एक विद्यार्थी, एक ट्यूटर
हर क्लास एक ही विद्यार्थी के लिए होती है। ट्यूटर रफ़्तार इस आधार पर तय करता है कि कल का हिस्सा कितना समझ में आया, और चालीस विद्यार्थियों की क्लास में यह मुमकिन नहीं होता।
अहमदाबाद में होम ट्यूशन यानी एक विद्यार्थी के लिए एक ट्यूटर, GSEB, CBSE या ICSE, गुजराती, हिंदी या अंग्रेज़ी माध्यम में। बोपल से मणिनगर तक हज़ारों विद्यार्थी इसी तरह पढ़ते हैं, अपने इलाक़े में घर पर या ऑनलाइन, और क्लास की रफ़्तार हर विद्यार्थी की अपनी होती है। तालमेल पहले एक ट्रायल क्लास में परखा जाता है।
यह कैसे काम करता है
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होम ट्यूशन का मतलब है कि ट्यूटर आपके घर आता है, चाहे वह मणिनगर हो, बोडकदेव हो या नरोडा, और एक ही विद्यार्थी को उस समय पढ़ाता है जो उसी विद्यार्थी के हिसाब से ठीक बैठता है। अहमदाबाद में इसकी ज़रूरत इसलिए बनती है कि शहर एक साथ कई व्यवस्थाओं में पढ़ता है। गुजरात बोर्ड कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षा गुजराती, अंग्रेज़ी और हिंदी माध्यम में लेता है, और उन्हीं मोहल्लों में CBSE तथा ICSE स्कूल भी चलते हैं। घर आने वाला ट्यूटर उसी किताब और उसी सिलेबस से चलता है जो आपका स्कूल पढ़ा रहा है, और उसी भाषा में समझाता है जिसमें विद्यार्थी सोचता है।
चार क़दम, उस दिन से जब आप ज़रूरत बताते हैं, उस हफ़्ते तक जब क्लास अपनी लय पकड़ लेती है।
बताइए कि स्कूल GSEB गुजराती माध्यम है, GSEB अंग्रेज़ी माध्यम, CBSE या ICSE, कौन सी कक्षा और कौन से विषय, और ट्यूटर आपके इलाक़े में घर आए या ऑनलाइन पढ़ाए।
खोज उसी व्यक्ति की होती है जो वही सिलेबस उसी माध्यम में पढ़ाता हो और आपके हिस्से तक पहुँच सके, चाहे आप पूरब में वस्त्राल के पास रहते हों या पश्चिम में SG हाईवे के आसपास।
ट्यूटर विद्यार्थी के साथ एक पूरी क्लास पढ़ाता है। आप चाहें तो पास बैठकर देख सकते हैं कि समझाने का तरीक़ा कैसा है। आगे की क्लास तभी चलती है जब विद्यार्थी ट्यूटर के साथ सहज हो।
दिन और घंटे ट्यूटर के साथ तय होते हैं, और आपकी योजना की फ़ीस Edutara पक्की करके एक ही बिल भेजता है। अहमदाबाद के कई विद्यार्थी क्लास शाम सात बजे के बाद रखते हैं, जब स्कूल और आना-जाना निपट जाता है।
शहर साबरमती के दोनों किनारों पर बसा है, और ट्यूटर का सफ़र ही तय करता है कि क्या निभ पाएगा।
अहमदाबाद नगर निगम पूरे शहर को सात ज़ोन और 48 वार्ड में बाँटकर चलाता है, और इनके बीच की दूरी असली है: चांदखेड़ा में रहने वाला ट्यूटर किसी कामकाजी शाम को वटवा तक शायद ही पहुँचे। पहले अपना इलाक़ा बताइए, खोज वहीं से शुरू होकर बाहर की ओर बढ़ती है।
पश्चिमी किनारे की पुरानी यूनिवर्सिटी पट्टी। गुजरात यूनिवर्सिटी यहीं है और सड़क के उस पार एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज, इसलिए सुबह से ही यहाँ विद्यार्थियों और कोचिंग क्लासों की भीड़ रहती है।
वस्त्रापुर झील के आसपास फैला पश्चिमी अहमदाबाद का नया मध्यवर्गीय हिस्सा। यहाँ के विद्यार्थियों की अक्सर दो समय-सारणियाँ साथ चलती हैं: SG हाईवे के एक तरफ़ स्कूल और दूसरी तरफ़ कोचिंग या खेल।
सरखेज से आगे दक्षिण-पश्चिमी किनारा, जहाँ पिछले दो दशकों में फ़्लैटों की क़तारें खड़ी हुई हैं। पुराने शहर तक आने-जाने में इतना समय लगता है कि यहाँ के विद्यार्थी पास ही रहने वाला ट्यूटर चाहते हैं।
नदी के उस पार गांधीनगर हाईवे के किनारे, साथ में मोटेरा और साबरमती। दफ़्तर जाने वालों की भीड़ गांधीनगर की ओर बढ़ती है और विद्यार्थी उल्टी दिशा में स्कूल जाते हैं, इसलिए क्लास का समय दिन के दोनों सिरों पर सिमट जाता है।
पुराने शहर के दक्षिण-पूर्व में कांकरिया झील के आसपास बसा बड़ा रिहायशी हिस्सा। यहाँ गुजराती माध्यम की पढ़ाई मज़बूत है और कक्षा 11-12 साइंस की क्लासें स्टेशन के पास चलती हैं।
उत्तर की औद्योगिक पट्टी, जहाँ नरोडा के कारख़ानों ने देश भर से मज़दूर बुलाए। यहाँ बहुत से घरों की भाषा हिंदी है, जबकि स्कूल का नोटिस बोर्ड और अक्सर बोर्ड का पर्चा गुजराती में होता है।
पूर्वी अहमदाबाद की सबसे तेज़ी से बढ़ती रिहायशी पट्टी, ओढव और वस्त्राल के औद्योगिक इलाक़ों से सटी हुई। नई इमारतें तेज़ी से भर रही हैं, और स्कूल गुजराती माध्यम से लेकर नए CBSE स्कूलों तक हैं।
पुराने कोट वाले शहर के उत्तर की बीच की पट्टी, एक ओर असारवा का सिविल अस्पताल परिसर और दूसरी ओर शाहपुर तथा दरियापुर के पुराने मोहल्ले। सरकारी क्वार्टरों के कई विद्यार्थी यहाँ केंद्रीय स्कूलों में पढ़ते हैं।
तीन बोर्ड की स्कूली पढ़ाई, साइंस और कॉमर्स का प्रवेश परीक्षा वाला साल, और वयस्कों के लिए भाषाएँ।
स्कूल और कॉलेज के पाँच ऐसे पड़ाव, जहाँ घर पर एक ट्यूटर पूरे हफ़्ते की शक्ल बदल देता है।
शुरुआत किस विषय से हो, यह उलझन है? अपनी ज़रूरत बताइए और हम उसी विषय को उसी स्तर पर पढ़ाने वाला ट्यूटर खोजेंगे।
अपनी ज़रूरत बताइएनिकोल में कक्षा 3 के बच्चे के लिए और प्रह्लाद नगर में अंग्रेज़ी सीखते वयस्क के लिए, व्यवस्था एक ही है।
हर क्लास एक ही विद्यार्थी के लिए होती है। ट्यूटर रफ़्तार इस आधार पर तय करता है कि कल का हिस्सा कितना समझ में आया, और चालीस विद्यार्थियों की क्लास में यह मुमकिन नहीं होता।
अहमदाबाद चौड़ा शहर है और शाम सात बजे इसे पार करना धीमा काम है। खोज उन्हीं ट्यूटरों से शुरू होती है जो आपके इलाक़े तक उन दिनों पहुँच सकें, ताकि व्यवस्था पहले महीने के बाद भी चलती रहे।
कुछ तय होने से पहले आप ट्यूटर को पढ़ाते हुए देख लेते हैं। मेल न बैठे तो Edutara बिना कोई शुल्क लिए नया ट्यूटर खोजता है, पढ़ाई चाहे गुजराती माध्यम में हो, हिंदी में या अंग्रेज़ी में।
ट्यूशन की फ़ीस Edutara कक्षा, विषय और आपके इलाक़े तक ट्यूटर के सफ़र को देखकर तय करता है, और भुगतान Edutara के बिल से होता है।
निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 स्कूल में कार्यरत शिक्षक को निजी ट्यूशन से रोकती है, इसलिए Edutara कॉलेज विद्यार्थियों, स्नातकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों की ओर देखता है।
क्लास आपकी मेज़ पर चलती है या ऑनलाइन। बोपल और चांदखेड़ा के विद्यार्थी कामकाजी शामों में अक्सर ऑनलाइन चुनते हैं, जब हाईवे का ट्रैफ़िक तय करता है कि ट्यूटर कितने बजे पहुँचेगा।
बोर्ड, माध्यम, शहर की दूरी और इस पूरी व्यवस्था का ख़र्च।
गुजरात बोर्ड (GSEB) गुजराती, अंग्रेज़ी और हिंदी माध्यम में, साथ ही CBSE तथा ICSE और ISC। बताइए कि आपका स्कूल कौन सा बोर्ड चलाता है और पर्चा किस माध्यम में लिखा जाएगा, क्योंकि कक्षा 10 और कक्षा 12 का सिलेबस और सवालों का ढाँचा इनमें अलग-अलग है। अगर स्कूल GSEB अंग्रेज़ी माध्यम का है तो यह साफ़ कहिए: किताबें बोर्ड की अपनी होती हैं, अंग्रेज़ी में छपी हुई, और सिर्फ़ CBSE की सामग्री से परिचित ट्यूटर ग़लत किताब से पढ़ाएगा।
हाँ। **गुजरात अनिवार्य गुजराती शिक्षण अधिनियम, 2023** के तहत राज्य के स्कूलों को, जिनमें CBSE, ICSE और IB से जुड़े स्कूल भी शामिल हैं, कक्षा 1 से 8 तक गुजराती को अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ाना ज़रूरी है, और किताबें राज्य सरकार की तय की हुई होती हैं। जिन घरों की भाषा हिंदी, मारवाड़ी या कोई और है, वहाँ विद्यार्थियों को गुजराती पढ़ने-लिखने पर हफ़्ते में कुछ घंटे देने पड़ते हैं।
गुजरात बोर्ड कक्षा 10 की परीक्षा गुजराती, अंग्रेज़ी और हिंदी माध्यम में लेता है, यानी हिंदी माध्यम के विद्यार्थी वही SSC परीक्षा अपनी भाषा में देते हैं। मई 2026 में घोषित GSEB कक्षा 10 के परिणाम के अनुसार हिंदी माध्यम का उत्तीर्ण प्रतिशत 77.20 रहा और अंग्रेज़ी माध्यम का 92.50, जिससे पता चलता है कि पढ़ाई की भाषा नतीजे पर कितना असर डालती है। माँग करते समय माध्यम बता दीजिए, खोज ऐसे ट्यूटर की होगी जो उसी भाषा में पढ़ा और पर्चे बनवा सके।
गुजरात बोर्ड के 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षाएँ 25 फ़रवरी से 17 मार्च 2027 के बीच रखी गई हैं। सत्र 8 जून 2026 को खुला और दीवाली अवकाश 5 से 25 नवंबर 2026 तक है। जो विद्यार्थी जून-जुलाई में ट्यूशन शुरू करते हैं, वे दीवाली से पहले सिलेबस निपटा लेते हैं और जनवरी-फ़रवरी पर्चों और दोहराव के लिए बचा रहता है। दिसंबर में शुरू करने पर सिर्फ़ दोहराव भर का समय बचता है, जो कमज़ोर विषय के लिए कम पड़ता है।
अक्सर हाँ, क्योंकि GUJCET गुजरात बोर्ड ही कक्षा 12 साइंस के सिलेबस पर लेता है। यह बहुविकल्पीय पर्चा है जिसमें हर विषय के 40 सवाल होते हैं: भौतिकी और रसायन एक ही सत्र में, ग्रुप A के लिए गणित अलग पर्चा, ग्रुप B के लिए जीव विज्ञान, और ग्रुप AB चारों देता है। GUJCET 2026 बोर्ड परीक्षाओं के बाद 29 मार्च 2026 को हुआ था, और हर साल की तारीख़ बोर्ड gseb.org पर घोषित करता है। अध्याय दोनों के एक ही हैं, अभ्यास का तरीक़ा अलग होता है।
यह इस पर निर्भर है कि आप कहाँ रहते हैं और क्लास किस समय चाहिए। सैटेलाइट में रहने वाले ट्यूटर को बोडकदेव पहुँचने में बीस मिनट लग सकते हैं और कामकाजी शाम को निकोल पहुँचने में एक घंटा। फ़ॉर्म में पहले आपका इलाक़ा पूछा जाता है और खोज वहीं से बाहर की ओर बढ़ती है। जहाँ दूरी की वजह से हफ़्ते के दिनों में क्लास मुश्किल हो, वही ट्यूटर ऑनलाइन पढ़ा सकता है, जो उन विषयों में कई विद्यार्थी अपनाते हैं जिन्हें स्क्रीन पर समझा जा सके।
भुगतान Edutara को होता है, एक ही बिल से, और नियमित क्लास शुरू होने से पहले, दाख़िले के समय रकम आपके सामने होती है। फ़ीस कक्षा, विषय और इस बात से बनती है कि ट्यूटर साबरमती के किस किनारे से आ रहा है, इसलिए वटवा के पास GSEB कक्षा 10 की क्लास और नवरंगपुरा में GUJCET की दोहराई अलग-अलग दर पर बैठती हैं। हर पढ़ाई गई क्लास का भुगतान ट्यूटर को Edutara करता है, और ट्यूटर किसी भी चरण पर कुछ नहीं देते: न जुड़ने की फ़ीस, न विद्यार्थी मिलने का कोई शुल्क।
ये कॉलेज के विद्यार्थी, स्नातक, सेवानिवृत्त शिक्षक और स्कूल व्यवस्था के बाहर पढ़ाने वाले लोग होते हैं। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 स्कूल में कार्यरत शिक्षक को निजी ट्यूशन देने से रोकती है, इसलिए कार्यरत स्कूल शिक्षकों को कभी नहीं बुलाया जाता। अहमदाबाद में यह आसान है: नवरंगपुरा की गुजरात यूनिवर्सिटी, उसके सामने एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज, चांदखेड़ा की गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और असारवा का बीजे मेडिकल कॉलेज, सब मिलकर ज़्यादातर इलाक़ों की पहुँच में स्नातक बनाए रखते हैं।
हाँ। बोलचाल की अंग्रेज़ी, IELTS Academic और General Training, और यूनिवर्सिटी के विषय, तीनों की माँग अहमदाबाद में रहती है, दफ़्तरों और अस्पतालों में काम करने वालों की ओर से भी और गुजरात यूनिवर्सिटी तथा उससे जुड़े कॉलेजों के विद्यार्थियों की ओर से भी। क्लास घर पर या ऑनलाइन, जिस भी समय फ़ुरसत हो, अक्सर सुबह जल्दी या देर शाम। पहली क्लास ट्रायल यहाँ भी उसी तरह होती है जैसे स्कूल के विद्यार्थी के लिए।
ट्यूटर विद्यार्थी के साथ एक सामान्य क्लास लेता है, उसी विषय पर जिसके लिए आपने कहा था। आप चाहें तो पास बैठकर सुन सकते हैं। क्लास के बाद आप तय करते हैं कि आगे चलना है या नहीं; आगे बढ़ें तो दिन और समय ट्यूटर के साथ तय होते हैं और फ़ीस Edutara पक्की करता है। उस क्लास से पहले कुछ भी पक्का नहीं किया जाता, और आगे कभी ट्यूटर बदलवाना हो तो Edutara यह बदलाव मुफ़्त करता है।
संपर्क पेज पर कक्षा, विषय और अपना इलाका लिखकर भेजिए। जवाब में हम बताएँगे कि आगे क्या करना है।
शहर के ज़्यादातर स्कूल गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जुड़े हैं, जो कक्षा 10 को SSC और कक्षा 12 को HSC के रूप में लेता है और गुजराती, अंग्रेज़ी तथा हिंदी माध्यम में चलता है। CBSE स्कूल पश्चिमी उपनगरों और बोपल तथा चांदखेड़ा की नई पट्टियों में आम हैं। ICSE और ISC स्कूलों में विद्यार्थियों का छोटा हिस्सा पढ़ता है। मई 2026 में घोषित GSEB कक्षा 10 परिणाम के अनुसार 83.86 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए, जिसमें अंग्रेज़ी माध्यम 92.50 पर और हिंदी माध्यम 77.20 पर रहा।
माध्यम का असर ट्यूशन पर बहुत व्यावहारिक ढंग से पड़ता है। गुजराती माध्यम के स्कूल में पढ़ने वाला कक्षा 10 का विद्यार्थी विज्ञान की शब्दावली गुजराती में सीखता है और पर्चा भी उसी में लिखेगा, इसलिए केवल अंग्रेज़ी में समझाने वाला ट्यूटर परीक्षा वाले हिस्से को छूता ही नहीं। गुजरात अनिवार्य गुजराती शिक्षण अधिनियम, 2023 के बाद CBSE, ICSE और IB से जुड़े स्कूल भी कक्षा 1 से 8 तक गुजराती को अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ाते हैं, जिससे अंग्रेज़ी माध्यम के कई विद्यार्थी ऐसी भाषा के लिए मदद ढूँढ़ने निकलते हैं जो वे घर पर नहीं बोलते।
CBSE ने कक्षा 10 के साल की शक्ल भी बदल दी है। 2026 से बोर्ड कक्षा 10 की परीक्षा दो बार लेता है, पहली फ़रवरी में और दूसरी मई में, जिसका उपयोग विद्यार्थी अधिकतम तीन विषयों में नतीजा सुधारने के लिए कर सकता है। हर चक्र की डेट शीट बोर्ड cbse.gov.in पर डालता है, इसलिए ट्यूशन का कैलेंडर बनाने से पहले उसी साल का कार्यक्रम देख लीजिए।
राज्य के 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में स्कूल का साल 8 जून 2026 को खुला और पहला सत्र 4 नवंबर तक चलता है। दीवाली अवकाश 5 से 25 नवंबर 2026 तक है, दूसरा सत्र 26 नवंबर से 2 मई 2027 तक चलता है, और उसके बाद 3 मई से 6 जून 2027 तक गर्मी की छुट्टियाँ। कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएँ 25 फ़रवरी से 17 मार्च 2027 के बीच पड़ती हैं, और पूरे सत्र में कैलेंडर 244 कार्यदिवस गिनता है।
ट्यूशन की योजना बनाते विद्यार्थी के लिए दीवाली का अवकाश साल का मोड़ है। बीच सत्र में मिले तीन हफ़्ते किसी एक विषय का पिछड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए काफ़ी हैं, और उतने ही सितंबर में की गई पढ़ाई भुला देने के लिए भी। इसलिए बोर्ड वाले साल का असली बोझ दो हिस्सों में पड़ता है: जून से दीवाली तक, जब सिलेबस पहली बार पढ़ाया जाता है, और नवंबर के आख़िर से फ़रवरी की शुरुआत तक, जब बचे हुए अध्याय निपटते हैं और स्कूल अपने अभ्यास पर्चे लेते हैं।
गुजरात में साइंस स्ट्रीम का विद्यार्थी कुछ ही हफ़्तों में कई पर्चे देता है। राज्य के इंजीनियरिंग और फ़ार्मेसी पाठ्यक्रमों में दाख़िले के लिए GUJCET गुजरात बोर्ड ही लेता है, कक्षा 12 के सिलेबस पर, बहुविकल्पीय पर्चे के रूप में जिसमें हर विषय के 40 सवाल होते हैं। ग्रुप A भौतिकी, रसायन और गणित लेता है, ग्रुप B भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान, और ग्रुप AB चारों। GUJCET 2026 बोर्ड परीक्षाएँ ख़त्म होने के थोड़े दिन बाद 29 मार्च 2026 को हुआ था।
JEE Main, NEET-UG और CUET-UG राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी लेती है और उनका कैलेंडर अलग चलता है, जिसमें JEE Main साल की शुरुआत में दो सत्रों में होता है। जो विद्यार्थी ये सब दे रहा है, उसके पास प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग क्लास है और स्कूल का सिलेबस भी बाक़ी है। होम ट्यूशन आमतौर पर इन्हीं दोनों के बीच की जगह के लिए लिया जाता है: वह अध्याय जिसे कोचिंग दौड़ाकर निकल गई, या बोर्ड जैसा लंबा उत्तर जिसका अभ्यास MCQ से कभी नहीं होता।
शहर के कॉलेज ज़्यादातर पश्चिमी किनारे पर पास-पास बसे हैं। गुजरात यूनिवर्सिटी नवरंगपुरा में है और अहमदाबाद के अधिकांश कॉलेज उसी से संबद्ध हैं। एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज यूनिवर्सिटी के सामने है, भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद का परिसर वस्त्रापुर में, गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी गांधीनगर हाईवे पर चांदखेड़ा में, और बीजे मेडिकल कॉलेज असारवा के सिविल अस्पताल परिसर के भीतर। इन सबके चलते शहर में विद्यार्थियों और नए स्नातकों की आबादी बनी रहती है, और निजी ट्यूटर वहीं से आते हैं।
कौन निजी तौर पर पढ़ा सकता है, यह क़ानून तय करता है। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 स्कूल में कार्यरत शिक्षक को निजी ट्यूशन देने से रोकती है, इसलिए यहाँ होम ट्यूटर कॉलेज विद्यार्थी, स्नातक, सेवानिवृत्त शिक्षक और स्कूल व्यवस्था के बाहर पढ़ाने वाले लोग होते हैं। ट्यूटर माँगते समय यह बताइए कि माध्यम कौन सा चाहिए और घर में कौन सी भाषा बोली जाती है। ये दो जवाब विषय के नाम से ज़्यादा खोज को साफ़ करते हैं।
साबरमती अहमदाबाद को पूर्वी और पश्चिमी शहर में बाँटती है, जिन्हें पुल जोड़ते हैं। पूर्वी किनारे पर कोट वाला पुराना शहर है और नरोडा, ओढव तथा वटवा की औद्योगिक पट्टियाँ। पश्चिमी किनारा 1875 में एलिस ब्रिज खुलने के बाद बढ़ा और आज बोडकदेव, थलतेज और बोपल तक फैला है। नगर निगम इस पूरे हिस्से को सात ज़ोन और 48 वार्ड के ज़रिए चलाता है, और जनगणना 2011 के अनुसार शहर की आबादी क़रीब 55 लाख थी।
आना-जाना ही तय करता है कि कोई विद्यार्थी हफ़्ते दर हफ़्ते क्या निभा पाएगा। मेट्रो की ब्लू लाइन पूरब में वस्त्राल गाम से पश्चिम में थलतेज गाम तक जाती है, रेड लाइन APMC से मोटेरा स्टेडियम तक, और बीच के गलियारे BRTS बसें सँभालती हैं, फिर भी शाम सात बजे ट्यूटर का अच्छा-ख़ासा समय सड़क पर जाता है। इससे दो बातें निकलती हैं। कामकाजी शामों की क्लास के लिए नदी के अपने ही किनारे का ट्यूटर माँगिए, और जिन विषयों को विद्यार्थी स्क्रीन पर आराम से समझ ले, उनके लिए ऑनलाइन क्लास पर विचार कीजिए।
अहमदाबाद दशकों से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से मज़दूर खींचता रहा है, और नरोडा, ओढव तथा वटवा की औद्योगिक पट्टियाँ ही वे जगहें हैं जहाँ ऐसे बहुत से कामगार रहते हैं। इन घरों के विद्यार्थी ऐसे स्कूलों में पढ़ते हैं जहाँ नोटिस बोर्ड गुजराती में है और बोर्ड का पर्चा गुजराती, हिंदी या अंग्रेज़ी में हो सकता है, जबकि घर की मेज़ पर होमवर्क हिंदी में होता है। गुजरात बोर्ड का हिंदी माध्यम इसी आबादी के लिए है, और कक्षा 10 में उसका उत्तीर्ण प्रतिशत बाक़ी दोनों माध्यमों से पीछे रहता है।
ऐसे विद्यार्थी के लिए सबसे काम का ट्यूटर वह है जो हिंदी और किताब की भाषा के बीच आसानी से आ-जा सके; विषय की मज़बूती उसके बाद आती है। जब आप हमें हिंदी में लिखें तो यह बताइए कि विद्यार्थी किस भाषा में सोचता है और परीक्षा किस भाषा में लिखी जाएगी। ये दोनों अक्सर अलग होती हैं, और ट्यूटर का असली काम वहीं से शुरू होता है।
गुजरात दो योजनाएँ चलाता है जो ठीक उन्हीं वर्षों को छूती हैं जब विद्यार्थी ट्यूशन के बारे में सोचना शुरू करते हैं। नमो लक्ष्मी योजना कक्षा 9 से 12 की छात्राओं को हर महीने सहायता राशि देती है, बशर्ते परिवार की आय योजना की तय सीमा से कम हो। नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना उन विद्यार्थियों के लिए है जो कक्षा 10 पास करने के बाद कक्षा 11 और 12 में साइंस स्ट्रीम लेते हैं, इसमें भी आय की सीमा और अंकों की शर्त है। दोनों 2024 में राज्य सरकार ने शुरू कीं और स्कूलों के ज़रिए चलती हैं, इसलिए पात्रता और उपस्थिति की शर्तें स्कूल कार्यालय से पूछना सबसे सीधा रास्ता है।
इनमें से कोई योजना निजी ट्यूशन का ख़र्च नहीं उठाती, और Edutara का इनसे कोई संबंध नहीं है। ट्यूशन के फ़ैसले में ये इसलिए मायने रखती हैं कि पूर्वी और उत्तरी वार्डों के विद्यार्थी आगे की योजना किस हद तक बना सकते हैं, यह इनसे बदलता है, और ये ठीक उन्हीं दो वर्षों में आती हैं जब कोई एक कमज़ोर विषय तय कर देता है कि विद्यार्थी कौन सी स्ट्रीम ले पाएगा।
क्लास, बोर्ड, माध्यम और अपना इलाक़ा बता दीजिए, खोज वहीं से शुरू होगी।
आगे क्या होगा
शुरुआत एक ट्रायल क्लास से कीजिए और आगे तभी बढ़िए जब ट्यूटर विद्यार्थी को जँचे। उसके बाद क्लास का बिल एक ही होता है, और वह Edutara से आता है।