NEET ट्यूटर, एक समय में एक NEET-UG विद्यार्थी के साथ
NEET ट्यूटर के साथ, जिस पर हज़ारों अभ्यर्थी भरोसा करते हैं, Physics, Chemistry और Biology आपकी अपनी रफ़्तार से चलते हैं, आपके ही टेबल पर या स्क्रीन साझा करके। 180 सवाल के पेपर और उसकी मार्किंग पहली क्लास से ही सामने रहती है।
NEET-UG भारत में मेडिकल की अंडरग्रेजुएट पढ़ाई का इकलौता प्रवेश द्वार है। यह परीक्षा National Testing Agency लेती है, और MBBS, BDS तथा AYUSH की डिग्रियों (BAMS, BSMS, BUMS और BHMS) में दाख़िला इसी की All India Rank से होता है। NEET (UG) 2026 के पेपर में 180 अनिवार्य सवाल थे, जिनके लिए 180 मिनट मिले और कुल 720 अंक तय थे। सवाल कक्षा 11 और कक्षा 12 के Physics, Chemistry और Biology से आते हैं। विदेश के किसी मेडिकल संस्थान में पढ़ने की सोच रखने वाले भारतीय नागरिकों और Overseas Citizens of India को भी यही परीक्षा पास करनी होती है।
मुख्य बातें
Physics के 45 सवाल, Chemistry के 45 और Biology के 90: NEET (UG) 2026 का पेपर 180 सवाल और 720 अंक का था।
सही जवाब पर चार अंक और ग़लत जवाब पर एक अंक की कटौती, इसलिए अंदाज़े से भरा हुआ गोला रैंक पर भारी पड़ता है।
720 में से 360 अंक अकेले Biology के हैं, यानी आधा पेपर, और यहाँ फ़ायदा उसी को मिलता है जिसकी NCERT की पकड़ पक्की हो।
NTA के बुलेटिन के अनुसार क्वालिफ़ाई करने के लिए General और Gen-EWS को 50वाँ पर्सेंटाइल चाहिए और SC, ST, OBC-NCL को 40वाँ।
परीक्षा वर्ष की 31 दिसंबर तक 17 साल पूरे होने ज़रूरी हैं, और ऊपरी उम्र की कोई सीमा तय नहीं है।
पढ़ाई के तरीके
NEET-UG ट्यूटर के साथ पढ़ने के दो तरीक़े
सिलेबस दोनों में एक ही रहता है। फ़र्क़ इतना है कि ट्यूटर आपके पास बैठकर काग़ज़ पर पढ़ाए, या किसी दूसरे शहर से स्क्रीन साझा करके।
01
अवधि: आमतौर पर 90 मिनट से दो घंटे, ट्यूटर के साथ तय
घर पर NEET-UG ट्यूशन
ट्यूटर आपके घर आते हैं और आपके ही टेबल पर पढ़ाते हैं, आपका हल लिखते-लिखते जाँचते हुए। डेरिवेशन, लेबल वाले डायग्राम और लंबे न्यूमेरिकल का उलझा हुआ बीच का हिस्सा तभी ठीक होता है जब दो लोग एक ही पन्ने को देख रहे हों।
हल की हर लाइन साथ-साथ पढ़ी जाती है
असली शीट की तरह भरी जाने वाली आंसर शीट पर अभ्यास
स्कूल और कोचिंग के घंटों के हिसाब से समय
02
अवधि: आमतौर पर 60 से 90 मिनट, ट्यूटर के साथ तय
ऑनलाइन NEET-UG ट्यूशन
क्लास वीडियो पर साझा बोर्ड के साथ चलती है, जो उस विद्यार्थी के काम आती है जिसके क़स्बे में किसी एक विषय का जानकार मिलना मुश्किल है। सवालों के सेट, स्क्रीन पर खुले पुराने पेपर और ट्यूटर का लिखा बोर्ड, सब एक जगह बचा रहता है।
देश के किसी भी हिस्से से एक विषय का जानकार
स्क्रीन पर टाइमर के साथ सवालों का अभ्यास
कोचिंग या स्कूल के बाद आसानी से बैठ जाती है
इस विषय के स्तर
विद्यार्थी आमतौर पर कहाँ से शुरू करते हैं
ज़्यादातर विद्यार्थियों के लिए NEET-UG दो साल का सिलेबस है, और ट्यूटर हर विद्यार्थी के साथ अलग मोड़ पर जुड़ता है।
01
वह साल जो नींव तय करता है
कक्षा 11
मैकेनिक्स, थर्मोडायनामिक्स, केमिस्ट्री की बुनियादी अवधारणाएँ, कोशिका की बनावट और प्लांट फ़िज़ियोलॉजी यहीं बैठती हैं, और पेपर में हर बार लौटकर आती हैं। इस पड़ाव पर ट्यूटर का काम है NCERT को ठीक से पढ़वाना और हर सवाल का पूरा हल, क़दम दर क़दम, लिखवाना।
विषय:
PhysicsChemistryBiology
किन बातों पर ज़ोर:
NCERT पढ़ने की आदत
Physics के न्यूमेरिकल में तरीक़ा
Botany के डायग्राम याद से बनाना
02
बोर्ड परीक्षा और NEET एक ही महीनों में
कक्षा 12
ऑप्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कोऑर्डिनेशन कंपाउंड, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री, जेनेटिक्स और ह्यूमन फ़िज़ियोलॉजी उसी वक़्त आते हैं जब प्रैक्टिकल और प्री-बोर्ड चल रहे होते हैं। इन महीनों की असली चुनौती दोनों कैलेंडर साथ चलाना है, और कक्षा 11 का आधा सिलेबस चुप न पड़ जाए।
विषय:
PhysicsChemistryBiology
किन बातों पर ज़ोर:
हफ़्ते में एक स्लॉट कक्षा 11 के लिए
बोर्ड का जवाब और NEET का विकल्प साथ-साथ
घड़ी लगाकर पूरा पेपर
03
दूसरा प्रयास, ऊपरी उम्र की सीमा के बिना
दोबारा तैयारी का साल
दोबारा बैठने वाले विद्यार्थी के पास पूरा सिलेबस एक बार पढ़ा हुआ होता है और साथ में एक स्कोरकार्ड भी। ट्यूटर का पहला काम यह ढूँढना है कि अंक गए कहाँ: छूटे हुए सवालों में, निगेटिव मार्किंग में, या उस एक विषय में जो कभी बाक़ी दोनों के बराबर आया ही नहीं।
विषय:
PhysicsChemistryBiology
किन बातों पर ज़ोर:
पिछले स्कोरकार्ड को ईमानदारी से पढ़ना
कमज़ोर रहे विषय को दोबारा खड़ा करना
180 मिनट के लिए अटेम्प्ट की योजना
इस विषय का सिलेबस
NEET-UG ट्यूटर क्या-क्या पढ़ाता है
सिलेबस National Medical Commission तय करता है, और वही तय करता है कि क्लास के घंटे किस पर लगेंगे और किस पर नहीं।
यह NMC के Under Graduate Medical Education Board द्वारा 22 दिसंबर 2025 को जारी NEET (UG) 2026 के अपडेटेड सिलेबस पर आधारित है।
मॉड्यूल 01
Physics, बीस यूनिट
Physics की शुरुआत Physics and Measurement से होती है और अंत Electronic Devices पर, और आख़िर में Experimental Skills की यूनिट है, जिसे बहुत से विद्यार्थी सबसे बाद में खोलते हैं और आसान अंक गँवा देते हैं।
शामिल टॉपिक
किनेमैटिक्स, गति के नियम, कार्य और ऊर्जा
घूर्णन गति और गुरुत्वाकर्षण
थर्मोडायनामिक्स और गैसों का काइनेटिक सिद्धांत
स्थिरवैद्युतिकी और विद्युत धारा
ऑप्टिक्स, द्रव्य की द्वैत प्रकृति, परमाणु और नाभिक
प्रयोगात्मक कौशल
यह किसके लिए है
NEET-UG ट्यूटर के पास कौन आता है
यही सिलेबस स्कूल के विद्यार्थियों तक भी पहुँचता है, दोबारा तैयारी करने वालों तक भी, और उन तक भी जो बड़ी कोचिंग में बैठकर सवाल पूछ नहीं पाते। सबकी ज़रूरत अलग होती है।
01
कक्षा 11 से शुरुआत करने वाला विद्यार्थी
दो साल काफ़ी होते हैं और जल्दी बीत भी जाते हैं। इस विद्यार्थी को कक्षा 11 की यूनिटें एक बार ठीक से पढ़नी हैं और पढ़ने की आदत शुरू में ही बनानी है, क्योंकि कक्षा 12 की सारी पढ़ाई इन्हीं के ऊपर रखी जाती है।
सुझाव:
पहली यूनिट से PhysicsNCERT Biology पढ़ने की योजना
02
बोर्ड परीक्षा साथ लेकर चलने वाला कक्षा 12 का विद्यार्थी
प्रैक्टिकल, प्री-बोर्ड और NEET का सिलेबस एक ही महीनों में आते हैं। यहाँ ट्यूटर का आधा काम पढ़ाना है और आधा समय बाँटना: कक्षा 11 को ज़िंदा रखना, नया अध्याय समझाना, और हफ़्ते में पूरा पेपर बैठाना।
सुझाव:
साथ में कक्षा 11 का रिवीज़नहफ़्ते में एक पूरा पेपर
03
दोबारा तैयारी करने वाला विद्यार्थी
इनके पास पढ़ा हुआ स्कोरकार्ड है और एक साल का अनुभव। इन्हें सबसे पहले सीधी जाँच चाहिए: किस विषय ने स्कोर रोका, कितने अंक ग़लत जवाबों में गए, और कितने सवाल तक हाथ पहुँचा ही नहीं।
सुझाव:
स्कोरकार्ड की समीक्षाएक विषय यूनिट दर यूनिट दोबारा
04
बड़ी कोचिंग बैच में बैठा विद्यार्थी
बैच अपनी रफ़्तार से चलता है और दो सौ लोगों के हॉल में उठा हुआ हाथ पूरा जवाब कम ही पाता है। यहाँ ट्यूटर बैच के पीछे-पीछे चलता है, बैकलॉग साफ़ करता है और जो तेज़ी में निकल गया उसे दोबारा खोलता है।
सुझाव:
बैच के बाद डाउट क्लासबैकलॉग यूनिट पूरी करना
रैंक से सीट तक
NEET-UG की रैंक कहाँ तक ले जाती है
एक ही पेपर कई काउंसलिंग रास्तों में जाता है, और रैंक किस सीट तक पहुँचेगी यह इस पर निर्भर है कि विद्यार्थी किसमें रजिस्टर करता है।
National Testing Agency All India Rank घोषित करती है और उसका काम वहीं पूरा हो जाता है। काउंसलिंग दूसरे निकाय कराते हैं: सीटों के एक हिस्से के लिए DGHS के अधीन Medical Counselling Committee, और बाक़ी के लिए हर राज्य अपनी व्यवस्था से।
ऑल इंडिया कोटा
हर राज्य के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज की सीटों का साझा पूल
यह रास्ता कैसे काम करता है
NTA के NEET (UG) 2026 बुलेटिन के अनुसार राज्य अपने सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की 15% सीटें एक राष्ट्रीय पूल में देते हैं, जिसे Medical Counselling Committee All India Rank पर आवंटित करती है। इसी बुलेटिन के अनुसार इस पूल में केंद्र का आरक्षण लागू होता है: SC 15%, ST 7.5%, OBC-NCL 27%, EWS 10%, और बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों के लिए 5% क्षैतिज।
किसके लिए उपयुक्त
वह विद्यार्थी जो किसी भी राज्य में पढ़ने को तैयार है
राज्य कोटा
सीटों का बड़ा हिस्सा, जिसे विद्यार्थी का अपना राज्य आवंटित करता है
यह रास्ता कैसे काम करता है
हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने सरकारी और निजी कॉलेजों की बची हुई सीटों के लिए ख़ुद काउंसलिंग कराता है, अपने डोमिसाइल नियमों और अपनी आरक्षण सूची के साथ। रजिस्ट्रेशन की खिड़की, दस्तावेज़ और तारीख़ें राज्य दर राज्य बदलती हैं और राज्य का प्राधिकरण ही जारी करता है, इसलिए नतीजे के बाद दो कैलेंडर साथ देखने पड़ते हैं।
किसके लिए उपयुक्त
जिनका किसी एक राज्य में डोमिसाइल दावा साफ़ है
केंद्रीय संस्थान और डीम्ड विश्वविद्यालय
AIIMS, JIPMER, BHU, AMU, ESIC, AFMC और डीम्ड विश्वविद्यालय
यह रास्ता कैसे काम करता है
Medical Counselling Committee AIIMS की सारी MBBS सीटों, JIPMER, BHU, AMU, Jamia Millia Islamia के Faculty of Dentistry, Employees' State Insurance Corporation के कॉलेजों और पूरी डीम्ड विश्वविद्यालय सूची की काउंसलिंग भी कराती है, जिसमें उनकी NRI सीटें भी शामिल हैं। AFMC पुणे का रजिस्ट्रेशन MCC से होता है और चयन वह ख़ुद करता है।
किसके लिए उपयुक्त
जिनके मन में कोई एक संस्थान तय है
AYUSH की डिग्रियाँ
BAMS, BSMS, BUMS और BHMS, दाख़िला इसी पेपर से
यह रास्ता कैसे काम करता है
आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी की हर अंडरग्रेजुएट सीट NEET-UG से ही भरी जाती है। इन पाठ्यक्रमों की ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग AYUSH Admissions Central Counselling Committee कराती है, और क्वालिफ़ाइंग पर्सेंटाइल वही रहता है जो MBBS पर लागू होता है।
किसके लिए उपयुक्त
जो AYUSH चिकित्सा पद्धतियों के लिए तैयार हैं
पेपर, विषय दर विषय
जैसा NTA के NEET (UG) 2026 बुलेटिन में दर्ज है।
Physics
45 सवाल, 180 अंक
सवाल में पूछी गई राशि पहचानना
सही संबंध जल्दी याद आना
आगे बढ़ने से पहले मात्रक और विमा जाँचना
तैयारी का टिप: हर अंक के बदले सबसे ज़्यादा मिनट Physics लेता है, इसलिए ज़्यादातर विद्यार्थी शुरू में ही इसका क्रम तय कर लेते हैं और लंबे न्यूमेरिकल आख़िर के लिए छोड़ते हैं।
Chemistry
45 सवाल, 180 अंक
इनऑर्गेनिक के अपवाद याद रहना
ऑर्गेनिक मैकेनिज़्म पर सोच पाना
फ़िज़िकल केमिस्ट्री का हिसाब
तैयारी का टिप: केमिस्ट्री के तीनों हिस्से घड़ी के सामने अलग बर्ताव करते हैं। इनऑर्गेनिक का सवाल सेकंडों में हल होता है या छूट जाता है, जबकि फ़िज़िकल का एक सवाल तरीक़ा कच्चा हो तो चार मिनट खा जाता है।
Biology (Botany और Zoology)
90 सवाल, 360 अंक
NCERT की पंक्तियों की बारीक़ पढ़ाई
लेबल, अपवाद और बेमेल विकल्प
असर्शन और रीज़न वाले सवाल
तैयारी का टिप: आधा पेपर यहीं है। अच्छी पढ़ाई वाला विद्यार्थी इसी हिस्से में शुरू में अंक जोड़ लेता है और उन दो विषयों के लिए मिनट बचा लेता है जिनमें हल निकालना पड़ता है।
2027 को लेकर क्या तय है और क्या नहीं
NTA ने NEET (UG) 2027 का इन्फ़र्मेशन बुलेटिन अभी जारी नहीं किया है, इसलिए तारीख़, आवेदन की खिड़की और फ़ीस घोषित नहीं हैं। रिकॉर्ड पर इतना है: The Tribune ने 29 मई 2026 को NTA के उस हलफ़नामे की ख़बर दी जिसमें सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति ने NEET-UG को पेन और पेपर से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में ले जाने की सिफ़ारिश की है, मल्टी-सेशन और मल्टी-स्टेज टेस्टिंग के साथ, और यह बदलाव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से अगले परीक्षा चक्र से लागू किया जाएगा। परीक्षा का तरीक़ा तभी तय माना जाएगा जब NTA उसे अधिसूचित करे। जिस पर आज काम हो सकता है वह सिलेबस है।
पढ़ाई की सामग्री की एक झलक
NEET-UG की एक क्लास का आधा पन्ना
यह इसी पेज के लिए लिखा गया है, उसी तरह जैसे ट्यूटर ह्यूमन फ़िज़ियोलॉजी और उसके साथ बैठने वाले Physics के विचार समझाते हुए पन्ना भरता है।
मानव कार्यिकी और विद्युत धारा, एक ही बैठक
वे शब्द जिन्हें विद्यार्थी एक पंक्ति में रख सके
SA नोडAV नोडबंडल ऑफ़ हिज़पर्किंजे रेशे
नेफ़्रॉनबोमैन कैप्सूलहेनले का लूपसंग्रह नलिका
ओम का नियमकिरचॉफ़ के नियमव्हीटस्टोन ब्रिजपोटेंशियोमीटर
वे टुकड़े जिनसे एक जवाब बनता है
1स्ट्रोक वॉल्यूम+× हृदय दरकार्डियक आउटपुट, विश्राम में लगभग 5 लीटर प्रति मिनट
2ग्लोमेरुलर निस्यंद+घटाइए पुनरवशोषण+जोड़िए स्रवणसंग्रह नलिका से निकलने वाला मूत्र
3V = IR+श्रेणी में जुड़ता है+समांतर में व्युत्क्रम जुड़ते हैंपरिपथ का तुल्य प्रतिरोध
एक जाँच सवाल, असर्शन और रीज़न वाली शैली में
पर्किंजे रेशे आवेग को निलय की पेशी तक AV नोड के मुक़ाबले तेज़ी से पहुँचाते हैं।
सवाल: तो क्या AV नोड की सुस्ती को संचालन तंत्र की ख़ामी मानना चाहिए?
जवाब: यह सोची-समझी देरी है। AV नोड पर मिला ठहराव अलिंदों को निलयों में ख़ाली होने का समय देता है, उसके बाद ही निलय सिकुड़ते हैं। यही वजह है कि ECG में P तरंग और QRS के बीच एक अंतराल दिखता है।
इसमें कुछ भी किसी पुराने पेपर से नहीं उठाया गया है। यह वही काम है जो ट्यूटर और विद्यार्थी एक क्लास में मिलकर खड़ा करते हैं।
NEET में अंक कहाँ कटते हैं
चार जगहें जहाँ पेपर अंक वापस ले लेता है
ये चारों NEET-UG की अपनी बनावट से निकलती हैं: निगेटिव मार्किंग, Biology से भरा पेपर, और वह सिलेबस जो परीक्षा वाले साल से पूरा एक साल पहले शुरू होता है।
01
चुनौती
हर सवाल भर देना, क्योंकि छोड़ना हार मानने जैसा लगता है
एक आम अड़चन
असली वजह
ग़लत जवाब एक अंक ले जाता है और सही जवाब चार देता है, इसलिए कम भरोसे वाले अटेम्प्ट की लड़ी चुपचाप एक पूरे अध्याय की मेहनत बराबर कर देती है। विद्यार्थी को यह दिखता नहीं, क्योंकि मॉक का स्कोर एक अकेली संख्या है जिसके भीतर यह नुक़सान दब जाता है।
क्या मदद करता है
अभ्यास के पेपर में विद्यार्थी हर अटेम्प्ट पर निशान लगाता है: पक्का, आधा पक्का, या अंदाज़ा। फिर तीनों समूह अलग-अलग गिने जाते हैं। जिस दिन विद्यार्थी देख लेता है कि अंदाज़े वाला समूह कुल मिलाकर ऋणात्मक लौटा है, सवाल छोड़ना हार लगना बंद हो जाता है।
02
चुनौती
Biology को याद करने का विषय मान लेना
एक आम अड़चन
असली वजह
720 में से 360 अंक Biology के हैं और इसका बड़ा हिस्सा सीधे NCERT से आता भी है, इसलिए रटना काफ़ी लगने लगता है। दिक़्क़त वहाँ शुरू होती है जहाँ सवाल नतीजा पूछता है: दोहरा परिसंचरण क्यों मायने रखता है, हेनले का छोटा लूप मूत्र पर क्या असर डालता है, कोई वंशागति पैटर्न अगली पीढ़ी में क्या दिखाएगा।
क्या मदद करता है
ट्यूटर NCERT की पंक्ति विद्यार्थी के साथ पढ़ता है और फिर उसी से वह सवाल बनाता है जो पेपर पूछ सकता है। एक ही वाक्य दो बार इस्तेमाल होता है, एक बार याद रखने के लिए और एक बार कारण की डोर पकड़ने के लिए, और कठिन सवाल दूसरी वाली पकड़ माँगते हैं।
03
चुनौती
कक्षा 12 में कक्षा 11 का चुप पड़ जाना
एक आम अड़चन
असली वजह
मैकेनिक्स, थर्मोडायनामिक्स, कोशिका विज्ञान और प्लांट फ़िज़ियोलॉजी पेपर में पूरे वज़न के साथ आते हैं, जबकि स्कूल, प्रैक्टिकल और प्री-बोर्ड कक्षा 12 का हर हफ़्ता भर देते हैं। कक्षा 11 वाला आधा हिस्सा समय-सारणी से ग़ायब होता है और साल के पहले पूरे पेपर में ढह जाता है।
क्या मदद करता है
कक्षा 12 के पूरे साल हफ़्ते में एक स्लॉट कक्षा 11 की किसी यूनिट के नाम रहता है, और उसकी जाँच नए अध्याय वाले उसी पेपर में होती है ताकि दोनों मिले रहें। रिवीज़न वही टिकता है जिसका स्लॉट समय-सारणी में पहले से तय हो।
04
चुनौती
ऑर्गेनिक केमिस्ट्री को अभिक्रियाओं की सूची की तरह पढ़ना
एक आम अड़चन
असली वजह
सूची तब तक चलती है जब तक पेपर रिंग पर एक समूह न बदल दे या यह न पूछ ले कि दो उत्पादों में कौन तेज़ी से बनेगा। तब विद्यार्थी के पास सोचने का कोई आधार नहीं बचता और वह सूची की सबसे मिलती-जुलती अभिक्रिया पर हाथ रख देता है, और आत्मविश्वास से भरा जवाब ऋण एक बन जाता है।
क्या मदद करता है
ट्यूटर उत्पाद से उल्टा चलता है: कौन सी जगह इलेक्ट्रॉन से भरी है, क्या छोड़कर जा रहा है, डायरेक्टिंग समूह रिंग के साथ क्या कर रहा है। जो विद्यार्थी मध्यवर्ती अवस्था काग़ज़ पर खींच लेता है, उसे सूची की ज़रूरत ही नहीं रह जाती।
स्कोरकार्ड पढ़ चुका ट्यूटर जानता है कि एक जैसी जानकारी रखने वाले दो विद्यार्थी तीस हज़ार रैंक की दूरी पर ख़त्म कर सकते हैं, और फ़र्क़ लगभग हमेशा इसी सूची में होता है।
हम सही ट्यूटर कैसे खोजते हैं
यहाँ NEET-UG का ट्यूशन कैसे तय होता है
Edutara एक विद्यार्थी के लिए एक ट्यूटर खोजता है, और शर्तें हर उम्मीदवार के लिए एक जैसी रहती हैं।
1
आप विषय और साल बताइए
बताइए कि Physics चाहिए, Chemistry या Biology, आप कक्षा 11 में हैं, कक्षा 12 में या दोबारा तैयारी कर रहे हैं, और क्लास घर पर हो या ऑनलाइन। ट्यूटर की खोज इसी ब्यौरे से शुरू होती है।
2
एक क्लास में दिख जाता है कि बात पहुँच रही है
आप एक क्लास बैठकर देखते हैं कि यह ट्यूटर कैसे समझाते हैं। NEET की तैयारी में फ़ालतू घंटे होते ही नहीं, और समझाना आप तक पहुँच रहा है या नहीं, यह आमतौर पर पहले घंटे में साफ़ हो जाता है। पहले हफ़्ते में हो या छठे महीने में, जब भी न पहुँचे, Edutara उसी विषय के लिए नया ट्यूटर मुफ़्त खोजता है।
3
ट्यूशन की फ़ीस Edutara तय करता है
क्लास के लिए आप जो देते हैं, वह Edutara तय करता है। यह कक्षा, विषय और शहर के हिसाब से बदलती है, भुगतान Edutara के एक ही बिल से होता है, और ट्यूटर को भुगतान Edutara करता है।
4
ट्यूटर से कोई पैसा नहीं लिया जाता
न जॉइनिंग फ़ीस, न किसी लीड का शुल्क, और पढ़ाई गई हर क्लास के पैसे Edutara देता है। यह नियम स्थायी है, इसलिए ट्यूटर का पूरा ध्यान क्लास पर रहता है।
NEET-UG ट्यूटर में क्या देखा जाता है
यहाँ मानक विषय ख़ुद तय करता है, क्योंकि NEET की क्लास को स्कूल की क्लास से तेज़ चलना पड़ता है और जारी सिलेबस के और पास रहना पड़ता है।
ट्यूटर में हम क्या देखते हैं
पढ़ाए जाने वाले विषय की डिग्री या उसकी चल रही पढ़ाई: फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी, ज़ूलॉजी, या मेडिकल कोर्स।
NMC के जारी NEET (UG) सिलेबस की यूनिट दर यूनिट जानकारी, और यह समझ कि वह बोर्ड के सिलेबस से कहाँ अलग हो जाता है।
पेपर के हिसाब-किताब पर पकड़: सही जवाब पर चार अंक, ग़लत पर एक की कटौती, और अटेम्प्ट की रणनीति पर इसका असर।
निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 सेवारत स्कूल शिक्षकों को निजी ट्यूशन से रोकती है, इसलिए क्लास कॉलेज के विद्यार्थियों, स्नातकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों के पास जाती है।
दोबारा तैयारी कर रहे विद्यार्थी के साथ धीरज, जिसमें अध्याय पढ़ाने जितना ही काम स्कोरकार्ड पढ़ने का होता है।
ट्यूटर आमतौर पर दो साल कैसे चलाता है
पहले सिलेबस, रफ़्तार उसके बाद
यूनिटें NMC की सूची के हिसाब से पूरी होती हैं, और घड़ी उसके बाद क्लास में आती है। आधे सिलेबस पर तेज़ विद्यार्थी का स्कोर उस विद्यार्थी से नीचे रहता है जो पूरे सिलेबस पर संभला हुआ है, और पेपर यह फ़र्क़ साफ़ दिखा देता है।
घड़ी लगाकर पूरा पेपर
तीन घंटे, 180 सवाल, एक ही बैठक, और वही समय जिस समय असली पेपर होता है। उसके बाद ट्यूटर के साथ पेपर उल्टा पढ़ा जाता है: क्या छोड़ा, क्या अंदाज़े से भरा, और कौन से मिनट ग़लत सवाल पर गए।
विद्यार्थी की अपनी ग़लती-पुस्तिका
हर ग़लत जवाब एक कॉपी में जाता है, और उसके साथ ग़लती का कारण भी, दोनों विद्यार्थी के अपने शब्दों में। अगले पेपर से पहले यही कॉपी रिवीज़न होती है, और साल बीतते-बीतते यह छोटी होती जाती है।
आपको क्या मिलता है
होम ट्यूशन, कोचिंग बैच और ख़ुद की पढ़ाई
ज़्यादातर NEET विद्यार्थी इनमें से एक से ज़्यादा साथ-साथ चलाते हैं। यह तालिका बताती है कि हर व्यवस्था अपनी बनावट से क्या दे सकती है।
ऑनलाइन क्लास उस विद्यार्थी के काम आती है जिसे किसी एक विषय का जानकार चाहिए और वह उसके शहर में नहीं है। ट्यूटर साझा बोर्ड पर लिखता है, विद्यार्थी काग़ज़ पर हल करता है, और दोनों एक ही सवाल पर टिके रहते हैं।
डेरिवेशन और डायग्राम के लिए साझा बोर्ड
स्क्रीन पर समय बाँधकर सवालों का अभ्यास
कोचिंग के घंटों के बाद भी क्लास मुमकिन
टाइम ज़ोन: IST (UTC+5:30)
होम ट्यूशन
विद्यार्थी के घर पर
होम ट्यूशन
विद्यार्थी के घर पर
ट्यूटर आप तक पहुँचता है और आपके अपने टेबल पर पढ़ाता है। अनुरोध में अपना इलाक़ा लिखिए, और खोज सबसे पहले उन ट्यूटरों तक जाती है जो NEET के विषय पढ़ाते हैं और आप तक पहुँच सकते हैं।
उपलब्ध शहर:
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
NEET-UG के उम्मीदवार शुरुआत से पहले क्या पूछते हैं
जवाब NTA के इन्फ़र्मेशन बुलेटिन और NMC के सिलेबस से लिए गए हैं, और जो हिस्सा अब तक घोषित नहीं हुआ उसे वैसे ही रखा गया है।
01
NEET-UG का पेपर कैसा होता है और अंक कैसे मिलते हैं?
NEET (UG) 2026 के पेपर में 180 अनिवार्य सवाल थे और 180 मिनट का समय: Physics के 45 सवाल 180 अंक के, Chemistry के 45 सवाल 180 अंक के, और Biology यानी Botany तथा Zoology मिलाकर 90 सवाल 360 अंक के। कुल 720 अंक। सही जवाब पर चार अंक मिलते हैं, ग़लत पर एक अंक कटता है, और छोड़े गए सवाल पर कुछ नहीं। 2026 का पेपर एक ही दिन, एक ही शिफ़्ट में दोपहर 2 से 5 बजे तक पेन और पेपर पर हुआ, 13 भाषाओं में, और लिखने में शारीरिक कठिनाई वाले उम्मीदवारों को एक घंटा अतिरिक्त मिलता है।
03
क्वालिफ़ाइंग स्कोर क्या होता है और पर्सेंटाइल कैसे निकलता है?
क्वालिफ़ाई करना पर्सेंटाइल में तय होता है, जो उस साल की All India common merit list के सर्वोच्च अंकों से निकाला जाता है। General और Gen-EWS को 50वाँ पर्सेंटाइल चाहिए, SC, ST और OBC-NCL को 40वाँ, और बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को 45वाँ यदि वे अनारक्षित या Gen-EWS हैं और 40वाँ यदि वे SC, ST या OBC-NCL हैं। हर साल यह गणना दोबारा होती है, इसलिए किसी पुराने साल का कट-ऑफ़ मोटा अंदाज़ा भर है। यदि किसी श्रेणी में पर्याप्त उम्मीदवार यह स्तर न छू पाएँ तो केंद्र सरकार उस वर्ष के लिए न्यूनतम अंक घटा सकती है।
05
NEET-UG 2026 के चक्र में क्या हुआ था, और क्या उससे आगे कुछ बदलता है?
NEET (UG) 2026 पहले 3 मई 2026 को हुआ था। NTA ने उस परीक्षा को रद्द किया और 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा कराई, और 3 मई वाली परीक्षा की फ़ीस लौटाने के लिए neet.nta.nic.in पर कई सार्वजनिक सूचनाएँ जारी हुईं। नतीजा 16 जुलाई 2026 को घोषित हुआ। NTA की उसी दिन की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार भारत के 551 शहरों के 5,440 केंद्रों और विदेश के 14 शहरों में लगभग 20 लाख उम्मीदवार बैठे और 11.21 लाख क्वालिफ़ाई हुए। अभी तैयारी कर रहे विद्यार्थी के लिए सिलेबस और क्वालिफ़ाइंग नियम ज्यों के त्यों रहे; परीक्षा के तरीक़े की समीक्षा इसी चक्र से निकली है।
07
NEET home tuition fees kitni hoti hai?
फ़ीस Edutara तय करता है, और यह कक्षा, विषय और आपके शहर के साथ बदलती है। दोबारा तैयारी कर रहे विद्यार्थी के लिए Physics का ट्यूटर और कक्षा 11 के विद्यार्थी के लिए Biology का ट्यूटर अलग माँग हैं, और Edutara दोनों की फ़ीस अलग बनाता है। पहली नियमित क्लास से पहले, दाख़िले के समय रकम आपके सामने होती है, भुगतान Edutara के एक ही बिल से होता है, और ट्यूटर को भुगतान Edutara करता है।
09
क्या दोबारा तैयारी करने वाला विद्यार्थी बीच सत्र में ट्यूशन शुरू कर सकता है?
हाँ, और बहुत से करते हैं, क्योंकि दोबारा बैठने का फ़ैसला अक्सर नतीजे के बाद ही होता है। बीच में जुड़ने वाला ट्यूटर पिछले स्कोरकार्ड से शुरू करता है: किस विषय ने कुल स्कोर रोका, कितने अंक ग़लत जवाबों से बाहर गए, कितने सवाल तक पहुँचा ही नहीं गया। यही पढ़ाई पहले महीने की दिशा तय करती है। देर से शुरू करना उस योजना पर चलने से कम महँगा पड़ता है जो किसी और के साल से उतारी गई हो।
02
NEET-UG में कौन बैठ सकता है?
परीक्षा वाले वर्ष की 31 दिसंबर तक 17 साल पूरे होने चाहिए, और National Medical Commission ने ऊपरी उम्र की कोई सीमा नहीं रखी है। अर्हक परीक्षा कक्षा 12 या उसके समकक्ष है, जिसमें Physics, Chemistry, Biology या Biotechnology प्रैक्टिकल सहित हों और English अनिवार्य विषय हो। जिनका कक्षा 12 का नतीजा अभी नहीं आया है वे अनंतिम रूप से बैठ सकते हैं। विदेश के मेडिकल संस्थान में पढ़ने की सोच रखने वाले भारतीय नागरिकों और Overseas Citizens of India को भी NEET-UG पास करना होता है।
04
क्या NEET-UG 2027 कंप्यूटर पर होगा?
यह तब तय होगा जब NTA NEET (UG) 2027 का इन्फ़र्मेशन बुलेटिन जारी करेगी, जो अब तक नहीं हुआ। रिकॉर्ड पर इतना है कि The Tribune ने 29 मई 2026 को NTA के हलफ़नामे की ख़बर दी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति ने NEET-UG को पेन और पेपर से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में ले जाने की सिफ़ारिश की है, मल्टी-सेशन और मल्टी-स्टेज टेस्टिंग के साथ, और यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से अगले परीक्षा चक्र से लागू होगा। सिलेबस पर तरीक़े के इस सवाल का असर नहीं पड़ता, इसलिए तैयारी उसी पर चलती रहती है।
06
क्या NEET का ट्यूटर कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में भी मदद करता है?
विषय-वस्तु काफ़ी हद तक एक ही है, क्योंकि NEET का सिलेबस कक्षा 11 और कक्षा 12 के विज्ञान पर ही खड़ा है। फ़र्क़ जवाब की शक्ल का है। बोर्ड का पेपर पूरा डेरिवेशन, लेबल वाला डायग्राम और तर्क से भरा अनुच्छेद माँगता है, जबकि NEET एक मिनट के भीतर एक विकल्प माँगता है। दोनों पढ़ाने वाला ट्यूटर यह भेद खुलकर रखता है और एक ही अध्याय से उसी हफ़्ते बोर्ड के लिए लिखित जवाब और NEET के लिए विकल्प छाँटने का अभ्यास कराता है।
08
NEET-UG की तैयारी में हफ़्ते में कितनी क्लास चाहिए?
इसका एक जवाब नहीं है, और जो एक जवाब दे रहा है उसने आपकी समय-सारणी देखी ही नहीं। कक्षा 11 से शुरू करने वाला विद्यार्थी अक्सर सबसे कच्चे लगने वाले विषय में हफ़्ते में दो क्लास लेता है और बाक़ी दो ख़ुद पढ़ता है। प्री-बोर्ड संभाल रहा कक्षा 12 का विद्यार्थी हफ़्ते में तीन छोटी क्लास चाहता है, ताकि स्कूल के टेस्ट के बीच भी लय बनी रहे। दोबारा तैयारी करने वाला अक्सर भारी शुरुआत करता है और बैकलॉग साफ़ होते-होते हल्का कर देता है। जो चीज़ शुरू में तय कर लेनी चाहिए वह क्लास के बीच की अपनी पढ़ाई है, क्योंकि NEET की क्लास पिछली क्लास के बाद हल किए गए सवालों पर ही आगे बढ़ती है।
पूरी गाइड
NEET-UG की विस्तार से समझ
01
पेपर, घड़ी और मार्किंग
तीन घंटे, 180 सवाल। हिसाब लगाएँ तो हर सवाल के लिए एक मिनट बैठता है और कुछ बचता नहीं, और यही वजह है कि NEET-UG जितना जानकारी की परीक्षा है उतना ही फ़ैसलों की। तीनों विषय बराबर समय नहीं लेते: अच्छी पढ़ाई वाला विद्यार्थी Biology के 90 सवाल अक्सर एक घंटे के भीतर निपटा लेता है, जबकि Physics अपने 45 सवालों में बचा हुआ सारा वक़्त खींच सकता है।
समय को रैंक में बदलने का काम मार्किंग करती है। सही जवाब चार अंक देता है और ग़लत एक ले जाता है, यानी सही और ग़लत के बीच पाँच अंक का फ़र्क़ है, और मेरिट सूची के भीड़ वाले हिस्से में चंद अंक हज़ारों विद्यार्थियों को अलग कर देते हैं। इसीलिए अटेम्प्ट की योजना परीक्षा से पहले लिखकर रखने लायक़ है और हर पूरे पेपर में उसी पर चलने लायक़।
एक तकनीकी बात और जान लेनी चाहिए। बुलेटिन कहता है कि यदि कोई सवाल बाद में ग़लत पाया जाए या हटा दिया जाए तो परीक्षा में बैठे सभी उम्मीदवारों को उसके चार अंक मिलते हैं, चाहे उन्होंने उसे भरा हो या नहीं। इसी कारण परीक्षा के बाद अनंतिम उत्तर कुंजी और चुनौती की खिड़की पर नज़र रखनी चाहिए।
काम के टिप्स
1अटेम्प्ट का क्रम लिखकर रखिए और हर अभ्यास पेपर में वही क्रम दोहराइए।
2मॉक में Biology का समय अलग नापिए; वहाँ बचे मिनट Physics को चाहिए होते हैं।
3हर पेपर के बाद सिर्फ़ स्कोर मत देखिए, ग़लत जवाबों की गिनती भी कीजिए।
4परीक्षा के बाद अनंतिम उत्तर कुंजी और चुनौती की खिड़की देखते रहिए।
02
पात्रता, क्वालिफ़ाइंग पर्सेंटाइल और टाई-ब्रेक
दो अलग चीज़ें अक्सर आपस में मिला दी जाती हैं: परीक्षा में बैठने की पात्रता, और नतीजे में क्वालिफ़ाई करना। बैठने के लिए उम्र और विषय चाहिए। परीक्षा वाले वर्ष की 31 दिसंबर तक 17 साल पूरे होने चाहिए, और National Medical Commission ने ऊपरी उम्र सीमा हटा दी है। अर्हक परीक्षा कक्षा 12 या उसके समकक्ष है, जिसमें Physics, Chemistry, Biology या Biotechnology प्रैक्टिकल सहित हों और English अनिवार्य विषय हो।
नतीजे में क्वालिफ़ाई करना पर्सेंटाइल का मामला है, जो All India common merit list के सर्वोच्च अंकों से निकलता है। General और Gen-EWS को 50वाँ पर्सेंटाइल चाहिए, SC, ST और OBC-NCL को 40वाँ, और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार 45वाँ या 40वाँ। चूँकि हर साल यह उस साल के सर्वोच्च स्कोर पर दोबारा निकाला जाता है, इसलिए वह जिस अंक पर आकर बैठता है वह हर साल खिसकता है।
जब दो उम्मीदवारों के अंक बराबर हो जाएँ तो बुलेटिन टाई तोड़ने का क्रम तय करता है: पहले Biology के ज़्यादा अंक, फिर Chemistry, फिर Physics, फिर वह उम्मीदवार जिसके ग़लत और सही जवाबों का अनुपात कम है, फिर वही अनुपात Biology के भीतर, फिर Chemistry में, फिर Physics में। जो विद्यार्थी इस सूची को ध्यान से पढ़ता है उसे पेपर की अपनी प्राथमिकताएँ उसी में लिखी मिल जाती हैं।
आम ग़लतियाँ और उनका हल
किसी पुराने चक्र के क्वालिफ़ाइंग अंक को अपनी परीक्षा का लक्ष्य मान लेना।
जिस रैंक तक पहुँचना है उसे नाम देकर तय कीजिए, पिछले कुछ वर्षों में उस बैंड के लिए ज़रूरी रहे अंक देखिए, और पर्सेंटाइल को सिर्फ़ सूची में आने की न्यूनतम सीढ़ी मानिए।
यह मान लेना कि समकक्ष योग्यता अपने आप स्वीकार हो जाएगी।
आवेदन की खिड़की खुलने से पहले NTA बुलेटिन में दिए अर्हक परीक्षा कोड अपने प्रमाणपत्र से मिलाइए, और जहाँ समकक्षता प्रमाणपत्र चाहिए उसे पहले ही बनवा लीजिए।
यह सोचकर अंदाज़े से भरना कि टाई कुल अटेम्प्ट से टूटेगी।
टाई-ब्रेक ग़लत जवाबों को सही जवाबों के सामने रखकर, विषय दर विषय तय होता है। साफ़ पेपर टाई जीतता है, इसलिए संदेह वाले हर अटेम्प्ट को एक लागत मानिए और उसे तभी भरिए जब विकल्प सचमुच छँट चुके हों।
03
नतीजे के बाद: काउंसलिंग, कोटा और सीटें
NTA जो रैंक घोषित करती है वह एक दूसरी प्रक्रिया की शुरुआत है, जिसे NTA नहीं चलाती। राज्यों के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की पंद्रह प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा में जाती हैं, जिसे Medical Counselling Committee आवंटित करती है, और उसी के साथ पूरा AIIMS, JIPMER, BHU, AMU, Jamia Millia Islamia की डेंटल सीटें, ESIC के कॉलेज और डीम्ड विश्वविद्यालय भी। AFMC पुणे का रजिस्ट्रेशन MCC से होता है और चयन वह अपने स्तर पर करता है।
बाक़ी पचासी प्रतिशत राज्यों के पास रहता है। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने सरकारी और निजी कॉलेजों के लिए अपनी काउंसलिंग कराता है, अपने डोमिसाइल नियमों और अपनी आरक्षण सूची के साथ, और अपनी तारीख़ें जारी करता है। जिस विद्यार्थी का किसी एक राज्य में डोमिसाइल दावा है उसे नतीजे के बाद दो कैलेंडर साथ देखने पड़ते हैं, क्योंकि राष्ट्रीय और राज्य के राउंड एक-दूसरे का इंतज़ार नहीं करते।
इन सबके पीछे सीटों की संख्या हिलती रही है। NMC की जानकारी के आधार पर Press Information Bureau ने 13 फ़रवरी 2026 को बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच देश में MBBS की 48,563 सीटें बढ़ीं, और सरकार ने 2025-26 से 2028-29 तक केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत 10,023 और मेडिकल सीटें मंज़ूर की हैं। सीटें बढ़ने से पेपर आसान नहीं होता; इससे यह बदलता है कि कौन सी रैंक किस कॉलेज तक पहुँचती है, और इसीलिए पुराने राउंड के क्लोज़िंग रैंक सावधानी से पढ़े जाते हैं।
काम के टिप्स
1डोमिसाइल, श्रेणी और दिव्यांगता के प्रमाणपत्र नतीजे से पहले तैयार रखिए।
2राष्ट्रीय और राज्य की काउंसलिंग में अलग-अलग रजिस्टर कीजिए; एक से दूसरे में प्रवेश अपने आप नहीं होता।
3क्लोज़िंग रैंक को कई वर्षों की सीमा के रूप में पढ़िए, क्योंकि सीटों की संख्या बदलती रहती है।
4AYUSH की सीट आपको स्वीकार है या नहीं, यह पहले तय कर लीजिए, क्योंकि उसके राउंड अपनी अलग समय-सारणी पर चलते हैं।
04
दो साल की योजना, बिना थककर चूर हुए
जो विद्यार्थी इसमें से अच्छे से निकलते हैं वे अक्सर सबसे ज़्यादा घंटे पढ़ने वाले नहीं होते। वे वे होते हैं जिनके हफ़्ते की एक शक्ल होती है। कक्षा 11 का चलने लायक़ हफ़्ता तीन चीज़ें संभालता है: स्कूल के नए अध्याय, ट्यूटर से ठीक से पढ़ी गई एक यूनिट, और पंद्रह दिन पहले पढ़े हुए पर सवाल हल करने का तय स्लॉट। कक्षा 12 का हफ़्ता इसमें एक पूरा पेपर जोड़ता है और भीतर कक्षा 11 की एक यूनिट ज़िंदा रखता है।
सबसे तीखा ख़तरा वही है जो शोर नहीं करता। कक्षा 11 की यूनिटें पेपर में कक्षा 12 जितना ही वज़न रखती हैं, और उन्हीं पर कोई निगरानी नहीं होती। स्कूल के टेस्ट, प्रैक्टिकल और प्री-बोर्ड सब कक्षा 12 की ओर इशारा करते हैं, इसलिए विद्यार्थी पूरा साल उस मेहनत पर शाबाशी पाता रह सकता है जो आधे सिलेबस को छूती है।
नींद और दिन का बाक़ी हिस्सा यहाँ बहुत व्यावहारिक ढंग से मायने रखता है। दोपहर में तीन घंटे चलने वाला पेपर वह विद्यार्थी अच्छा नहीं लिखता जो सुबह चार बजे से जागा हुआ है। जिस समय परीक्षा होती है उसी समय अभ्यास करना, उससे पहले खाना, और दिन ठीक समय पर ख़त्म करना, ये सब तैयारी का हिस्सा हैं, और जो ट्यूटर इन्हें अनदेखा करता है वह आधा विषय ही पढ़ा रहा है।
आम ग़लतियाँ और उनका हल
NCERT Biology पूरी किए बिना संदर्भ पुस्तकों की पूरी अलमारी ख़रीद लेना।
पहले NCERT पूरी कीजिए और पढ़ते-पढ़ते उस पर निशान लगाइए। अतिरिक्त किताबें Physics और फ़िज़िकल केमिस्ट्री में काम आती हैं; Biology में वे ज़्यादातर उसी चीज़ का ढेर बढ़ाती हैं जो परीक्षा का स्रोत पहले से है।
पूरे पेपर आख़िरी तीन महीनों के लिए बचा रखना।
कक्षा 11 का सिलेबस पूरा होते ही शुरू कर दीजिए, भले स्कोर कम आए। यहाँ जो कौशल बन रहा है वह तीन घंटे में फ़ैसले लेने का है, और वह कई प्रयासों के बाद ही बैठता है।
दिन को मेज़ पर बैठे घंटों से नापना।
दिन को हल किए गए सवालों और समझी गई ग़लतियों से नापिए। दो घंटे की वह बैठक जिसके अंत में पाँच ग़लतियाँ सुधरी हों, उन छह घंटों से भारी है जिनके अंत में एक भी नहीं।
Edutara को बताइए कि विषय कौन सा है, आप किस साल में हैं, और क्लास घर पर चाहिए या ऑनलाइन। ट्यूटर किसी भी महीने आपके काम का न रहे, तो नया ट्यूटर मुफ़्त है।