एक विद्यार्थी, एक ट्यूटर
क्लास में एक ही विद्यार्थी होता है। ट्यूटर वहीं से शुरू करता है जहाँ बच्चा सचमुच खड़ा है, और तीस बच्चों वाला कमरा यह एक काम नहीं कर पाता, पढ़ाई चाहे जितनी अच्छी हो।
Edutara आपके लिए ऐसा ट्यूटर ढूँढ़ता है जो एक ही विद्यार्थी को पढ़ाए, आपके घर पर या ऑनलाइन। क्लास, बोर्ड और इलाक़ा बता दीजिए, चाहे वह रोहिणी हो, मयूर विहार हो या सरिता विहार, और पहली क्लास ट्रायल रहती है।
यह कैसे काम करता है
होम ट्यूशन का मतलब है कि ट्यूटर आपके घर आता है और एक ही विद्यार्थी को, आपके चुने हुए समय पर पढ़ाता है। दिल्ली के ज़्यादातर स्कूल CBSE से जुड़े हैं, चाहे वे शिक्षा निदेशालय के स्कूल हों, नगर निगम के हों या प्राइवेट, इसलिए यहाँ की ज़्यादातर माँग CBSE की किसी क्लास, बोर्ड वाले साल या Class 11-12 के सिलेबस पर बनी प्रवेश परीक्षा से जुड़ी होती है। कुछ स्कूल CISCE का कोर्स पढ़ाते हैं और गिने-चुने स्कूल इंटरनेशनल कोर्स चलाते हैं। दिल्ली बहुत फैली हुई भी है, और आने-जाने का एक-एक घंटा तय कर देता है कि हफ़्ते के दिनों में क्या मुमकिन है। यही वजह है कि कई परिवार दो-तीन क्लास घर पर रखते हैं और बाक़ी ऑनलाइन कर लेते हैं।
चार क़दम, पहले संदेश से लेकर ऐसे हफ़्तेवार समय तक जो दिल्ली की भागदौड़ में टिक जाए।
क्लास, बोर्ड, विषय और अपना इलाक़ा: पीतमपुरा, जनकपुरी, साकेत, शहर में कहीं भी। यह भी बता दीजिए कि ट्यूटर घर आए, ऑनलाइन पढ़ाए, या दोनों मिलाकर चले।
हम ऐसे व्यक्ति को खोजते हैं जो पहले से वही क्लास और वही बोर्ड पढ़ाता हो और आपके तय समय पर दिल्ली के आपके हिस्से तक पहुँच सके। यहाँ आने-जाने का समय भी खोज का हिस्सा है, क्योंकि शहर पार करने में पूरी शाम निकल जाती है।
पहली क्लास ट्रायल होती है। आप पास बैठकर सुन सकते हैं कि कोई चैप्टर कैसे समझाया जा रहा है, और आगे तभी बढ़ते हैं जब विद्यार्थी और ट्यूटर दोनों को ठीक लगे।
हफ़्ते के दिन, समय और ट्यूशन की फ़ीस ट्यूटर के साथ तय होती है और फ़ीस सीधे ट्यूटर को दी जाती है। दिल्ली में बोर्ड परीक्षा से पहले के महीनों में परिवार अक्सर क्लास बढ़ा लेते हैं और नतीजों के बाद घटा देते हैं।
क्लास, बोर्ड, विषय और अपना इलाक़ा: पीतमपुरा, जनकपुरी, साकेत, शहर में कहीं भी। यह भी बता दीजिए कि ट्यूटर घर आए, ऑनलाइन पढ़ाए, या दोनों मिलाकर चले।
हम ऐसे व्यक्ति को खोजते हैं जो पहले से वही क्लास और वही बोर्ड पढ़ाता हो और आपके तय समय पर दिल्ली के आपके हिस्से तक पहुँच सके। यहाँ आने-जाने का समय भी खोज का हिस्सा है, क्योंकि शहर पार करने में पूरी शाम निकल जाती है।
पहली क्लास ट्रायल होती है। आप पास बैठकर सुन सकते हैं कि कोई चैप्टर कैसे समझाया जा रहा है, और आगे तभी बढ़ते हैं जब विद्यार्थी और ट्यूटर दोनों को ठीक लगे।
हफ़्ते के दिन, समय और ट्यूशन की फ़ीस ट्यूटर के साथ तय होती है और फ़ीस सीधे ट्यूटर को दी जाती है। दिल्ली में बोर्ड परीक्षा से पहले के महीनों में परिवार अक्सर क्लास बढ़ा लेते हैं और नतीजों के बाद घटा देते हैं।
शहर उसी तरह, जैसे लोग बताते हैं: कॉलोनी से, बाज़ार से, पास के मेट्रो स्टेशन से।
1 जनवरी 2026 से दिल्ली तेरह राजस्व ज़िलों में बँटी है, हालाँकि पता कोई इस तरह नहीं बताता। नीचे शहर के वे हिस्से हैं जिनका नाम आप अपनी माँग में लिख सकते हैं, और हर हिस्से के भीतर वही इलाक़े जो लोग बोलचाल में कहते हैं।
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की बसाई हुई उप-नगरी, नंबर वाले सेक्टरों में। स्कूल बसें लंबा चक्कर लगाती हैं और Blue Line द्वारका सेक्टर 21 पर ख़त्म होती है। यहाँ क्लास अक्सर बस लौटने के बाद, शाम ढलते ही शुरू होती है।
पश्चिमी दिल्ली की पुरानी कॉलोनियाँ, जहाँ स्कूल बाज़ारों और फ्लैटों के बीच बसे हैं। इस पट्टी के भीतर दूरियाँ कम हैं, इसलिए एक कॉलोनी में रहने वाला ट्यूटर तीन कॉलोनियों तक पढ़ा लेता है।
उत्तर-पश्चिम दिल्ली की सेक्टरों और ब्लॉकों वाली बसावट, जहाँ स्कूल रिहायशी हिस्सों के भीतर ही हैं। रोहिणी के अंदर आने के बाद ट्यूटर का सफ़र छोटा रह जाता है, इसलिए शाम का तय समय यहाँ बाक़ी शहर से आसानी से निभता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के आसपास का उत्तरी हिस्सा, जहाँ दुकानों के ऊपर हॉस्टल, पीजी कमरे और कोचिंग की मंज़िलें हैं। यहाँ परिवार बड़ी विद्यार्थी आबादी के बीच रहते हैं।
मध्य दिल्ली, जहाँ घर दुकानों के ऊपर हैं और गलियाँ इतनी सँकरी कि स्कूटर कार से तेज़ पड़ता है। बाज़ार की भीड़ छँटने के बाद शाम की क्लास सबसे अच्छी चलती है।
यमुना पार की पूर्वी दिल्ली, फ्लैटों और कोचिंग की मंज़िलों से भरी घनी पट्टी। कॉमर्स के विद्यार्थी यहाँ बहुत हैं, इसलिए माँग में अक्सर accountancy, business studies और economics का नाम आता है।
उत्तर-पूर्वी हिस्सा, जहाँ गलियाँ सँकरी हैं और ज़्यादातर बच्चे शिक्षा निदेशालय, नगर निगम या सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ते हैं। यहाँ शाम का एक पक्का समय बदलते समय से बेहतर चलता है, क्योंकि अँधेरे के बाद गलियों में गाड़ी ले जाना मुश्किल होता है।
दक्षिणी दिल्ली, कोठियों वाली कॉलोनियों से लेकर रिज के पास की ऊँची इमारतों तक। बड़ी सड़कों का ट्रैफ़िक समय तय करता है, इसलिए यहाँ ट्यूटर आम तौर पर या तो शाम जल्दी वाला स्लॉट रखते हैं या देर शाम वाला, दोनों कम ही।
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, रिंग रोड और यमुना के बीच फैली कॉलोनियाँ, जहाँ CBSE स्कूलों के साथ कई CISCE स्कूल भी हैं। यहाँ परिवार अक्सर ICSE या ISC के पेपर का नाम लेकर ट्यूटर माँगते हैं।
CBSE और CISCE कोर्स के स्कूली विषय, कक्षा 12 के बाद की प्रवेश परीक्षाएँ, और नौकरीपेशा वयस्कों के लिए अंग्रेज़ी।
वे साल जिनमें दिल्ली का परिवार ट्यूटर खोजने निकलता है, और हर साल हफ़्ते से क्या माँगता है।
शुरुआत किस विषय से हो, यह उलझन है? अपनी ज़रूरत बताइए और हम उसी विषय को उसी स्तर पर पढ़ाने वाला ट्यूटर खोजेंगे।
अपनी ज़रूरत बताइएदिल्ली के हर हिस्से में वही कुछ नियम, यहाँ लिखकर रख दिए हैं ताकि बाद में किसी बात पर मोल-भाव न करना पड़े।
क्लास में एक ही विद्यार्थी होता है। ट्यूटर वहीं से शुरू करता है जहाँ बच्चा सचमुच खड़ा है, और तीस बच्चों वाला कमरा यह एक काम नहीं कर पाता, पढ़ाई चाहे जितनी अच्छी हो।
सरिता विहार तक जाने वाला ट्यूटर और उसी बच्चे को ऑनलाइन पढ़ाने वाला ट्यूटर, दोनों एक ही इंतज़ाम हैं। दिल्ली के हफ़्ते जैसे होते हैं, उसमें कई परिवार एक ही महीने में दोनों तरीक़े काम में लाते हैं।
किसी पूरे सत्र के लिए हाँ नहीं करनी पड़ती। परिवार एक क्लास देखता है, विद्यार्थी बताता है कि समझ में आया या नहीं, और उसी पर आगे का फ़ैसला होता है।
ट्यूशन की फ़ीस ट्यूटर के साथ तय होती है और सीधे ट्यूटर को दी जाती है, और वह क्लास, विषय तथा दूरी के हिसाब से बदलती है। Edutara परिवार से ट्यूटर से मिलवाने की एक बार की फ़ीस और एक छोटी मासिक फ़ीस लेता है।
न जुड़ने की फ़ीस, न कमीशन, न किसी लीड का पैसा। मयूर विहार में कक्षा 12 की भौतिकी पढ़ाने वाले ट्यूटर के पास वही रहता है जो परिवार क्लास के लिए देता है।
स्कूल में नौकरी कर रहे शिक्षक का निजी ट्यूशन निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 से रुका हुआ है। इसलिए Edutara कॉलेज के विद्यार्थियों, स्नातकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों में देखता है।
बोर्ड, आना-जाना, हवा और पैसा, उसी तरह समझाया गया जैसे फ़ोन पर बताते।
आप Edutara को क्लास, बोर्ड, विषय और इलाक़ा बताते हैं, साथ ही यह कि क्लास घर पर चाहिए या ऑनलाइन। इसके बाद हम ऐसा ट्यूटर खोजते हैं जो पहले से वही पढ़ाता हो और आपके तय समय पर शहर के आपके हिस्से तक पहुँच सके। पहली क्लास ट्रायल रहती है, यानी परिवार एक क्लास देखने के बाद फ़ैसला करता है। दिन, समय और ट्यूशन की फ़ीस ट्यूटर के साथ तय होती है और फ़ीस सीधे ट्यूटर को जाती है।
शहर का ज़्यादातर हिस्सा CBSE है। शिक्षा निदेशालय के स्कूल, नगर निगम के स्कूल, केंद्रीय विद्यालय और लगभग सारे प्राइवेट स्कूल CBSE से जुड़े हैं, और दिल्ली सरकार ने 2025-26 सत्र में जो 75 CM SHRI स्कूल बनाए, वे भी CBSE से संबद्ध हैं। 2021 में बना Delhi Board of School Education समेटा जा रहा है और उसके Schools of Specialised Excellence वापस CBSE में जा रहे हैं। कुछ स्कूल CISCE का कोर्स चलाते हैं, कक्षा 10 तक ICSE और कक्षा 11-12 में ISC, और गिने-चुने स्कूलों में इंटरनेशनल कोर्स हैं। लिखते समय बोर्ड का नाम ज़रूर बता दीजिए, क्योंकि पढ़ाई पेपर के हिसाब से तय होती है।
क्लास ऑनलाइन हो जाती है। नवंबर 2025 में GRAP Stage III लगने पर शिक्षा निदेशालय ने अपने सभी स्कूलों को, और NDMC, MCD तथा दिल्ली छावनी बोर्ड के स्कूलों को भी, कक्षा 5 तक की पढ़ाई hybrid मोड में कराने का आदेश दिया था। दिसंबर 2025 में Stage IV के तहत यही आदेश कक्षा 9 और कक्षा 11 तक बढ़ा, जबकि कक्षा 10 और 12 स्कूल में ही चलती रहीं। होम ट्यूशन भी यही रास्ता ले सकता है: साफ़ हफ़्ते में जो ट्यूटर घर आता है, ख़राब हफ़्ते में वही स्क्रीन पर पढ़ा देता है और पढ़ाई का तार टूटता नहीं।
दिल्ली का स्कूली साल अप्रैल से मार्च तक चलता है। शिक्षा निदेशालय के 2026-27 कैलेंडर में सत्र 1 अप्रैल 2026 को खुला, गर्मियों की छुट्टियाँ 11 मई से 30 जून तक रहीं, 17 से 19 अक्टूबर 2026 तक शरद अवकाश है, और सर्दियों की छुट्टियाँ 1 से 15 जनवरी 2027 तक हैं। CBSE की कक्षा 10 और 12 की मुख्य परीक्षाएँ फ़रवरी के मध्य में शुरू होती हैं, 2026 के पेपर 17 फ़रवरी से शुरू हुए थे। जुलाई-अगस्त में शुरू करने वाले परिवारों को उससे पहले दो पूरे सत्र मिल जाते हैं। जनवरी में शुरू करने पर सर्दियों की छुट्टियाँ और कुछ हफ़्ते बचते हैं, जो रिवीज़न के लिए काफ़ी हैं और उससे ज़्यादा किसी काम के लिए कम।
ट्यूशन की फ़ीस परिवार और ट्यूटर के बीच तय होती है, और वह क्लास, विषय तथा ट्यूटर की दूरी के साथ बदलती है, जो इतने बड़े शहर में सचमुच मायने रखती है। Edutara ट्यूशन की फ़ीस नहीं लेता। Edutara परिवार से ट्यूटर से मिलवाने की एक बार की फ़ीस और जोड़ी चलाते रहने के लिए एक छोटी मासिक फ़ीस लेता है, और ये रक़में अभी तय हो रही हैं, इसलिए प्रकाशित नहीं हैं। ट्यूटर से किसी भी चरण पर कुछ नहीं लिया जाता।
हाँ, और यह जान लेना काम आता है कि पेपर कैसा होता है। सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा निदेशालय ने कक्षा 6, 9 और 11 के लिए CM SHRI Schools Admission Test कराया था। आवेदन 27 फ़रवरी से 12 मार्च 2026 तक खुले रहे और कक्षा 6 तथा कक्षा 9 के पेपर मार्च के आख़िरी हफ़्ते में हुए। कक्षा 6 के पेपर में भाषा, सामान्य जागरूकता, मानसिक योग्यता और संख्यात्मक अभिरुचि थी और वह दो भाषाओं में था; कक्षा 9 तथा 11 के पेपर केवल अंग्रेज़ी में थे और उनमें नेगेटिव मार्किंग थी। आवेदन वही बच्चे कर सकते थे जिन्होंने दिल्ली के मान्यता प्राप्त स्कूल से कक्षा 5, 8 या 10 पास की हो, और कम से कम आधी सीटें सरकारी, नगर निगम तथा सहायता प्राप्त स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए रखी गई थीं।
एक नियम इस फ़ैसले से पहले पढ़ लेना चाहिए। DTU, NSUT, IGDTUW, IIIT-Delhi और DSEU में दाख़िला JEE Main रैंक पर JAC Delhi काउंसलिंग से होता है, और JAC Delhi 2026 के admission brochure के अनुसार 85% सीटें उन्हीं उम्मीदवारों के लिए हैं जिन्होंने योग्यता परीक्षा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के भीतर किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या संस्थान से पास की हो। कक्षा 11-12 के लिए दिल्ली से बाहर के स्कूल में जाने वाला विद्यार्थी outside Delhi region में गिना जाता है और बची हुई थोड़ी सीटों के लिए लड़ता है। दिल्ली के स्कूल में रहकर अतिरिक्त घंटे घर की पढ़ाई में लगाने से यह रास्ता खुला रहता है।
NTA ने 16 सितंबर 2026 को मार्च 2027 तक का परीक्षा कैलेंडर जारी किया, जिसमें JEE Main 2027 का पहला सत्र जनवरी 2027 के दूसरे पखवाड़े में रखा गया है। ये तारीख़ें परीक्षा का information bulletin आने तक अस्थायी बताई गई हैं। यह पेज लिखे जाने तक NEET-UG 2027 और CUET-UG 2027 की तारीख़ें घोषित नहीं हुई थीं। NTA हर परीक्षा की तारीख़ उसी के bulletin में बताता है, इसलिए पिछले साल के कैलेंडर पर भरोसा करने के बजाय bulletin देख लेना समझदारी है।
हाँ, वयस्क भी। काम के लिए spoken English, विदेश आवेदन के लिए IELTS और भाषाएँ, ये सब Edutara की जोड़ियों में आते हैं। वयस्क आम तौर पर देर शाम या सप्ताहांत का समय लेते हैं, घर पर या ऑनलाइन। इंतज़ाम वही रहता है जो स्कूली परिवार को मिलता है: एक ट्यूटर, पहले ट्रायल क्लास, और फ़ीस सीधे ट्यूटर के साथ तय।
हाँ। हिंदी दिल्ली की पहली राजभाषा है, और दिल्ली राजभाषा अधिनियम, 2000 के तहत पंजाबी तथा उर्दू यहाँ की दूसरी राजभाषाएँ हैं, इसलिए घर इनमें से किसी भी भाषा में चल सकता है। लिखते समय बता दीजिए कि क्लास किस भाषा में चाहिए। व्यवहार में इसका असर दिखता है: जो बच्चा भौतिकी का चैप्टर अंग्रेज़ी में पढ़ता है और सोचता हिंदी में है, उसे अक्सर ऐसा ट्यूटर चाहिए जो बीच वाक्य में दोनों भाषाओं के बीच आ-जा सके।
नहीं, और इसकी वजह जान लेना ठीक रहता है। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 28 स्कूल में नियुक्त शिक्षक के निजी ट्यूशन पर रोक लगाती है। इसीलिए Edutara कॉलेज के विद्यार्थियों, स्नातकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और स्कूल व्यवस्था से बाहर पढ़ाने वालों में ट्यूटर खोजता है। कोई व्यक्ति स्कूल की नौकरी में रहते हुए निजी क्लास की पेशकश करे, तो वह पेशकश क़ानून के दायरे से बाहर है।
संपर्क पेज पर कक्षा, विषय और अपना इलाका लिखकर भेजिए। जवाब में हम बताएँगे कि आगे क्या करना है।
दिल्ली इस मामले में CBSE का शहर है, जैसा बहुत कम शहर हैं। सरकारी स्कूल शिक्षा निदेशालय चलाता है, नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अपने स्कूल चलाते हैं, केंद्रीय विद्यालय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के परिवारों के लिए हैं, और इन सबके ऊपर प्राइवेट स्कूल हैं। कक्षा 10 और 12 के आख़िर में लगभग सब वही बोर्ड पेपर देते हैं, इसीलिए रोहिणी का ट्यूटर और कालकाजी का ट्यूटर आम तौर पर एक ही सिलेबस पढ़ा रहे होते हैं।
दो बदलाव याद रखने लायक़ हैं। दिल्ली सरकार ने 2025-26 सत्र में 75 CM SHRI स्कूल बनाए, उन्हें निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत specified category स्कूल घोषित किया और CBSE से संबद्ध किया। दूसरी ओर 2021 में बना Delhi Board of School Education समेटा जा रहा है, उसके Schools of Specialised Excellence वापस CBSE में आ रहे हैं और 2025-26 के कक्षा 9 के विद्यार्थी CBSE में पंजीकृत किए गए। अभिभावक के लिए दोनों बदलाव एक ही दिशा में इशारा करते हैं: आपके बच्चे के हाथ में आने वाला पेपर CBSE का पेपर होगा।
ICSE और ISC परीक्षाएँ कराने वाले CISCE का दफ़्तर नेहरू प्लेस में है, और लाजपत नगर का The Frank Anthony Public School जैसे स्कूल वही कोर्स पढ़ाते हैं। CBSE का अपना मुख्यालय भी इसी शहर में है, प्रीत विहार के शिक्षा केंद्र में। दोनों बोर्ड यहीं बैठते हैं, और परिवार दक्षिणी दिल्ली से निकले बिना इन दोनों में से एक चुन लेता है।
शिक्षा निदेशालय के 2026-27 कैलेंडर में सत्र 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ। गर्मियों की छुट्टियाँ 11 मई से 30 जून तक रहीं, 17 से 19 अक्टूबर 2026 तक शरद अवकाश है, और सर्दियों की छुट्टियाँ 1 से 15 जनवरी 2027 तक हैं। अर्धवार्षिक परीक्षाएँ सितंबर के मध्य से अक्टूबर के मध्य तक हुईं, और कक्षा 3 से 9 तथा कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षाएँ 15 फ़रवरी से 23 मार्च 2027 तक तय हैं।
इस कैलेंडर को बोर्ड की तारीख़ों के साथ रखकर देखिए तो साल अपने आप बँट जाता है। CBSE की कक्षा 10 और 12 की परीक्षाएँ फ़रवरी के मध्य के आसपास शुरू होती हैं, 2026 के पेपर 17 फ़रवरी से शुरू हुए। इससे सर्दियों की छुट्टियाँ ठीक वहीं पड़ती हैं जहाँ बोर्ड वाले विद्यार्थी को उनकी ज़रूरत है, पहले पेपर से कुछ हफ़्ते पहले दो हफ़्ते की खुली सुबहें। और गर्मियों की छुट्टियाँ वहाँ पड़ती हैं जहाँ कमज़ोर विद्यार्थी पूरे साल की कसर, स्कूल के बोझ के बिना, चुपचाप पूरी कर सकता है।
कक्षा 10 में अब दूसरी परीक्षा भी है। CBSE ने जून 2025 में तय किया कि 2026 से कक्षा 10 का बोर्ड साल में दो बार होगा, फ़रवरी वाली परीक्षा सबके लिए अनिवार्य और मई वाली वैकल्पिक, जिसमें तीन विषय तक सुधारे जा सकते हैं और बेहतर अंक गिने जाते हैं। होम ट्यूटर फ़रवरी की योजना बनाता है। मई उस विषय के लिए मरम्मत का मौक़ा है जो बिगड़ गया हो, और उसे मुख्य मौक़ा मानकर चलने से पूरा साल हाथ से निकल जाता है।
दिल्ली के स्कूली साल में मौसम का बनाया एक छेद है, और उसके हिसाब से योजना बनाना यहाँ रहने का हिस्सा है। नवंबर 2025 में GRAP Stage III लागू होने पर शिक्षा निदेशालय ने अपने सभी स्कूलों तथा NDMC, MCD और दिल्ली छावनी बोर्ड के स्कूलों को कक्षा 5 तक की पढ़ाई hybrid मोड में, यानी स्कूल और ऑनलाइन दोनों तरह से, कराने का आदेश दिया। दिसंबर 2025 में Stage IV के तहत यही आदेश कक्षा 9 और कक्षा 11 तक पहुँच गया, जबकि बोर्ड वाले साल की कक्षा 10 और 12 स्कूल में ही चलती रहीं।
ट्यूशन पर ख़र्च कर रहे परिवार के लिए सीख सीधी है: जो इंतज़ाम सिर्फ़ ट्यूटर के आने पर टिका हो, वह हर सर्दी में दो हफ़्ते के लिए रुक जाता है। वही ट्यूटर उसी बच्चे को ऑनलाइन पढ़ाता रहे तो सिलसिला चलता रहता है। मई और जून में यही समस्या दूसरे रूप में आती है, जब दोपहर की गर्मी हर समझदार क्लास को या तो सुबह जल्दी धकेल देती है या सूरज ढलने के बाद।
यह बात ट्यूटर के साथ शुरू में ही तय कर लेनी चाहिए, पहले हफ़्ते में, जब तय करने में कुछ नहीं लगता। जिस हफ़्ते हवा बिगड़ती है उस हफ़्ते यह तय करना मतलब परीक्षा के क़रीब खड़े बच्चे के साथ जुगाड़ करना, और तब कुछ न कुछ छूट ही जाता है।
कक्षा 11-12 को यहाँ तीन परीक्षाएँ आकार देती हैं। JEE Main इंजीनियरिंग का रास्ता खोलती है, NEET-UG मेडिकल का, और CUET-UG दिल्ली विश्वविद्यालय तथा दूसरे केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक सीटों का। NTA ने 16 सितंबर 2026 को मार्च 2027 तक का परीक्षा कैलेंडर जारी किया, जिसमें JEE Main 2027 का पहला सत्र जनवरी 2027 के दूसरे पखवाड़े में रखा गया है, इस चेतावनी के साथ कि कैलेंडर की तारीख़ें हर परीक्षा का information bulletin आने तक अस्थायी रहती हैं। यह पेज लिखे जाने तक NEET-UG और CUET-UG 2027 की तारीख़ें घोषित नहीं हुई थीं।
दिल्ली विश्वविद्यालय स्नातक दाख़िले CUET-UG के अंकों पर, अपनी Common Seat Allocation System से करता है। इसका मतलब है कि यहाँ का कक्षा 12 का विद्यार्थी एक ही सर्दी में बोर्ड का सिलेबस और प्रवेश परीक्षा का सिलेबस, दोनों ढो रहा होता है। वन-टू-वन घंटों के पक्ष में असली दलील यही है: दोनों सिलेबस बहुत हद तक एक-दूसरे पर पड़ते हैं, और जो ट्यूटर दोनों जानता है वह एक चैप्टर एक बार पढ़ाकर दोनों पेपर के लिए तैयार कर देता है।
इंजीनियरिंग वाले रास्ते में एक स्थानीय नियम है, जिसे बच्चे को दूसरे शहर भेजने से पहले देख लेना चाहिए। DTU, NSUT, IGDTUW, IIIT-Delhi और DSEU में दाख़िला JEE Main रैंक पर JAC Delhi काउंसलिंग से होता है, और JAC Delhi 2026 के admission brochure के अनुसार 85% सीटें उन उम्मीदवारों की हैं जिन्होंने योग्यता परीक्षा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के भीतर किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या संस्थान से पास की हो। कक्षा 12 दिल्ली से बाहर पास करने पर वही उम्मीदवार outside Delhi region में चला जाता है और उन्हीं सीटों के छोटे हिस्से के लिए लड़ता है।
दिल्ली ने कोचिंग के मोहल्ले वैसे ही उगाए हैं जैसे दूसरे शहर बाज़ार उगाते हैं। IIT दिल्ली से सटी कालू सराय की गली JEE और NEET के संस्थानों से भरी है। पूर्व में लक्ष्मी नगर कॉमर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंसी के विद्यार्थियों का ठिकाना है। उत्तर में मुखर्जी नगर और बीच शहर में ओल्ड राजिंदर नगर सिविल सेवा की भीड़ सँभालते हैं, एक का झुकाव हिंदी माध्यम की ओर और दूसरे का अंग्रेज़ी की ओर। दिल्ली का कोई भी किशोर ये नाम बिना देखे गिना देगा।
कोचिंग बैच और घर का ट्यूटर अलग-अलग काम करते हैं। बैच पूरे कमरे के लिए रफ़्तार तय करता है और सिलेबस पूरा कराता है। घर का ट्यूटर उन चार चैप्टर पर काम करता है जिन्हें एक ख़ास विद्यार्थी सितंबर में समझना छोड़ बैठा था और जिन्हें बैच कब का पीछे छोड़ चुका है। दिल्ली के ज़्यादातर परिवार दोनों इसीलिए साथ चलाते हैं, ताकि पहला वाला उनके बच्चे को पीछे न छोड़ दे।
घंटों का सीधा हिसाब भी है। शहर के दूसरे छोर का बैच हफ़्ते की शाम में डेढ़ घंटा आने-जाने में ले लेता है, और बोर्ड वाले महीनों में वे मिनट पढ़ाई से ही कटते हैं। आपकी कॉलोनी तक आने वाला ट्यूटर वही मिनट लौटा देता है।
1 जनवरी 2026 से दिल्ली ग्यारह के बजाय तेरह राजस्व ज़िलों में बाँटी गई, और नई सीमाएँ नगर निगम के ज़ोन से मिलाई गईं। काग़ज़ी कामों में यह उपयोगी है और इस सवाल में बिल्कुल बेकार कि ट्यूटर साढ़े पाँच बजे विकासपुरी पहुँच पाएगा या नहीं। उसके लिए दो ही बातें मायने रखती हैं: ट्यूटर रहता कहाँ है और उस समय सड़क का हाल क्या रहता है।
इसका बड़ा हिस्सा मेट्रो सँभालती है। Blue Line द्वारका सेक्टर 21 से चलकर जनकपुरी, राजौरी गार्डन और करोल बाग होते हुए पूर्व में लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार और मयूर विहार तक जाती है। Yellow Line समयपुर बादली और विश्वविद्यालय तथा जीटीबी नगर जैसे कैंपस स्टेशनों को दक्षिण में हौज़ खास, मालवीय नगर और साकेत से जोड़ती है। Red Line रिठाला से रोहिणी होते हुए शाहदरा और दिलशाद गार्डन तक चलती है। इन लाइनों पर रहने वाला ट्यूटर एक हफ़्ते में कई इलाक़ों के स्लॉट रख लेता है; सड़क से शहर पार करने वाला ट्यूटर आम तौर पर नहीं रख पाता।
व्यावहारिक सलाह यह है कि ट्यूटर शहर के अपने ही हिस्से से माँगिए और हर हफ़्ते वही दिन, वही समय तय रखिए। जो स्लॉट खिसकता रहता है, ट्रैफ़िक, शादी या ख़राब हवा वाले दिन सबसे पहले वही रद्द होता है।
हिंदी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की पहली राजभाषा है, और दिल्ली राजभाषा अधिनियम, 2000 के तहत पंजाबी तथा उर्दू यहाँ की दूसरी राजभाषाएँ हैं। यहाँ के घर इन सब भाषाओं में और अंग्रेज़ी में चलते हैं, अक्सर एक ही बातचीत के भीतर, और बच्चा पढ़ता किसी एक भाषा में है जबकि सोचता दूसरी में है।
ट्यूशन में इसका असर लोगों की उम्मीद से ज़्यादा दिखता है। कक्षा 10 का विद्यार्थी विज्ञान की किताब अंग्रेज़ी में पढ़ता है और चैप्टर तब समझ पाता है जब कोई उसे हिंदी में समझा दे; कक्षा 12 का कॉमर्स विद्यार्थी शब्द अंग्रेज़ी में ही चाहता है, क्योंकि पेपर उन्हीं शब्दों में पूछता है। परीक्षाएँ भी अलग-अलग चलती हैं: 2026 में CM SHRI की कक्षा 6 वाली प्रवेश परीक्षा दो भाषाओं में थी, जबकि कक्षा 9 और कक्षा 11 के पेपर केवल अंग्रेज़ी में रखे गए।
इसलिए साफ़-साफ़ लिख दीजिए कि क्लास किस भाषा में चाहिए और तकनीकी शब्द अंग्रेज़ी में रहें या नहीं। माँग में यह एक छोटी-सी पंक्ति होती है और एक ट्रायल क्लास बेकार जाने से बचा लेती है।
क्लास, बोर्ड, विषय और अपना इलाक़ा भेज दीजिए। Edutara वैसा ट्यूटर ढूँढ़ेगा जो ठीक वही पढ़ाता हो, और बाक़ी बात पहली क्लास बता देगी।
आगे क्या होगा
शुरुआत एक ट्रायल क्लास से कीजिए और आगे तभी बढ़िए जब ट्यूटर विद्यार्थी को जँचे। ट्यूशन की फ़ीस आप सीधे ट्यूटर को देते हैं।