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CBSE, ISC और राज्य बोर्ड

कक्षा 12 फ़िज़िक्स ट्यूशन, एक-एक चैप्टर करके

कक्षा 12 फ़िज़िक्स ट्यूशन में 70 अंक का थ्योरी पेपर चौदह चैप्टर में फैला है, प्रैक्टिकल के 30 अंक अलग जुड़ते हैं, और Edutara के ट्यूटर देश के हर बड़े शहर में हैं। ट्यूटर एक विद्यार्थी के साथ बैठकर दोनों तैयार कराते हैं, घर पर या स्क्रीन पर।

कक्षा की डेस्क पर सवाल का हल लिखती किशोर विद्यार्थी

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पूरी गाइड

क्या है

कक्षा 12 फ़िज़िक्स ट्यूशन

कक्षा 12 फ़िज़िक्स स्कूल में इस विषय का आख़िरी साल है, और इसका बड़ा हिस्सा बिजली, चुंबकत्व, प्रकाश और बीसवीं सदी की शुरुआत की फ़िज़िक्स है। CBSE इसे Physics (042) के नाम से चलाता है: नौ यूनिट, चौदह चैप्टर, तीन घंटे का 70 अंक का थ्योरी पेपर और 30 अंक का प्रैक्टिकल। CISCE इसी ज़मीन को Physics (861) कहता है, जिसमें 70 अंक का थ्योरी पेपर, 15 अंक का प्रैक्टिकल, 10 अंक का प्रोजेक्ट और 5 अंक की प्रैक्टिकल फ़ाइल होती है। यहाँ ट्यूशन का मतलब है एक ट्यूटर और एक विद्यार्थी, जो मिलकर इन चैप्टरों पर, उनके डेरिवेशन पर, बोर्ड के न्यूमेरिकल पर और उस प्रैक्टिकल फ़ाइल पर काम करते हैं जो चुपचाप कुल अंकों का तीसरा हिस्सा उठाए रहती है।

मुख्य बातें

  1. नौ यूनिट और चौदह चैप्टर, इलेक्ट्रिक चार्ज से लेकर सेमीकंडक्टर डायोड तक।
  2. थ्योरी तीन घंटे में 70 अंक की, और प्रैक्टिकल परीक्षा बाक़ी 30 अंक की।
  3. CBSE के 2026-27 वाले पेपर में 33 प्रश्न हैं, सभी अनिवार्य, और छह में आंतरिक विकल्प मिलता है।
  4. कैलकुलेटर की अनुमति नहीं है, इसलिए आख़िरी दो लाइनों का गणित साफ़ रहना ज़रूरी है।
  5. ISC में Zener डायोड और सोलर सेल जैसे टॉपिक अब भी हैं, जिन्हें CBSE ने इस सत्र से हटा दिया है।
पढ़ाई के तरीके

फ़िज़िक्स की क्लास दो तरह से चल सकती है

कुछ विद्यार्थी चाहते हैं कि ट्यूटर पढ़ने की मेज़ पर कॉपी और स्केल लेकर बैठें। जिनकी शाम छोटी पड़ती है और कोचिंग देर तक चलती है, उनके लिए वही ट्यूटर स्क्रीन पर ज़्यादा काम आते हैं।

  1. अवधि: आम तौर पर 60 से 90 मिनट, ट्यूटर के साथ तय

    घर पर फ़िज़िक्स की क्लास

    ट्यूटर घर आते हैं और डेरिवेशन कागज़ पर बनता है, जहाँ विद्यार्थी हर लाइन बनते हुए देखता है। रे डायग्राम, सर्किट डायग्राम और फ़ेज़र की आकृतियाँ तब जल्दी सुधरती हैं जब दो लोग एक ही पन्ने पर झुके हों।

    • डेरिवेशन एक-एक लाइन करके लिखवाए जाते हैं
    • स्कूल की कॉपी और प्रैक्टिकल फ़ाइल साथ में देखी जाती है
    • पूरे 70 अंक के पेपर पर समय की प्रैक्टिस
    • दिन स्कूल और कोचिंग के समय के हिसाब से तय
  2. अवधि: आम तौर पर 45 से 90 मिनट, ट्यूटर के साथ तय

    ऑनलाइन फ़िज़िक्स ट्यूशन

    क्लास वीडियो कॉल पर साझा बोर्ड के साथ चलती है, जो डायग्राम और बीजगणित वाले इस विषय पर ठीक बैठता है। कॉपी में अटका कोई सवाल दो क्लास के बीच फ़ोटो करके भेजा जा सकता है और अगली क्लास उसी से शुरू होती है।

    • सर्किट और रे डायग्राम के लिए साझा बोर्ड
    • हर क्लास का काम तस्वीर बनाकर रखा जाता है
    • दूसरे शहर में रहने वाले ट्यूटर तक पहुँच
    • दोनों तरफ़ आने-जाने का समय बचता है
इस विषय के स्तर

कक्षा 12 फ़िज़िक्स तक विद्यार्थी तीन रास्तों से पहुँचते हैं

ट्यूटर वहीं से शुरू करते हैं जहाँ विद्यार्थी सचमुच खड़ा है, और इस विषय में वह जगह आम तौर पर इन तीन में से एक होती है।

कक्षा 11 की वे बातें जो कक्षा 12 चुपचाप मान लेती है

नींव दोबारा बनाना

प्रत्यावर्ती धारा सरल आवर्त गति पर टिकी है, तरंग प्रकाशिकी तरंग गति पर, और हर सर्किट का सवाल तेज़ बीजगणित पर। कक्षा 11 में ये कमज़ोर रह गए हों तो नए चैप्टर ऐसी वजहों से असंभव लगते हैं जिनका नए चैप्टर से कोई रिश्ता ही नहीं।

विषय:

सरल आवर्त गतितरंग गतिसदिशमात्रक, त्रुटि और सार्थक अंक

किन बातों पर ज़ोर:

  • कक्षा 11 के वही टॉपिक दोबारा, जो सीधे कक्षा 12 में काम आते हैं
  • बीजगणित इतनी तेज़ कि तीन घंटे का पेपर निकल जाए
जुलाई से प्री-बोर्ड तक, चैप्टर दर चैप्टर

स्कूल के साथ चलना

ट्यूटर स्कूल के चैप्टर क्रम के पीछे-पीछे चलते हैं और उससे थोड़ा आगे रहते हैं, जिससे स्कूल की क्लास रिवीज़न बन जाती है। सवालों का सेट उसी चैप्टर का होता है जो स्कूल में उस हफ़्ते चल रहा है, और प्री-बोर्ड रिहर्सल की तरह आता है।

विषय:

CBSE की नौ यूनिटप्री-बोर्ड और बोर्ड के पेपर

किन बातों पर ज़ोर:

  • स्कूल से एक चैप्टर आगे रहना
  • चालू चैप्टर पर हर हफ़्ते न्यूमेरिकल
  • हर महीने एक पूरा पेपर घड़ी लगाकर
चैप्टर एक ही, सवाल पूछने का तरीक़ा अलग

बोर्ड और प्रवेश परीक्षा साथ-साथ

चैप्टरों की सूची लगभग पूरी तरह मिलती है, और सवालों का बर्ताव अलग होता है। बोर्ड का उत्तर कथन, डेरिवेशन और नामांकित चित्र माँगता है। JEE Main या NEET-UG का सवाल उसी फ़िज़िक्स को एक मिनट से कम में एक संख्या तक सिकोड़ देता है।

विषय:

स्थिर वैद्युतिकीविद्युत धाराप्रकाशिकीआधुनिक भौतिकी

किन बातों पर ज़ोर:

  • बोर्ड वाले डेरिवेशन पूरे लिखकर
  • वही नतीजा प्रवेश परीक्षा के लिए छोटे रास्ते से
  • वे टॉपिक जो प्रवेश परीक्षा ने रखे और CBSE ने हटाए
इस विषय का सिलेबस

ट्यूटर कक्षा 12 फ़िज़िक्स में क्या-क्या कराते हैं

सात हिस्से, जो मिलकर चौदह चैप्टर और बोर्ड की माँगी हुई प्रैक्टिकल फ़ाइल दोनों संभाल लेते हैं।

यह सत्र 2026-27 के CBSE Physics (042) पाठ्यक्रम के अनुसार है। ISC और राज्य बोर्ड के विद्यार्थियों को वही चैप्टर अपने बोर्ड के क्रम में मिलते हैं।

मॉड्यूल 01

स्थिर वैद्युतिकी

कूलॉम का नियम और अध्यारोपण, बिंदु आवेश तथा द्विध्रुव का क्षेत्र और विभव, गॉस का प्रमेय और पाठ्यक्रम की तीनों मानक सतहें, फिर श्रेणी और समांतर में संधारित्र तथा उनमें संचित ऊर्जा।

शामिल टॉपिक

  • कूलॉम का नियम और सतत आवेश वितरण
  • विद्युत बल रेखाएँ और एकसमान क्षेत्र में द्विध्रुव
  • गॉस का प्रमेय: लंबा तार, अनंत चादर, गोलीय कोश
  • विभव, समविभव पृष्ठ और स्थितिज ऊर्जा
  • परावैद्युत के साथ और बिना धारिता
  • संधारित्र में संचित ऊर्जा
यह किसके लिए है

कक्षा 12 फ़िज़िक्स ट्यूशन कौन लेता है

इस विषय में कमरा मिला-जुला होता है: तीन अलग बोर्ड के स्कूली विद्यार्थी, प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले, और दूसरी बार बैठने वाले।

बोर्ड के पाठ्यक्रम पर चल रहा विद्यार्थी

स्कूल में CBSE, ISC या किसी राज्य बोर्ड से फ़िज़िक्स पढ़ रहा विद्यार्थी, जिसे 70 अंक का साफ़ पेपर चाहिए और एक प्रैक्टिकल फ़ाइल जो सचमुच पूरी हो। ट्यूटर स्कूल के चैप्टर क्रम पर चलते हैं और उसी बोर्ड की मार्किंग स्कीम के हिसाब से लिखवाते हैं।

सुझाव:

वहीं से शुरू जहाँ स्कूल हैदिसंबर से महीने में दो पूरे पेपरप्रैक्टिकल फ़ाइल हर हफ़्ते अपडेट

बोर्ड के साथ JEE Main या NEET-UG

कक्षा 12 फ़िज़िक्स और प्रवेश परीक्षा की फ़िज़िक्स के चैप्टर साझा हैं, और एक ही शाम को दोनों संभालने हैं। ट्यूटर बोर्ड वाले डेरिवेशन बचाए रखते हैं और उन्हीं विचारों को प्रवेश परीक्षा वाले रूप में दोहराते हैं।

सुझाव:

एक चैप्टर, दोनों तरह के सवालवे टॉपिक जो प्रवेश परीक्षा में बचे हैंभारी यूनिट पर समयबद्ध सेट

साल दोहरा रहे या अंक सुधार रहे विद्यार्थी

ड्रॉपर, कंपार्टमेंट वाले, या सुधार परीक्षा में बैठने वाले। चैप्टर जाने-पहचाने हैं और कमियाँ बहुत ख़ास हैं, इसलिए पहला काम यह पता करना है कि नौ में से कौन सी यूनिट अंक खा रही है।

सुझाव:

सबसे पहले एक जाँच पेपरयूनिट दर यूनिट मरम्मतप्रैक्टिकल रिकॉर्ड दोबारा खड़ा करना

प्री-बोर्ड से पहले फिसलते अंक

फ़िज़िक्स के अंक अक्सर छमाही और प्री-बोर्ड के बीच फिसलते हैं, और स्कूल का रिपोर्ट कार्ड वजह नहीं बताता। पहली क्लास में एक डेरिवेशन ज़ोर से हल करते हुए विद्यार्थी ख़ुद देख लेता है कि कौन सा क़दम डगमगाता है, और यह बात मार्कशीट कभी नहीं दिखाती।

सुझाव:

पहली क्लास में एक डेरिवेशन लाइएपूछिए कि कौन सी यूनिट सबसे कमज़ोर है
अंकों का नक़्शा

70 अंक असल में कहाँ बैठे हैं

CBSE पाठ्यक्रम के साथ ही बता देता है कि यूनिट के हर हिस्से का वज़न कितना है, और इसे अनदेखा करने वाली रिवीज़न योजना सबसे अच्छे हफ़्ते ग़लत चैप्टरों में ख़र्च कर देती है।

70 अंक, 3 घंटे

थ्योरी पेपर

30 अंक, 3 घंटे

प्रैक्टिकल

33, सभी अनिवार्य

प्रश्न

अनुमति नहीं

कैलकुलेटर

स्थिर वैद्युतिकी और विद्युत धारा

ELEC

यूनिट I और II साथ में। आवेश, क्षेत्र, विभव और संधारित्र, और फिर वह सब जो आवेश के चलने पर शुरू होता है: प्रतिरोध, सेल, किरचॉफ़ के नियम और उन पर बने सेतु परिपथ।

मुख्य टॉपिक

  • •गॉस का प्रमेय
  • •श्रेणी और समांतर में संधारित्र
  • •अपवाह वेग और ओम का नियम
  • •विद्युत वाहक बल और टर्मिनल विभवांतर
  • •व्हीटस्टोन सेतु

जहाँ अक्सर अटकते हैं

गॉस का प्रमेय दिखता एक सूत्र जैसा है और बर्ताव तीन जैसा करता है, क्योंकि चुनी हुई सतह पूरी गणना बदल देती है। इसके बाद सर्किट के सवाल उन चिह्न की ग़लतियों की सज़ा देते हैं जो पन्ने पर दिखती ही नहीं।

CBSE पेपर में अंक

16 अंक

ये वज़न CBSE Physics (042) के 2026-27 पाठ्यक्रम से हैं। CISCE ने ISC परीक्षा 2027 के लिए वही यूनिट थोड़ा अलग बाँटी हैं: स्थिर वैद्युतिकी और विद्युत धारा 14 अंक, चुंबकत्व के साथ प्रेरण और प्रत्यावर्ती धारा 16, विद्युतचुंबकीय तरंगें 2, प्रकाशिकी 18, द्वैत प्रकृति 7, परमाणु और नाभिक 6, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 7।

पढ़ाई की सामग्री की एक झलक

किरण प्रकाशिकी की क्लास का एक मिनट

यह उस तरह का छोटा अभ्यास है जो ट्यूटर पूरे न्यूमेरिकल के पास जाने से पहले कराते हैं।

किरण प्रकाशिकी: गणित से पहले चिह्न

पहले ये चार तय कीजिए

uvfRm
मूल बिंदु ध्रुव परमूल बिंदु प्रकाशिक केंद्र पर
प्रकाश की दिशा में: धनात्मकउल्टी दिशा में: ऋणात्मक

हिस्सों को जोड़िए

  1. 1/v1/uपतले लेंस के लिए 1/v - 1/u = 1/f
  2. vum = v/u, और चिह्न बताता है सीधा या उल्टा
  3. 1/f11/f2सटे हुए दो पतले लेंसों के लिए 1/F

अब इसे लगाइए

20 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस के सामने 30 cm पर एक वस्तु रखी है।

सवाल: प्रतिबिंब कहाँ बनेगा, और आवर्धन आपको क्या बताता है?

जवाब: u = -30 cm और f = +20 cm रखने पर लेंस सूत्र से v = +60 cm आता है, यानी प्रतिबिंब लेंस से 60 cm आगे बनता है और वास्तविक है। आवर्धन v/u = -2 है, इसलिए प्रतिबिंब उल्टा और वस्तु से दोगुना है।

यह नमूना इसी पन्ने के लिए लिखा गया है। इसमें कुछ भी किसी किताब या पुराने प्रश्नपत्र से नहीं लिया गया।

अंक यहाँ रिसते हैं

कक्षा 12 फ़िज़िक्स पाँच जगह बिगड़ती है

इस विषय में ये चूकें बार-बार दिखती हैं, और इनमें से कोई भी इस बात से नहीं जुड़ी कि विद्यार्थी कितना होशियार है।

चुनौती

गॉस का प्रमेय सूत्र की तरह रटकर ग़लत सतह पर लगा दिया जाता है

एक आम अड़चन

असली वजह

कथन छोटा है, और पाठ्यक्रम में दिए तीनों उपयोग, लंबा सीधा तार, अनंत चादर और पतला गोलीय कोश, तीन अलग नतीजों जैसे लगते हैं जिन्हें याद कर लेना है। सवाल ज्यामिति थोड़ी बदल दे तो याददाश्त के पास कुछ बचता नहीं, क्योंकि सतह चुनना कभी सीखा ही नहीं गया था।

क्या मदद करता है

ट्यूटर पहले सतह बनवाते हैं और विद्यार्थी से बुलवाते हैं कि उस पर क्षेत्र एकसमान क्यों रहेगा। बेलन और पिलबॉक्स की वजह साफ़ हो जाए तो बीजगणित एक लाइन का रह जाता है, और अनजानी ज्यामिति डराना बंद कर देती है।

चुनौती

सर्किट का उत्तर ऋणात्मक आता है और विद्यार्थी उसे मिटा देता है

एक आम अड़चन

असली वजह

किरचॉफ़ के लूप नियम में समीकरण लिखने से पहले एक दिशा चुननी होती है, और जो चिह्न वापस आता है वह उसी चुनाव के बारे में जानकारी है। विद्यार्थी ऋणात्मक धारा को ग़लती मान लेता है, मिटाता है, और तब तक दिशाएँ बदलता रहता है जब तक संख्या सुंदर न दिखे।

क्या मदद करता है

ट्यूटर ज़ोर देते हैं कि कोई समीकरण लिखने से पहले लूप की दिशा चित्र पर लिख दी जाए, फिर ऋण चिह्न को एक वाक्य की तरह पढ़ते हैं कि धारा असल में किधर बह रही है। उसी बैठक में वि.वा.बल और टर्मिनल विभवांतर अलग कर दिए जाते हैं।

चुनौती

कार्तीय चिह्न परिपाटी गणित के बाद लगाई जाती है

एक आम अड़चन

असली वजह

किरण प्रकाशिकी ऐसे सूत्रों से पढ़ाई जाती है जो दर्पण और लेंस दोनों पर चलते हैं, इसलिए विद्यार्थी पहले सूत्र उठाता है और चिह्न की चिंता तब करता है जब उत्तर अजीब दिखे। तीन घंटे के पेपर में यह देखने का समय नहीं बचता कि फोकस दूरी ऋणात्मक होनी चाहिए थी।

क्या मदद करता है

किरण प्रकाशिकी का हर उत्तर चित्र से शुरू होता है, मूल बिंदु ध्रुव या प्रकाशिक केंद्र पर रखा जाता है, और सूत्र छूने से पहले u, v तथा f अपने चिह्न के साथ लिखे जाते हैं। सिर्फ़ चिह्न पर दस-दस सेकंड के अभ्यास का एक हफ़्ता यह नुक़सान लगभग ख़त्म कर देता है।

चुनौती

प्रत्यावर्ती धारा बिना दोलन की समझ के शुरू कर दी जाती है

एक आम अड़चन

असली वजह

फ़ेज़र, प्रतिघात और अनुनाद यह मानकर चलते हैं कि ज्या फलन, कलांतर और एक राशि के दूसरी से आगे चलने का विचार सहज है। यह सहजता कक्षा 11 में बनती है, और वहाँ कमज़ोर रह गया विद्यार्थी इसे ऐसे चैप्टर में दोबारा मिलता है जो नई शब्दावली भी साथ लाया है।

क्या मदद करता है

ट्यूटर पहले एक क्लास सरल आवर्त गति पर देते हैं और फ़ेज़र को घूमते तीर की तरह बनाते हैं, उसके बाद ही कोई LCR परिपथ पन्ने पर आता है। अनुनाद, शक्ति गुणांक और वाटहीन धारा फिर उसी एक तस्वीर से निकल आते हैं।

चुनौती

आधुनिक भौतिकी कहानी की तरह पढ़ी जाती है और ग्राफ़ से पूछी जाती है

एक आम अड़चन

असली वजह

प्रकाश विद्युत प्रभाव, बोर मॉडल और बंधन ऊर्जा कथा जैसे चैप्टर हैं, और इन्हें पढ़ लेना समझ लेने जैसा लगता है। बोर्ड आवृत्ति बनाम निरोधी विभव की रेखा, ऊर्जा स्तर आरेख और प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा का वक्र माँगता है, और ये तीनों पहले हाथ से बने होने चाहिए।

क्या मदद करता है

हर रिवीज़न बैठक की शुरुआत में विद्यार्थी ये मानक ग्राफ़ याद से बनाता है, दोनों अक्ष नाम देता है और बताता है कि ढाल तथा अंतःखंड का मतलब क्या है। इलेक्ट्रॉन वोल्ट वाले न्यूमेरिकल तब तक दोहराए जाते हैं जब तक मात्रक बदलना अटकाना बंद न कर दे।

इनमें से हर चूक बोर्ड के पेपर से पहले प्री-बोर्ड की कॉपी में दिख जाती है, इसीलिए प्री-बोर्ड की कॉपी को लाइन दर लाइन पढ़ना इस साल का सबसे काम का अभ्यास है।

हम सही ट्यूटर कैसे खोजते हैं

Edutara के साथ फ़िज़िक्स ट्यूशन कैसे चलता है

Edutara एक विद्यार्थी और एक ट्यूटर की जोड़ी बनाता है, और नीचे लिखी हर बात आज की स्थिति में सच है।

  1. आप बोर्ड और क्लास बताइए

    विद्यार्थी, या जो भी उसका नाम दर्ज करा रहा हो, बताता है कि कक्षा 12 फ़िज़िक्स चाहिए, बोर्ड का नाम बताता है, CBSE या ISC या कौन सा राज्य बोर्ड, और यह भी कि क्लास घर पर चाहिए या ऑनलाइन। Edutara फिर ठीक वही पढ़ाने वाले ट्यूटर खोजता है।

  2. क्या आप इस ट्यूटर का डेरिवेशन पकड़ पाते हैं?

    फ़िज़िक्स का ट्यूशन इस बात पर टिका है कि विद्यार्थी इसी व्यक्ति का समझाया डेरिवेशन पकड़ पाता है या नहीं। पहली क्लास में हो या महीनों बाद, विद्यार्थी जब भी पकड़ न पाए, Edutara बिना किसी ख़र्च के ट्यूटर बदल देता है।

  3. फ़ीस और बिल Edutara से

    कक्षा 12 फ़िज़िक्स की फ़ीस Edutara बोर्ड, शहर और घर या ऑनलाइन क्लास के हिसाब से तय करता है, दाख़िले के समय रकम बताता है, और हर क्लास का भुगतान ट्यूटर को करता है।

  4. ट्यूटर को कुछ भी नहीं देना पड़ता

    कोई जॉइनिंग फ़ीस नहीं, किसी विद्यार्थी का नंबर मिलने का शुल्क नहीं। फ़िज़िक्स पढ़ाने के इच्छुक ग्रेजुएट मुफ़्त आवेदन करें, और क्लास के प्रस्ताव में लिखी दर पर हर पढ़ाई गई क्लास का भुगतान Edutara करता है।

  5. पढ़ने की मेज़ पर या स्क्रीन पर

    वही ट्यूटर विद्यार्थी के पास बैठकर भी पढ़ा सकते हैं और साझा बोर्ड वाली वीडियो कॉल पर भी। इसलिए किसी भी क़स्बे का विद्यार्थी पूरे भारत के फ़िज़िक्स ट्यूटरों में से अपना ट्यूटर चुनता है।

कक्षा 12 फ़िज़िक्स के ट्यूटर में Edutara क्या देखता है

इस स्तर की फ़िज़िक्स ऐसे व्यक्ति माँगती है जो कागज़ पर नतीजा खड़ा कर सके और यह भी बता सके कि उसे खड़ा करने की मेहनत किसी ने क्यों की।

ट्यूटर में हम क्या देखते हैं
  • फ़िज़िक्स या इंजीनियरिंग की डिग्री, और कक्षा 12 के डेरिवेशन इतने ताज़ा कि किताब खोले बिना लिखे जा सकें
  • जिस बोर्ड की परीक्षा विद्यार्थी देगा उसकी समझ: CBSE, ISC या राज्य बोर्ड, हर एक की अपनी पेपर शैली है
  • प्रैक्टिकल पक्ष में सहजता: प्रयोग, गतिविधियाँ, अन्वेषणात्मक प्रोजेक्ट और उसके बाद की वाइवा
  • गणित के साथ धैर्य, क्योंकि बोर्ड कैलकुलेटर नहीं देता और अंक आख़िरी दो लाइनों में गिरते हैं
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 स्कूल में कार्यरत शिक्षकों को रोकती है, इसलिए ट्यूटर कॉलेज, कैंपस और सेवानिवृत्त शिक्षकों में से आते हैं

ट्यूटर यह विषय कैसे पढ़ाते हैं

एक बार निकालिए, फिर दो बार इस्तेमाल कीजिए

नतीजा विद्यार्थी से हर लाइन लिखवाकर बनाया जाता है, और फिर सीधे दो-तीन न्यूमेरिकल में लगाया जाता है। बोर्ड दोनों माँगता है, और इन्हें अलग रखने से विद्यार्थी डेरिवेशन सुना तो देता है, लगा नहीं पाता।

पुराने पेपर, साथ में खुली मार्किंग स्कीम

फ़िज़िक्स में अंक कथन, चित्र, सूत्र और मान रखने पर मिलते हैं, इसी क्रम में। हाल के बोर्ड पेपर मार्किंग स्कीम बगल में रखकर हल कराने से विद्यार्थी उन्हीं अंकों के लिए लिखना सीखता है जो सचमुच मौजूद हैं।

प्रैक्टिकल फ़ाइल पूरे साल ज़िंदा

प्रयोग उसी हफ़्ते दर्ज होते हैं जिसमें किए गए, ग्राफ़ ढंग से खींचे जाते हैं, और अन्वेषणात्मक प्रोजेक्ट जल्दी चुन लिया जाता है। वे 30 अंक इस विषय में सबसे आसानी से बचाए जा सकते हैं और जल्दबाज़ी में सबसे आसानी से गँवाए जाते हैं।

आपको क्या मिलता है

होम ट्यूशन, कोचिंग बैच या अपनी मेज़

कक्षा 12 के ज़्यादातर विद्यार्थी इनमें से दो एक साथ चलाते हैं, और साफ़ देख लेना ठीक रहता है कि हर रास्ता दे क्या सकता है।

Edutara
7 / 7 स्कोर
  • रफ़्तार इसी विद्यार्थी के कमज़ोर चैप्टर से तय होती है
  • शंका उसी मिनट हल होती है जिस मिनट उठती है
  • प्रैक्टिकल फ़ाइल और ग्राफ़ कोई जाँचता है
  • क्लास विद्यार्थी के अपने घर पर होती है
  • तालमेल गलत हो तो कभी भी बिना ख़र्च दूसरा ट्यूटर
  • बोर्ड की मार्किंग स्कीम किसी शिक्षक के साथ खुलती है
  • फ़ीस सीधे पढ़ाने वाले व्यक्ति से तय होती है
कोचिंग बैच2/7
  • रफ़्तार इसी विद्यार्थी के कमज़ोर चैप्टर से तय होती है
  • शंका उसी मिनट हल होती है जिस मिनट उठती है
  • प्रैक्टिकल फ़ाइल और ग्राफ़ कोई जाँचता है
  • क्लास विद्यार्थी के अपने घर पर होती है
  • तालमेल गलत हो तो कभी भी बिना ख़र्च दूसरा ट्यूटर
  • बोर्ड की मार्किंग स्कीम किसी शिक्षक के साथ खुलती है
  • फ़ीस सीधे पढ़ाने वाले व्यक्ति से तय होती है
अकेले पढ़ाई2/7
  • रफ़्तार इसी विद्यार्थी के कमज़ोर चैप्टर से तय होती है
  • शंका उसी मिनट हल होती है जिस मिनट उठती है
  • प्रैक्टिकल फ़ाइल और ग्राफ़ कोई जाँचता है
  • क्लास विद्यार्थी के अपने घर पर होती है
  • तालमेल गलत हो तो कभी भी बिना ख़र्च दूसरा ट्यूटर
  • बोर्ड की मार्किंग स्कीम किसी शिक्षक के साथ खुलती है
  • फ़ीस सीधे पढ़ाने वाले व्यक्ति से तय होती है
घर पर या ऑनलाइन

पढ़ने की मेज़ पर या स्क्रीन पर

  1. ऑनलाइन ट्यूशन

    पूरे भारत में, जहाँ कनेक्शन टिकाऊ हो

    ऑनलाइन क्लास कक्षा 12 फ़िज़िक्स पर ठीक बैठती है, क्योंकि यहाँ काम डायग्राम और बीजगणित का है जिसे दोनों साझा बोर्ड पर बनते देख सकते हैं। स्कूल और कोचिंग के बाद शाम का स्लॉट सबसे आम रहता है।

    सर्किट और रे डायग्राम के लिए साझा बोर्ड
    दो क्लास के बीच भेजी गई शंकाएँ
    जहाँ आसपास फ़िज़िक्स के ट्यूटर मुश्किल से मिलते हैं, वहाँ काम का

    टाइम ज़ोन: IST (UTC+5:30)

  2. होम ट्यूशन

    विद्यार्थी के अपने घर पर

    घर पर क्लास के लिए Edutara ऐसे ट्यूटर खोजता है जो विद्यार्थी के पते तक ऐसे समय पर पहुँच सकें जो स्कूल और कोचिंग के बीच बैठे। पूछते समय इलाक़े का नाम बता दीजिए, क्योंकि आने-जाने का समय ही तय करता है कि हफ़्ते के दिनों में क्या संभव है।

    उपलब्ध शहर:

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कक्षा 12 फ़िज़िक्स की ट्यूशन से पहले विद्यार्थियों के सवाल

वे सवाल जो क्लास शुरू करने की बात से पहले आते हैं।

कक्षा 12 फ़िज़िक्स में थ्योरी और प्रैक्टिकल के अंक कैसे बँटे हैं?
CBSE में Physics (042) का थ्योरी पेपर तीन घंटे का 70 अंक का और प्रैक्टिकल 30 अंक का होता है। प्रैक्टिकल के भीतर दो प्रयोग 7-7 अंक के, प्रैक्टिकल रिकॉर्ड 5 अंक का, एक गतिविधि 3 अंक की, अन्वेषणात्मक प्रोजेक्ट 3 अंक का और वाइवा 5 अंक की होती है। CISCE ने ISC परीक्षा 2027 के लिए 100 अंक अलग तरह बाँटे हैं: 70 अंक का थ्योरी पेपर, 15 अंक का प्रैक्टिकल, 10 अंक का प्रोजेक्ट वर्क और 5 अंक की प्रैक्टिकल फ़ाइल। राज्य बोर्ड अपना बँटवारा ख़ुद छापते हैं, इसलिए वह अपने बोर्ड के 2026-27 सत्र के पाठ्यक्रम से देख लीजिए।
क्या ISC का फ़िज़िक्स पाठ्यक्रम CBSE जैसा ही है?
चैप्टर की सूची क़रीब-क़रीब मिलती है, वज़न में फ़र्क़ है। ISC परीक्षा 2027 के लिए प्रकाशिकी 18 अंक की है, चुंबकत्व के साथ प्रेरण और प्रत्यावर्ती धारा 16 अंक की, स्थिर वैद्युतिकी के साथ विद्युत धारा 14 अंक की, और विद्युतचुंबकीय तरंगें 2 अंक की। ISC में सेमीकंडक्टर के वे टॉपिक भी बने हुए हैं जो CBSE ने 2026-27 से हटा दिए हैं, जैसे LED, फ़ोटोडायोड, सोलर सेल और Zener डायोड। जिन ट्यूटर ने दोनों बोर्ड पढ़ाए हैं वे बता देते हैं कि आपकी किताब दोस्त की किताब से कहाँ आगे जाती है, और यह फ़र्क़ आख़िरी यूनिट में सबसे ज़्यादा दिखता है।
कक्षा 12 फ़िज़िक्स में सबसे ज़्यादा अंक किन चैप्टरों में जाते हैं?
नुक़सान आम तौर पर चार जगह इकट्ठा होता है, और चारों लिखने की आदतें हैं जिन्हें कुछ हफ़्तों में बदला जा सकता है। गॉस का प्रमेय, जहाँ ग़लत सतह चुन ली जाती है। सर्किट के सवाल, जहाँ ऋण चिह्न लिखते-लिखते चुपचाप छूट जाता है। किरण प्रकाशिकी, जहाँ कार्तीय चिह्न परिपाटी गणित के बाद आती है। और प्रत्यावर्ती धारा, जहाँ फ़ेज़र उस सरल आवर्त गति के बिना पकड़ लिए जाते हैं जिस पर वे खड़े हैं। आधुनिक भौतिकी अंक दूसरी तरह गँवाती है: चैप्टर आसानी से पढ़े जाते हैं और परीक्षा ऐसे ग्राफ़ से पूछती है जो विद्यार्थी ने कभी हाथ से बनाए ही नहीं।
स्कूल के फ़िज़िक्स टीचर ही घर आकर पढ़ा दें, क्या ऐसा हो सकता है?
नहीं, और यह रोक क़ानून में है। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 स्कूल में कार्यरत शिक्षक को निजी ट्यूशन देने से रोकती है। इसलिए Edutara जिन फ़िज़िक्स ट्यूटर को खोजता है वे कॉलेज के विद्यार्थी और ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, इंजीनियरिंग या रिसर्च में काम कर रहे लोग, और सेवानिवृत्त शिक्षक होते हैं, जिन पर यह रोक लागू नहीं होती। कक्षा 12 फ़िज़िक्स के लिए यह अक्सर विद्यार्थी के फ़ायदे में जाता है, क्योंकि जिसने ये डेरिवेशन हाल में ख़ुद किए हैं उसे याद रहता है कि इनमें अटकाने वाली लाइन कौन सी है।
हम यूपी बोर्ड, बिहार बोर्ड या किसी और राज्य बोर्ड से हैं, क्या ट्यूटर को वह पाठ्यक्रम आएगा?
पूछते समय बोर्ड का नाम बता दीजिए, वह खोज में जुड़ जाता है। ज़्यादातर राज्य बोर्ड कक्षा 12 फ़िज़िक्स उन्हीं NCERT चैप्टरों पर खड़ी करते हैं, इसलिए फ़िज़िक्स ख़ुद एक बोर्ड से दूसरे तक चली जाती है। फ़र्क़ पेपर में आता है: थ्योरी और प्रैक्टिकल का बँटवारा, वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का हिस्सा, और पेपर की भाषा। सत्र 2026-27 का पाठ्यक्रम और पेपर पैटर्न अपने बोर्ड की अपनी साइट से लेकर पहले हफ़्ते में ट्यूटर को दे दीजिए, ताकि प्रैक्टिस पेपर वही हों जो आप सचमुच देने वाले हैं।
2026-27 में CBSE कक्षा 12 फ़िज़िक्स का पेपर कैसा दिखता है?
सत्र 2026-27 के लिए CBSE ने जो सैंपल पेपर जारी किया है उसमें 33 प्रश्न हैं, सभी अनिवार्य, और पाँच सेक्शन हैं। सेक्शन A में एक-एक अंक के सोलह प्रश्न हैं, बारह बहुविकल्पीय और चार कथन-कारण वाले। सेक्शन B में दो-दो अंक के पाँच, सेक्शन C में तीन-तीन अंक के सात, सेक्शन D में चार-चार अंक के दो केस स्टडी प्रश्न, और सेक्शन E में पाँच-पाँच अंक के तीन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। पूरे पेपर में कोई समग्र विकल्प नहीं है, आंतरिक विकल्प छह प्रश्नों में मिलता है: सेक्शन B के दो, सेक्शन C का एक और सेक्शन E के तीनों। कैलकुलेटर की अनुमति नहीं है।
क्या एक ही ट्यूटर बोर्ड और JEE Main या NEET-UG दोनों संभाल सकते हैं?
चैप्टर की सूची लगभग पूरी तरह मिलती है। National Medical Commission की जारी की हुई NEET (UG) 2026 की सूची में स्थिर वैद्युतिकी, विद्युत धारा, धारा के चुंबकीय प्रभाव और चुंबकत्व, विद्युतचुंबकीय प्रेरण तथा प्रत्यावर्ती धारा, विद्युतचुंबकीय तरंगें, प्रकाशिकी, द्रव्य तथा विकिरण की द्वैत प्रकृति, परमाणु और नाभिक, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं, यानी कक्षा 12 का पूरा कोर्स, और साथ में प्रायोगिक कौशल की एक यूनिट जुड़ जाती है। बदलता सवाल है। बोर्ड का उत्तर डेरिवेशन और नामांकित चित्र के साथ पूरा लिखा जाता है और रास्ते में अंक देता जाता है। प्रवेश परीक्षा का प्रश्न जल्दी से एक संख्या माँगता है और हल के लिए कुछ नहीं देता। बहुत से विद्यार्थी फ़िज़िक्स के लिए एक ही ट्यूटर रखते हैं और हर चैप्टर दो बार करते हैं, एक-एक बार दोनों शैली में।
Physics tuition ki fees kitni hai?
कक्षा 12 फ़िज़िक्स की फ़ीस Edutara दाख़िले के समय बताता है, और आप उसे Edutara के एक ही बिल से चुकाते हैं; ट्यूटर को भुगतान Edutara करता है। रक़म कक्षा और बोर्ड के हिसाब से बनती है, सिलेबस CBSE का हो या राज्य बोर्ड का, और इस हिसाब से भी कि क्लास आपके घर पर चलेगी या ऑनलाइन। पहली क्लास में आप ट्यूटर को एक डेरिवेशन हल करते हुए सुन लेते हैं, और साल के किसी भी मोड़ पर ट्यूटर बदलना मुफ़्त है।
इतने सारे डायग्राम वाले विषय में ऑनलाइन ट्यूशन चलता है क्या?
चलता है, बशर्ते ट्यूटर साझा बोर्ड पर वैसे ही लिखें जैसे कागज़ पर लिखते। रे डायग्राम, सर्किट डायग्राम, फ़ेज़र आरेख और ग्राफ़ सब टैबलेट पर साफ़ बनते हैं, और विद्यार्थी अपनी कॉपी से कोई शंका फ़ोटो करके क्लास शुरू होने से पहले भेज सकता है। दो बातें तय करती हैं: टिकाऊ कनेक्शन, और ऐसे ट्यूटर जो समझाते हुए स्क्रीन पर लिखते चलें। पहली क्लास में दोनों परख लीजिए।
कक्षा 12 फ़िज़िक्स का ट्यूशन कब शुरू करना चाहिए?
ज़्यादातर विद्यार्थी जब शुरू करते हैं, उससे पहले। दिल्ली का शिक्षा निदेशालय अपने स्कूलों से कहता है कि कक्षा 12 फ़िज़िक्स का कोर्स 5 दिसंबर 2026 तक पूरा हो जाए, और CBSE स्कूल आम तौर पर इसी के आसपास की तारीख़ पर चलते हैं ताकि प्री-बोर्ड के पास पूछने को कुछ हो। इससे दिसंबर से फ़रवरी तक का समय रिवीज़न और पूरे पेपर के लिए बचता है। जुलाई या अगस्त में ट्यूशन शुरू करने वाला विद्यार्थी हर चैप्टर दो बार मिलता है, एक बार स्कूल में और एक बार घर पर। दिसंबर में शुरू करने वाला उन चैप्टरों का रिवीज़न कर रहा होता है जो कभी ढंग से पढ़े ही नहीं गए।
पूरी गाइड

कक्षा 12 फ़िज़िक्स के साल को पास से देखिए

  1. 70 अंक का पेपर असल में क्या जाँचता है

    CBSE पाठ्यक्रम के साथ ही प्रश्नपत्र का ढाँचा छापता है, और वहाँ साफ़ लिखा रहता है कि ये 70 अंक किस तरह की सोच के बदले मिल रहे हैं। 2026-27 के ढाँचे में 27 अंक याद रखने और समझने पर हैं, 22 अंक उस ज्ञान को किसी अनदेखी स्थिति में लगाने पर, और 21 अंक विश्लेषण, मूल्यांकन तथा नया गढ़ने पर। इसे उस रिवीज़न योजना के ख़िलाफ़ चेतावनी की तरह पढ़िए जो किताब दोबारा पढ़ने पर टिकी हो, क्योंकि लगभग आधा पेपर विद्यार्थी से कहता है कि इस फ़िज़िक्स को ऐसी जगह इस्तेमाल करो जिसका पहले अभ्यास नहीं हुआ।

    अंक नौ यूनिट पर बराबर भी नहीं बँटे हैं। विद्युतचुंबकीय तरंगों के साथ प्रकाशिकी 18 अंक उठाती है, चुंबकत्व के साथ प्रेरण और प्रत्यावर्ती धारा 17, स्थिर वैद्युतिकी के साथ विद्युत धारा 16, द्वैत प्रकृति के साथ परमाणु और नाभिक 12, और सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स 7। यानी तीन हिस्सों में 70 में से 51 अंक बैठे हैं, और इनमें से कोई भी एक हफ़्ते में निपटने वाला चैप्टर नहीं है।

    काम के टिप्स

    1. हर हफ़्ते एक बार मानक ग्राफ़ याद से बनाइए: आवृत्ति बनाम निरोधी विभव, प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा, डायोड का I-V वक्र।
    2. दिसंबर से महीने में एक पूरा तीन घंटे का पेपर लिखिए, और मेज़ पर कैलकुलेटर बिल्कुल न रखिए।
    3. पिछले पाँच साल में बोर्ड ने जो डेरिवेशन पूछे हैं उनकी एक ही शीट बनाइए और रिवीज़न उसी से कीजिए।
    4. सेक्शन D के केस स्टडी प्रश्नों का अभ्यास अलग से कीजिए, क्योंकि चार अंक एक गद्यांश में लिपटे आते हैं और ज़्यादातर विद्यार्थी पढ़ने में जल्दबाज़ी कर जाते हैं।
  2. वे 30 अंक जो फ़रवरी तक याद ही नहीं आते

    CBSE कम से कम आठ प्रयोगों का रिकॉर्ड माँगता है, दोनों सेक्शन से चार-चार, कम से कम छह गतिविधियाँ, हर सेक्शन से तीन, और एक अन्वेषणात्मक प्रोजेक्ट की रिपोर्ट। प्रैक्टिकल परीक्षा ख़ुद तीन घंटे की और 30 अंक की है: दो प्रयोग 7-7 अंक के, प्रैक्टिकल रिकॉर्ड 5 अंक का, एक गतिविधि 3 अंक की, प्रोजेक्ट 3 अंक का और वाइवा 5 अंक की।

    ये 30 अंक पूरे विषय में सबसे अनुमानित हैं, और यही सबसे ज़्यादा हड़बड़ी में जोड़े जाते हैं। प्रयोगों की सूची का सेक्शन A बिजली वाला है: विभवांतर बनाम धारा के ग्राफ़ से प्रतिरोधकता, मीटर सेतु, धारामापी के लिए अर्ध विक्षेप विधि, और धारामापी को अमीटर या वोल्टमीटर में बदलना। सेक्शन B बड़े हिस्से में प्रकाशिकी का है, अवतल दर्पण की फोकस दूरी से लेकर प्रिज़्म के न्यूनतम विचलन कोण तक, और अंत में p-n संधि डायोड का I-V वक्र। जो ट्यूटर पूरे साल फ़ाइल के साथ बैठते हैं वे फ़रवरी की भागदौड़ को उन अंकों में बदल देते हैं जो थ्योरी का पेपर शुरू होने से पहले ही जमा हो चुके होते हैं।

    आम ग़लतियाँ और उनका हल

    प्रैक्टिकल फ़ाइल फ़रवरी में दोस्त से उतारी जाती है
    हर प्रयोग उसी हफ़्ते दर्ज कीजिए जिसमें वह किया गया, अपने पाठ्यांक, अपना ग्राफ़ और त्रुटि के स्रोतों पर अपनी टिप्पणी के साथ, क्योंकि वाइवा में ठीक यही पूछा जाता है।
    अन्वेषणात्मक प्रोजेक्ट जनवरी में चुना जाता है
    प्रोजेक्ट अक्टूबर तक चुन लीजिए। उसमें एक सवाल, कुछ पाठ्यांक और एक लिखी हुई रिपोर्ट चाहिए, और परीक्षक के प्रश्न तीनों पर आते हैं।
    ग्राफ़ बिना पैमाना लिखे और बिना अक्ष नाम दिए बनाए जाते हैं
    हर ग्राफ़ पर दोनों अक्ष का नाम, लिखा हुआ पैमाना और बिंदु सचमुच बिंदु की तरह अंकित कीजिए, क्योंकि परीक्षक निष्कर्ष पढ़ने से पहले ग्राफ़ पढ़ता है।
  3. बोर्ड की फ़िज़िक्स और प्रवेश परीक्षा की फ़िज़िक्स कहाँ अलग होती हैं

    चैप्टर एक जैसे हैं, और यही बात भरमाती है। National Medical Commission ने दिसंबर 2025 में जो NEET (UG) 2026 का पाठ्यक्रम जारी किया, वह स्थिर वैद्युतिकी से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तक उसी क्रम में चलता है जिसमें कक्षा 12 चलती है, और उसके बाद प्रायोगिक कौशल की एक यूनिट जोड़ देता है।

    अलगाव पाठ्यक्रम के किनारों पर होता है और उत्तर की बनावट में। CBSE का 2026-27 वाला पाठ्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स की यूनिट को दिष्टकारी की तरह काम करते सेमीकंडक्टर डायोड पर ख़त्म कर देता है। उसी साल का NEET पाठ्यक्रम LED, फ़ोटोडायोड, सोलर सेल, वोल्टेज नियामक की तरह काम करता Zener डायोड, और लॉजिक गेट अपने पास रखता है। ISC भी इनमें से कई रखता है। जो विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा की तैयारी सिर्फ़ स्कूल की किताब से करेगा, उसका इनसे सामना ही नहीं होगा।

    उत्तर की बनावट में फ़र्क़ उतना ही बड़ा है। बोर्ड कथन, डेरिवेशन, नामांकित चित्र और मान रखना क्रम से माँगता है और रास्ते में अंक देता है। प्रवेश परीक्षा का पेपर एक संख्या माँगता है और हल के लिए कुछ नहीं देता। दोनों आदतें एक ही साल में, एक ही चैप्टर पर, एक ही हफ़्ते में बन सकती हैं, और वे अलग-अलग बनाई जाती हैं।

    आम ग़लतियाँ और उनका हल

    बोर्ड वाले डेरिवेशन इसलिए छोड़ दिए जाते हैं कि प्रवेश परीक्षा उन्हें कभी नहीं पूछती
    पूरे साल हफ़्ते में एक बैठक डेरिवेशन लिखने की रखिए, क्योंकि बोर्ड पेपर के सेक्शन E में पाँच-पाँच अंक के तीन प्रश्न पूरी तरह उन्हीं पर जीते हैं।
    प्रवेश परीक्षा वाले छोटे रास्ते बोर्ड की कॉपी में उतार दिए जाते हैं
    बोर्ड का उत्तर लंबे रास्ते से लिखिए। मार्किंग स्कीम अंतिम संख्या के साथ-साथ कथन और चित्र के भी अंक देती है, और सिर्फ़ उत्तर लिख देने पर उसका एक हिस्सा ही मिलता है।
  4. होम ट्यूशन, कोचिंग बैच या अपनी मेज़

    प्राइवेट ट्यूशनट्यूटर के साथ तय
    रफ़्तार इसी विद्यार्थी के कमज़ोर चैप्टर से तय होती है
    शंका उसी मिनट हल हो जाती है
    प्रैक्टिकल फ़ाइल और उसके ग्राफ़ कोई जाँचता है
    आने-जाने का समय तय कर देता है कि हफ़्ते के दिनों में कितने स्लॉट मिल सकते हैं
    कोचिंग सेंटरसेंटर तय करता है
    समय-सारणी तय रहती है, टालना मुश्किल होता है
    बड़े समूह के मुक़ाबले नियमित टेस्ट
    बैच चैप्टरों में अपनी ही रफ़्तार से चलता है
    शंका आम तौर पर क्लास ख़त्म होने तक इंतज़ार करती है
    ऑनलाइन ट्यूशनट्यूटर के साथ तय
    दूसरे शहर में रहने वाले ट्यूटर तक पहुँच
    क्लास के दोनों ओर आने-जाने का समय बचता है
    साझा बोर्ड पर काम दोनों को दिखता रहता है
    टिकाऊ कनेक्शन और एक शांत घंटा ज़रूरी है

    कक्षा 12 के ज़्यादातर विद्यार्थी इनमें से दो एक साथ चलाते हैं, और असली सवाल यह है कि फ़िज़िक्स का बोझ कौन सा रास्ता उठाएगा। जिस विषय के अंक लिखने की आदतों में जाते हों, उसे आम तौर पर कोई चाहिए जो लिखना देखता रहे।

शुरुआत कैसे करें

एक चैप्टर और एक डेरिवेशन से शुरू कीजिए

  • किसी भी मोड़ पर ट्यूटर मुफ़्त बदलें
  • Edutara का एक बिल
  • घर पर या ऑनलाइन
  • CBSE, ISC और राज्य बोर्ड

Edutara को बोर्ड, क्लास और यह बता दीजिए कि ट्यूटर घर पर चाहिए या ऑनलाइन, फ़िज़िक्स ट्यूटर की खोज वहीं से शुरू हो जाती है।

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पढ़ाई जमे, तो ही आगे जारी रखें। न जमे, तो दूसरा ट्यूटर मुफ़्त।

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