़ पर रखी जाने वाली पर्चियाँ

क्ख्ग्घ्
किताबखिड़कीगिलासघड़ी
100101
3 सैकड़ा4 दहाई5 इकाई

टुकड़ों से बनता पूरा

  1. घ्अड़ीघड़ी
  2. 3 सैकड़ा4 दहाई5 इकाई345
  3. 7छह बार42
  4. 52में से 2725

पढ़िए, फिर उत्तर दीजिए

मीरा के पास 345 कंचे थे। उसने 27 कंचे अपने भाई को दे दिए और बाक़ी डिब्बे में रख दिए।

सवाल: डिब्बे में कितने कंचे हैं?

जवाब: 318। जो बच्चा उधार लेना जानता है वह यहीं पहुँचता है। जो हर जगह छोटे अंक को बड़े में से घटाता है वह 322 कहेगा, और यही एक ग़लत उत्तर ट्यूटर को बता देता है कि शुरुआत कहाँ से करनी है।

असली बात आख़िरी पंक्ति है। जो बच्चा सिर्फ़ अक्षर जोड़कर पढ़ता है, वह वाक्य बहुत सुंदर पढ़ेगा और उत्तर फिर भी ग़लत देगा।

ट्यूटर सबसे पहले यही पाँच देखता है

प्राइमरी में बच्चे असल में कहाँ अटकते हैं

इनमें से कोई भी तुरंत ख़राब रिपोर्ट कार्ड नहीं बनता। ये दो-तीन साल बाद, किसी ऐसे विषय में दिखते हैं जिसका इनसे कोई रिश्ता नहीं लगता।

चुनौती

हर शब्द सही पढ़ना और कुछ भी याद न रहना

एक आम अड़चन

असली वजह

अक्षर जोड़कर पढ़ना और पढ़ी हुई बात समझना अलग-अलग रफ़्तार से बनते हैं। कक्षा में पढ़ाई बारी-बारी बोलकर होती है और तारीफ़ उसी को मिलती है जिसकी आवाज़ बहती हुई लगे। बच्चा पन्ना बहुत अच्छा गा लेना सीख जाता है, और भीतर कोई तस्वीर नहीं बनती।

क्या मदद करता है

ट्यूटर दो पंक्तियों पर रुककर पूछता है कि किसने क्या किया, फिर अगली पंक्ति पढ़ने से पहले अंदाज़ा लगवाता है। Santoor के चित्र वाले पन्ने इसी काम के लिए हैं, क्योंकि जो बच्चा चित्र की कहानी सुना सकता है उसमें वह आदत पहले से है।

चुनौती

पहाड़ा गीत की तरह याद, और भाग के सवाल में बेकार

एक आम अड़चन

असली वजह

पहाड़ा क्रम में याद हुआ है, इसलिए क्रम में ही निकलता है। सात छक्के पूछिए तो बच्चा सात एकम से शुरू करता है, और इतनी देर में बाक़ी सवाल दिमाग़ से उतर जाता है। भाग में हालत और ख़राब होती है, क्योंकि वहाँ पहाड़ा उल्टा चाहिए।

क्या मदद करता है

पहाड़े चीज़ों की छलाँग गिनती से दोबारा बनाए जाते हैं, फिर बेतरतीब क्रम में पूछे जाते हैं, और उसी दिन भाग में इस्तेमाल होते हैं। छह का पहाड़ा जिस दिन चलता है उसी दिन पूछा जाता है कि 42 में छह कितनी बार आता है।

चुनौती

ऊपर जो भी लिखा हो, छोटे अंक को बड़े में से घटा देना

एक आम अड़चन

असली वजह

उधार लेना एक नियम की तरह सिखाया गया था: ऊपर का अंक काटो और छोटा-सा नया लिखो। स्थानीय मान कभी हाथ से छुआ ही न गया हो तो इस नियम के टिकने की जगह नहीं बचती, और बच्चा चुपचाप उसे ऐसे नियम से बदल देता है जो हमेशा चल जाता है।

क्या मदद करता है

वापस बंडल पर। दस तीलियाँ बाँधकर एक दहाई, एक दहाई खोलकर दस तीलियाँ, और Maths Mela के House of Hundreds वाले पाठ असली चीज़ों के साथ। कक्षा 5 के बच्चे को भी कभी-कभी यही पंद्रह दिन चाहिए होते हैं।

चुनौती

लिखावट इतनी धीमी कि पूरी क्लास हाथ से निकल जाए

एक आम अड़चन

असली वजह

कक्षा आगे बढ़ जाती है और कॉपी दूसरी लाइन पर रहती है, तो बच्चा बग़ल वाले से उतार लेता है, और उतारी हुई चीज़ में ग़लतियाँ होती हैं। कक्षा 4 तक कॉपी दोहराने लायक़ नहीं बचती, यानी हर टेस्ट याद के भरोसे दोहराया जाता है।

क्या मदद करता है

पहले पेंसिल की पकड़ और कॉपी का कोण, फिर हर क्लास में दस मिनट चार लाइन की कॉपी पर अक्षरों की बनावट, और उसके बाद घड़ी लगाकर उतारना। रफ़्तार बनावट के अपने आप बन जाने से आती है, इसलिए घड़ी सबसे आख़िर में आती है।

चुनौती

वह बच्चा जो कभी नहीं कहता कि समझ नहीं आया

एक आम अड़चन

असली वजह

प्राइमरी का बच्चा जवाब देने से पहले बड़े का चेहरा पढ़ता है। सात साल की उम्र में यह कहने की क़ीमत होती है कि पाठ समझ नहीं आया, ख़ासकर अगर पिछली बार जवाब में झुँझलाहट मिली हो। इसलिए जवाब हाँ हो जाता है, और हफ़्ते में एक पाठ पीछे छूटता जाता है।

क्या मदद करता है

ट्यूटर बच्चे से वही क़दम बोलकर समझाने को कहता है, जिससे छिपाना मुश्किल हो जाता है और जो परीक्षा जैसा भी नहीं लगता। वन-टू-वन पढ़ाई में दर्शक भी नहीं होते, और कक्षा की ज़्यादातर चुप्पी दर्शकों की वजह से होती है।

ASER 2024 के अनुसार, 2024 में सरकारी स्कूलों की कक्षा 3 के 23.4 प्रतिशत बच्चे कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ सके, जो 2022 में 16.3 प्रतिशत था। उसी सर्वे में कक्षा 3 के 33.7 प्रतिशत बच्चे उधार वाला दो अंकों का घटाव कर सके।

हम सही ट्यूटर कैसे खोजते हैं

प्राइमरी के लिए ट्यूटर कैसे खोजा जाता है

छोटे बच्चे के लिए ट्यूटर कैसे खोजा जाता है, क़दम-दर-क़दम, ठीक वैसे जैसे कक्षा 1 से 5 के लिए Edutara की हर जोड़ी बनती है।

  1. एक बच्चा, एक ट्यूटर

    प्राइमरी की क्लास का ज़्यादातर हिस्सा एक बच्चे का पढ़ना सुनना, एक हाथ का लिखना देखना और उस पल को पकड़ना है जब ध्यान हटता है। समूह में इनमें से कुछ नहीं बचता, इसलिए यहाँ ग्रुप क्लास है ही नहीं।

  2. कक्षा, बोर्ड और विषय पर मिलान

    आप कहते हैं कक्षा 3, CBSE, गणित और हिंदी, शाम को घर पर। Edutara फिर ठीक इसी जोड़ का ट्यूटर खोजता है, उसी भाषा में जिसमें बच्चे को स्कूल में पढ़ाया जा रहा है।

  3. बच्चे का ट्यूटर से जमना ज़रूरी है

    छोटे बच्चे किसी इंसान के साथ जम जाते हैं या नहीं जमते, और माता-पिता को यह एक घंटे में पता चल जाता है। पहले हफ़्ते में हो या साल के बीच में, बच्चे को दूसरा ट्यूटर चाहिए तो Edutara उसे मुफ़्त खोज देता है।

  4. फ़ीस Edutara तय करता है

    छोटे बच्चे की क्लास का भुगतान माता-पिता Edutara को हर महीने एक बिल से करते हैं। रक़म Edutara कक्षा, विषय और शहर के हिसाब से तय करता है, और हर क्लास का भुगतान ट्यूटर को करता है।

  5. ट्यूटर से कभी कुछ नहीं लिया जाता

    न जुड़ने की फ़ीस, न किसी लीड के पैसे, और हर क्लास का भुगतान Edutara करता है। यह हमेशा के लिए है, और इसी वजह से छोटे शहर का एक अच्छा स्नातक ट्यूशन शुरू करने की हिम्मत कर पाता है।

प्राइमरी के ट्यूटर को क्या आना चाहिए

छह साल के बच्चे को पढ़ाना और ग्यारह साल के बच्चे को पढ़ाना दो अलग काम हैं, और प्राइमरी के ट्यूटर से एक ही हफ़्ते में दोनों की उम्मीद की जाती है।

ट्यूटर में हम क्या देखते हैं
  • कक्षा 1 और कक्षा 5 दोनों को एक ही हफ़्ते में पढ़ा सके, दोनों के लिए एक ही तरीक़ा दोहराए बिना
  • उस माध्यम में सहज हो जिसमें स्कूल पढ़ाता है: English, हिंदी या बच्चे के घर की भाषा
  • NCERT की मौजूदा प्राइमरी किताबें जानता हो, या स्कूल की तय की हुई राज्य बोर्ड की किताबें
  • पेंसिल की पकड़, चार लाइन की कॉपी और एक ही सवाल की पंद्रहवीं कोशिश पर धैर्य रख सके
  • स्कूल व्यवस्था से बाहर का हो: निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 कार्यरत स्कूल शिक्षकों को निजी ट्यूशन से रोकती है
  • पहले पंद्रह दिन में माता-पिता को साफ़-साफ़ बता सके कि कमी असल में कहाँ है

प्राइमरी की क्लास कैसे बनाई जाती है

सबसे पहले ज़मीन ढूँढ़िए

पहली दो-तीन क्लास जाँच की होती हैं। एक अनदेखा पन्ना बोलकर पढ़वाना, दो कक्षा नीचे का एक सवाल, और श्रुतलेख की एक पंक्ति। ट्यूटर वह सबसे नीचे का स्तर खोज रहा होता है जहाँ बच्चा पूरी तरह पक्का है, और पढ़ाई वहीं से शुरू होती है।

आगे बढ़ने से पहले पीछे जाइए

अगर कक्षा 5 के बच्चे को भिन्न इसलिए नहीं आ रहे कि स्थानीय मान कभी टिका ही नहीं, तो उस पर लगाए गए पंद्रह दिन छोटा रास्ता हैं। कमी के ऊपर मौजूदा पाठ चढ़ा देने से ऐसा बच्चा बनता है जो तरीक़ा उतार लेता है और वजह नहीं समझता।

छोटे-छोटे हिस्से, हाथ में चीज़ें

कक्षा 1 से 3 में ध्यान लगभग दस मिनट के टुकड़ों में आता है। क्लास ऐसे तीन-चार टुकड़ों से बनती है, गिनने की गोटियों, बंडलों, चार लाइन की कॉपी और चित्र वाले पन्ने के साथ, और सबसे कठिन हिस्सा दूसरे नंबर पर रखा जाता है।

हर पंद्रह दिन में बताइए क्या बदला

माता-पिता को साफ़ भाषा में पता होना चाहिए कि किस चीज़ पर काम हुआ और क्या हिला, बिना किसी चार्ट के। प्राइमरी पढ़ाई में हर दो हफ़्ते पर ट्यूटर यह साफ़ बता पाए, यही इस बात का सबूत है कि पढ़ाई आगे बढ़ रही है।

सुविधाओं की तुलना

होम ट्यूटर, ट्यूशन क्लास, या ख़ुद पढ़ाना

प्राइमरी बच्चे के लिए तीनों जायज़ हैं, और तीनों ख़ूब चलते हैं। फ़र्क़ इसमें है कि आपका बच्चा जो ख़ास ग़लती कर रहा है, उसे कौन पकड़ेगा।

Edutara
मोहल्ले की ट्यूशन क्लास
घर पर ख़ुद पढ़ाना

कोई ढूँढ़ता है कि कौन-सा पाठ छूटा था

पूरा घंटा एक ही बच्चे का होता है

पढ़ाई आपके स्कूल की अपनी किताबों से चलती है

पढ़ाने वाला जानता है कि प्राइमरी में पढ़ना कैसे बनता है

ख़ास

बच्चे के लिए कभी भी मुफ़्त नया ट्यूटर

जब ख़ाली घंटा रात आठ के बाद ही मिले, तब भी चलता है

घर पर या ऑनलाइन

प्राइमरी की क्लास कहाँ होती है

  1. ऑनलाइन ट्यूशन

    भारत में कहीं भी, ठीक इंटरनेट के साथ

    ऑनलाइन कक्षा 3 से ऊपर के बच्चों के लिए ठीक बैठता है, और शुरू की कुछ क्लास में घर के किसी बड़े का पास होना ज़रूरी है। इस उम्र में तय समय बाक़ी हर चीज़ से ज़्यादा मदद करता है, क्योंकि आधा काम आदत ही कर देती है।

    हफ़्ते का एक तय समय, जो टलता नहीं
    घर का कोई बड़ा पास बैठ सकता है
    वर्कशीट जिन्हें बच्चा हाथ से कॉपी में उतारे

    टाइम ज़ोन: IST (UTC+5:30)

  2. होम ट्यूशन

    शहर दर शहर, जैसे-जैसे ट्यूटर मिलते हैं

    होम ट्यूशन एक-एक शहर में शुरू किया जा रहा है। फ़ॉर्म में अपना इलाक़ा लिख दीजिए, और Edutara ऐसा ट्यूटर खोजेगा जो उसी समय आपके घर तक पहुँच सके और उसी माध्यम में पढ़ा सके।

    उपलब्ध शहर:

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्राइमरी के सालों पर माता-पिता के सवाल

वही सवाल जो सबसे ज़्यादा आते हैं, और उनके जवाब वही जो शिक्षा मंत्रालय, NCERT और सर्वेक्षण असल में कहते हैं।

मेरा बच्चा कक्षा 3 में है और अब भी धीरे पढ़ता है। चिंता की बात है क्या?
नापने की कसौटी सार्वजनिक है। NIPUN Bharat के तहत शिक्षा मंत्रालय की उम्मीद है कि कक्षा 3 के अंत तक बच्चा अनदेखे और उम्र के मुताबिक़ पाठ के कम से कम 60 शब्द प्रति मिनट, समझ और साफ़ उच्चारण के साथ पढ़ ले। इससे धीमा होना आम है और जल्दी ध्यान देने लायक़ है। ASER 2024 के अनुसार 2024 में सरकारी स्कूलों की कक्षा 3 के 23.4 प्रतिशत बच्चे कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ सके, जो उस सर्वे के शुरू होने के बाद का सबसे ऊँचा आँकड़ा है। ट्यूटर पहले एक पन्ना घड़ी लगाकर पढ़वाता है और फिर पूछता है कि उसमें हुआ क्या, क्योंकि धीरे पढ़ना और ख़ाली पढ़ना दो अलग काम माँगते हैं।
क्या अब मेरे कक्षा 5 के बच्चे को परीक्षा पास करनी होगी?
यह इस पर निर्भर करता है कि स्कूल किसका है। 21 दिसंबर 2024 की अधिसूचना G.S.R. 777(E) के ज़रिए केंद्र सरकार ने निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) नियम, 2024 अधिसूचित किए, जो उन स्कूलों की कक्षा 5 और 8 पर लागू होते हैं जो केंद्र सरकार या बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासक द्वारा स्थापित, स्वामित्व या नियंत्रित हैं। साल के अंत की परीक्षा में तय शर्तें पूरी न होने पर बच्चे को अतिरिक्त पढ़ाई और नतीजे के दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा का मौक़ा मिलता है, और उसके बाद भी शर्तें पूरी न हों तो वह उसी कक्षा में रहता है। मंत्रालय को दी गई जानकारी के अनुसार 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने 2019 का संशोधन अधिसूचित किया है, जबकि सोलह जगहों पर कक्षा 1 से 8 तक किसी को रोका नहीं जाता। प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने से पहले किसी बच्चे को स्कूल से निकाला नहीं जा सकता।
स्कूल English में पढ़ाता है, क्या ट्यूटर हिंदी में पढ़ा सकता है?
हाँ, और प्राइमरी बच्चे के लिए अक्सर यही तेज़ रास्ता है। National Education Policy 2020 कहती है कि जहाँ तक संभव हो कक्षा 5 तक पढ़ाई का माध्यम घर की भाषा, मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा रहे, और जहाँ दोनों अलग हों वहाँ दो भाषाओं वाला तरीक़ा अपनाया जाए। असल में ट्यूटर बात उसी भाषा में समझाता है जिसमें बच्चा सोचता है, और फिर वही उत्तर उस भाषा में दोहरवाता है जिसमें स्कूल पूछेगा। फ़ॉर्म में लिख दीजिए कि घर में कौन सी भाषा चलती है और स्कूल किस माध्यम में पढ़ाता है।
रिपोर्ट कार्ड में अब अंक ही नहीं आते। कैसे पता चले कि बच्चा कहाँ है?
बहुत से स्कूल अब NCERT के आकलन केंद्र PARAKH का Holistic Progress Card इस्तेमाल करते हैं, जिसके अलग कार्ड Foundational Stage के लिए और कक्षा 3 से 5 के Preparatory Stage के लिए हैं। यह साल भर अलग-अलग क्षेत्रों में बच्चे की प्रगति दर्ज करता है और इसमें शिक्षक का निरीक्षण, बच्चे का अपना आकलन और माता-पिता तथा सहपाठियों की बात शामिल होती है, इसलिए इसे बच्चे की प्रगति के विस्तृत विवरण की तरह पढ़ा जाता है। प्रतिशत से यह ज़्यादा ईमानदार है और अकेले इस पर काम करना ज़्यादा मुश्किल। व्यावहारिक जवाब यह है कि आप ख़ुद तीन चीज़ें जाँच लीजिए: एक पन्ना बोलकर पढ़वाना, उधार वाला दो अंकों का घटाव, और कोई पहाड़ा बेतरतीब क्रम में।
क्या कक्षा 1 में ट्यूशन लगवाना बहुत जल्दी है?
ज़्यादातर बच्चों के लिए हाँ, और जो ट्यूटर इससे उलट कहे वह कुछ बेच रहा है। कक्षा 1 और 2 National Education Policy 2020 का Foundational Stage हैं, और छह साल का बच्चा अक्षरों की आवाज़ और गिनती खेल, दोहराव और ऐसे बड़े से सीखता है जिसे जल्दी न हो। इस उम्र में ट्यूशन तब काम आता है जब कोई एक साफ़ दिखती बात हो: बच्चा आवाज़ें जोड़कर शब्द नहीं बना पा रहा, स्कूल एक साल देर से शुरू हुआ है, या पढ़ाई उस माध्यम में है जो घर में बोली नहीं जाती। ऐसे में हफ़्ते में दो छोटी क्लास आम तौर पर काफ़ी होती हैं।
स्कूल ने सारी किताबें बदल दी हैं। अब कौन सी हैं?
NCERT ने प्राइमरी का पूरा सेट एक-एक कक्षा करके बदला है। कक्षा 1 और 2 में English के लिए Mridang, हिंदी के लिए सारंगी और गणित के लिए Joyful Mathematics है। कक्षा 3 से किताबें Santoor, वीणा, Maths Mela और Our Wondrous World हैं, जिनमें आख़िरी वह विषय पढ़ाती है जिसे पहले पर्यावरण अध्ययन कहते थे और अब The World Around Us कहा जाता है। कक्षा 3 का सेट पहले आया, कक्षा 4 और 5 बाद में, और सब पर 2026-27 का पुनर्मुद्रण लिखा है। ट्यूटर को उसी संस्करण से पढ़ाना चाहिए जो आपके स्कूल ने तय किया है, इसलिए फ़ॉर्म भरते समय किताबों की सूची की एक तस्वीर भेज देना काम आता है।
ट्यूशन की फ़ीस कितनी होगी, और किसे देनी होगी?
छोटे बच्चे की ट्यूशन की फ़ीस Edutara कक्षा, विषय और आपके शहर के हिसाब से तय करता है, और कुछ भी शुरू होने से पहले, दाख़िले के समय आप रकम जान लेते हैं। भुगतान आप Edutara को हर महीने एक बिल से करते हैं, ट्यूटर को भुगतान Edutara करता है, और ट्यूटर से किसी भी चरण पर कुछ नहीं लिया जाता। शुरू में हो या साल के बीच, बच्चा और ट्यूटर न जमें तो अगला ट्यूटर मुफ़्त है।
क्या बच्चे की अपनी क्लास टीचर घर आकर ट्यूशन पढ़ा सकती हैं?
नहीं, और यह रोक क़ानूनी है। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 किसी भी स्कूल में कार्यरत शिक्षक को निजी ट्यूशन या निजी शिक्षण कार्य से रोकती है। यह आपके बच्चे की अपनी शिक्षिका पर भी लागू है और किसी भी दूसरे कार्यरत स्कूल शिक्षक पर भी। इसीलिए Edutara स्कूल व्यवस्था के बाहर के लोगों में खोजता है: विषय में मज़बूत कॉलेज का विद्यार्थी, स्नातक या परास्नातक, सेवानिवृत्त प्राइमरी शिक्षक, या स्कूल से बाहर पढ़ाने वाला कोई व्यक्ति। इनमें से कोई भी साइट पर बिना किसी ख़र्च के आवेदन कर सकता है।
पूरी गाइड

प्राइमरी के सालों की एक गाइड

  1. प्राइमरी की कक्षा में असल में क्या बदला है

    पिछले कुछ सालों में प्राइमरी कक्षाओं पर तीन बदलाव एक के बाद एक आ गिरे हैं, और छोटे विद्यार्थी की मदद कर रहे ज़्यादातर बड़ों ने इन्हें अलग-अलग देखा है, यह बताए बिना कि तीनों आपस में जुड़े हैं।

    पहला ढाँचे का है। National Education Policy 2020 ने स्कूल को 5+3+3+4 के रूप में दोबारा बाँटा, जिसमें कक्षा 1 और 2 तीन साल की प्री-स्कूल पढ़ाई के साथ Foundational Stage में आती हैं, और कक्षा 3 से 5 मिलकर Preparatory Stage बनाती हैं, यानी 8 से 11 साल की उम्र। Preparatory Stage से उम्मीद है कि वह खेल और गतिविधि वाली पढ़ाई बनाए रखे और साथ में हल्की किताबें तथा कुछ हद तक औपचारिक कक्षा ले आए।

    दूसरा किताबों का है। NCERT ने प्राइमरी का सेट नए सिरे से लिखा है: पहली दो कक्षाओं के लिए Mridang, सारंगी और Joyful Mathematics, और कक्षा 3 से Santoor, वीणा, Maths Mela तथा Our Wondrous World। ये किताबें उन किताबों जैसी नहीं दिखतीं जो माता-पिता को याद हैं। पाठों के नाम Toy Joy, Fair Share और Grandmother's Quilt जैसे हैं, गणित कहानी के भीतर आता है, और सवाल बच्चे से समझाने को कहते हैं, ख़ाली जगह भरने को बहुत कम।

    तीसरा आकलन का है। कई स्कूलों में रिपोर्ट कार्ड अब Holistic Progress Card बन चुका है, और केंद्र सरकार के स्कूलों में कक्षा 5 के अंत की परीक्षा लौट आई है। यानी माता-पिता से कहा जा रहा है कि एक हाथ में विवरण वाला कार्ड पढ़ें और दूसरे हाथ से बच्चे को पर्चे के लिए तैयार करें।

  2. पढ़ने की दिक़्क़त असल में कैसे सुधरती है

    प्राइमरी में पढ़ने की परेशानी दो शक्लों में आती है, और कमरे के दूसरे कोने से दोनों एक जैसी दिखती हैं। पहली में बच्चा शब्दों को पन्ने से उठा ही नहीं पाता: आवाज़ें पक्की नहीं हैं, लंबे शब्द पहले अक्षर से अंदाज़े में पढ़े जाते हैं, और उँगली लाइन से हटती नहीं। दूसरी में शब्द पन्ने से बिल्कुल ठीक उठते हैं और पीछे कुछ नहीं बचता।

    दोनों का इलाज उल्टा है। पहली में आवाज़ें दोबारा बनानी पड़ती हैं, उन जोड़ों समेत जिनकी मिलकर एक आवाज़ बनती है, और इतना दोहराव चाहिए कि अक्षर जोड़ना पूरा ध्यान खाना बंद कर दे। दूसरी में पढ़ाई को धीमा और बीच-बीच में रोकना पड़ता है: दो पंक्तियों पर रुकिए, पूछिए अभी क्या हुआ, पूछिए आगे क्या होगा, फिर चलिए।

    घर पर एक जाँच डेढ़ मिनट में हो जाती है। ऐसा पन्ना खोलिए जो बच्चे ने कभी न देखा हो और जो एक कक्षा नीचे के स्तर का हो, और एक मिनट सुनिए। फिर किताब बंद करके उसी के बारे में तीन सवाल पूछिए। रफ़्तार अक्षर जोड़ने के बारे में बताती है, तीन जवाब समझ के बारे में, और बच्चा इनमें से किसी एक में अलग से भी कमज़ोर हो सकता है।

    काम के टिप्स

    1. महीने में एक बार एक मिनट का अनदेखा पाठ घड़ी लगाकर पढ़वाइए और संख्या कॉपी के पीछे लिख लीजिए।
    2. पन्ना पलटने से पहले पूछिए कि आगे क्या होगा, ताकि अंदाज़ा लगाना आदत बन जाए।
    3. बच्चे से छोटे भाई-बहन या दादी-नानी को पढ़कर सुनाने को कहिए; बिना जाँच वाला श्रोता घबराहट कम करता है।
    4. एक किताब हमेशा चलती रहे जिसका पाठ्यक्रम से कोई रिश्ता न हो, उसी भाषा में जो बच्चे को सबसे आसान लगे।
    5. पन्ना अधूरा रह जाए तब भी झुँझलाहट आने से पहले रात का पाठ बंद कर दीजिए।
  3. पहाड़े, स्थानीय मान और उधार वाला नियम

    कक्षा 3 से 5 में गणित जहाँ बिगड़ता है, वह जगह आम तौर पर दो में से एक होती है, और दोनों उस कक्षा से पहले की हैं जहाँ अंक कटते हैं।

    पहली स्थानीय मान है। अगर बच्चे ने कभी दस तीलियाँ बाँधकर एक दहाई नहीं बनाई और एक दहाई खोलकर दस तीलियाँ नहीं की, तो सैकड़ा, दहाई और इकाई सिर्फ़ ख़ानों की जगह हैं, और उधार लेना काटने-लिखने का नियम भर है। जिस नियम के पीछे अर्थ नहीं होता वह ऐसे नियम से बदल दिया जाता है जो हमेशा चल जाए, और इसी तरह बच्चा हर बार छोटे अंक को बड़े में से घटाने लगता है।

    दूसरी पहाड़े हैं। गीत की तरह याद किया पहाड़ा सिर्फ़ शुरू से मिलता है, जो भाग के सवाल के भीतर बहुत धीमा है और तब बेकार है जब पूछा जाए कि 42 में छह कितनी बार आता है। छलाँग गिनती, फिर बेतरतीब क्रम में सवाल, और उसी दिन भाग: यह पंद्रह दिन धीमा है और उसके बाद पक्का।

    आम ग़लतियाँ और उनका हल

    सिर्फ़ इसलिए अगले पाठ पर जाना कि स्कूल वहाँ पहुँच गया है
    नीचे की कमी पर पंद्रह दिन लगाइए। हिली हुई बुनियाद पर भिन्न पढ़ने वाला बच्चा तरीक़ा उतारना सीखता है और शब्द सवाल में उसे लगा नहीं पाता।
    सवाल ग़लत होते देखकर और मोटी अभ्यास पुस्तिका ख़रीद लेना
    तीन ग़लत उत्तर देखकर उनका पैटर्न ढूँढ़िए। उसी तरह के पचास और सवाल उसी ग़लत तरीक़े का पचास बार अभ्यास करा देंगे।
    पहाड़े हमेशा दो से शुरू करके क्रम में ही पूछना
    बिना भूमिका के नौ सत्ते पूछिए, फिर पूछिए कि 63 में सात कितनी बार आता है। दूसरा सवाल कठिन लगे तो पहाड़ा अभी गीत ही है।
    बच्चे के सो जाने के बाद कॉपी जाँचना
    बच्चे के साथ बैठकर एक सवाल बोलते हुए दोबारा करवाइए। जिस सुधार की वजह बच्चे ने सुनी ही नहीं, वह कॉपी में लगा एक निशान भर है।
  4. ट्यूटर, क्लास और ख़ुद पढ़ाने में से चुनना

    प्राइवेट ट्यूशनट्यूटर से तय
    पूरा घंटा आपके बच्चे की असली कमी पर जाता है
    लिखावट, पकड़ और ध्यान ट्यूटर को सामने दिखते हैं
    पढ़ाई आपके स्कूल की अपनी किताब और कॉपी से चलती है
    हफ़्ते दर हफ़्ते एक ही व्यक्ति के भरोसे पर टिकी होती है
    घर में एक शांत कोना और तय समय चाहिए
    कोचिंग सेंटरकेंद्र का तय किया हुआ
    बच्चे दूसरे बच्चों के साथ पढ़ते हैं, जो कुछ को अच्छा लगता है
    तय समय-सारणी, जो बाक़ी सब कुछ होते हुए भी चलती है
    एक शिक्षक, कई बच्चे, और रफ़्तार कमरे के बीच वालों से तय
    चुप रहने वाला बच्चा पूरा सत्र बिना नज़र में आए बिता सकता है
    केंद्र अपना पाठ्यक्रम चलाता है, जो आपके स्कूल की सत्र-योजना से अलग चलता है
    ऑनलाइन ट्यूशनट्यूटर से तय
    सही ट्यूटर किसी और शहर में भी हो सकता है
    स्कूल वाली शाम से आने-जाने का समय नहीं कटता
    घर बदलने पर भी पढ़ाई चलती रहती है
    कक्षा 3 से नीचे मुश्किल है, जहाँ बैठना ही आधी क्लास है
    लिखावट और पेंसिल की पकड़ स्क्रीन से सुधारना कठिन है

    प्राइमरी बच्चे के लिए काम का सवाल यह है कि इन तीनों में से कौन सा किसी बड़े को इतना पास बिठाता है कि वह पकड़ सके कि आपका बच्चा तरीक़ा उतार रहा है और समझ नहीं रहा।

शुरुआत कैसे करें

बताइए कि बच्चा कहाँ अटक रहा है

  • कक्षा 1 से 5
  • घर पर या ऑनलाइन
  • English, हिंदी या घर की भाषा
  • साल भर ट्यूटर बदलना मुफ़्त

कक्षा, बोर्ड, विषय, और वह बात जो आपने घर पर देखी है। Edutara ठीक वही पढ़ाने वाला ट्यूटर खोजता है, और तालमेल न बैठे तो दूसरा ट्यूटर कभी भी मुफ़्त है।

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पढ़ाई जमे, तो ही आगे जारी रखें। न जमे, तो दूसरा ट्यूटर मुफ़्त।

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